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अपनी बातः सरकार ने कंपनियों को `कोरोना डिफॉल्ट` से बचाया, ऑनलाइन एजूकेशन को भी बढ़ावा

अपनी बातः सरकार ने कंपनियों को `कोरोना डिफॉल्ट` से बचाया, ऑनलाइन एजूकेशन को भी बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ के पैकेज की आखिरी किस्त का आवंटन भी आज कर दिया गया।

 डॉ पवन जायसवाल
20 लाख करोड़ की आखिरी किस्त का आवंटन भी आज कर दिया गया। कोविड-19 पैकेज के चलते कंपनियों की सारी समस्याओं को समझकर पूरी राहत दे दी गई है। प्रभावित कंपनियां डिफॉल्ट की श्रेणी में नहीं आएंगी। अगले साल तक i&b कोड (इंसॉल्वेंसी एंड बंकृप्सी संहिता-2016) के अंतर्गत कोई दिवालिया प्रक्रिया नहीं होगी। एक करोड़ से छोटी कोई एमएसएमई आईबीसी श्रेणी में नहीं आएगी। पहले यह सीमा मात्र ₹100000 थी, जिसमें 100 गुने का इजाफा कर दिया गया है।
हालांकि इस कदम से एक तरफ एनसीएलटी (राष्ट्रीय कंपनी विधि ट्रिब्यूनल) में फाइल होने वाले केसों की संख्या में भारी कमी आने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड राज्य के लिए यह ट्रिब्यूनल प्रयागराज में 2016 में खोला गया था। प्रतिदिन लगभग 25 से 50 मुकदमें आईपीसी की धारा 7 एवं नौ के अंतर्गत फाइल किए जाते थे। वास्तव में इस कदम से बैंकों को और विषम परिस्थितियों से गुजरना होगा एवं डिफाल्टर मामले में बैंक एनसीएलटी में मुकदमा फाइल नहीं कर सकेंगे।
कंपनी अधिनियम 2013 से 7 प्रकार की आपराधिक धाराओं को हटाने की संस्तुति कर दी गई है। जैसे किसी भी तरह की ड्यू डेट (अंतिम तिथि) से छूट, बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की रिपोर्टिंग सालाना सामान्य बैठक (एनुअल जनरल मीटिंग) में देरी, सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) रिपोर्ट सबकुछ शामिल है। नॉन रणनीतिक पब्लिक सेक्टर के निजीकरण का प्रस्ताव हो गया है। अब एक नई सूची बनेगी। हालांकि कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। फिरभी नोटिफाइड सेक्टर में एक सरकारी उपक्रम बना रहेगा।
शहरियों को ऑनलाइन शिक्षा के लिए नए चैनल की सुविधा मिलेगी। विश्वविद्यालय 30 मई तक ऑनलाइन को कोर्स लांच करेंगे। तात्कालिक तौर पर यह कहा जा सकता है कि ई-एजुकेशन ई-कंटेंट बेहतर है। लेकिन विशालकाय एजुकेशन कि इंफ्रास्ट्रक्चर के डिफाल्ट होने से बेरोजगारी बढ़ेगी। प्रवासी मजदूरों के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने से बेरोजगारी की समस्या न हो इसके लिए मनरेगा में ₹40000 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था भी करने का ऐलान किया गया है। वर्तमान में मनरेगा बजट करीब ₹60000 का है।
इसके पहले शनिवार को वित्त मंत्री ने लगभग 1.25 लाख करोड़ के भावी खर्चों का बजट दिया। वैश्विक एवं घरेलू ग्रोथ से संबंध रखता ये पैकेज की चौथी थी।  हालांकि, वैश्विक मंदी समाप्त होने के बाद ही निवेशक इन योजनाओं में भाग लेंगे। वैसे इक्का-दुक्का निवेशक भारत के सहज कारोबारी माहौल का फायदा उठा सकते हैं। कोयला, खनिज, रक्षा, सिविल एविएशन, पॉवर डिस्कॉम केंद्र और अंतरिक्ष पर केंद्रित मंत्रालय में परियोजना विकास सेल बनेगा। हालांकि मेक इन इंडिया का दायरा सीमित रहा है। यह भी ध्यान रखना होगा।
अब कोल ब्लॉक में खुली नीलामी की जाएगी। लगभग चार दर्जन ब्लॉक नीलाम होंगे। कोयला क्षेत्र में वाणिज्य खनन को इजाजत राजस्व बंटवारे के आधार पर दी गई है। हालांकि पहले भी ऐसा ही होता था। कोयला क्षेत्र की मंदी चपेट में है, क्योंकि विकास दर में वृद्धि एवं बिजली की मांग बढ़ने के बाद ही निवेश मिल पाएगा। रक्षा उत्पादों में विदेशी निवेश की सीमा 49 से बढ़ाकर 74 फीसदी कर दी गई है। हथियारों की लिस्ट जारी होगी, जो स्वदेशी निर्माताओं से लिए जाएंगे। यह योजना मेक इन इंडिया को अभूतपूर्व फायदा पहुंचा सकता है। बशर्ते निर्माता उदासीन ना हों।
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का निगमीकरण होगा। कारपोरेटाइजेशन अब आवश्यक हो चला था। इससे ट्रांसपेरेंसी में बढ़ोतरी होगी। 6 नए एयरपोर्ट की नीलामी की घोषणा पहले से हो चुकी है। वास्तव में एविएशन सेक्टर के वर्तमान हाल को देखते हुए वैश्विक निवेश बेहद कठिन है। वैसे भी स्वदेशी एवं घरेलू एयरपोर्ट कंपनियां भी आर्थिक रूप से बुरे दौर से गुजर रही हैं और बुरे हाल में हैं।
भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सुधार चौथे पैकेज में नई पावर टेरिफ पॉलिसी का संकेत देते हुए किया गया है। अब राज्यों की पॉवर वितरण कंपनियों का निजीकरण होगा। अब बिजली को महंगा करना होगा। बिजली दरों का ढांचा बदलना और घाटे को खत्म करना इसकी शर्त होनी ही चाहिए। अब निजी कंपनियां कंपनियां इसरो की संपत्तियों का इस्तेमाल कर सकेंगी। पहले ही अंतरिक्ष कारपोरेशन का निर्माण किया जा चुका है। यह पैकेज संभवतः घरेलू ग्रोथ में वृद्धि करेगा।
(लेखक वरिष्ठ कर एवं वित्त सलाहकार होने के साथ ही वित्त मंत्रालय के प्रत्यक्ष कर मूल्यांकन सलाहकार भी हैं।)

 


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