पुरुषों के दबदबे वाले इस क्षेत्र में परचम फहरा रहीं योगिता रघुवंशी, प्रेरणादायी है उनकी कहानी

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
ट्रक चालक होना फायदेमंद तो है लेकिन पुरुषों के दबदबे वाले इस क्षेत्र से महिलाएं दूर ही रहती हैं. महिलाएं ट्रेन चालक और हवाई जहाज उड़ाने में नहीं हिचकतीं लेकिन ट्रक ड्राइवर बनने में उन्हें इसका व्यवहारिक पक्ष आगे बढ़ने से रोकता है. हालांकि, भोपाल की योगिता रघुवंशी उन महिलाओं से अलग हैं जो लकीर पर चलना पसंद करती हैं.
पुरुषों के एकाधिकार वाले क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से योगिता सड़क-दर-सड़क देश का हर हिस्सा नाप रही हैं. क्षेत्र, भाषा और लिंग भेद की तमाम चुनौतियों से जूझते और उन्हें पछाड़ते हुए योगिता ट्रक चालक बनकर सफलता का परचम लहरा रही हैं. ट्रवीटर पर अनिता चौहान नाम के हैंडल से योगिता रघुवंशी की तस्वीरों के साथ जानकारी देख अभिनेता अनुपम खेर ने भी भारत की इस महिला को सलाम किया है. योगिता की कहानी प्रेरणादायी है और उन महिलाओं के लिए एक शिक्षा भी कि महिलाएं किसी भी मायने में पुरुषों से कम नहीं हैं.

योगिता रघुवंशी एक ट्रक ड्राइवर हैं. दो बच्चों की मां योगिता एक सिंगल मदर हैं. वह बीते 15 सालों से ट्रक चला रही हैं. अपने ट्रक से वह देश के कोने-कोने तक सफर कर चुकी हैं. 49 वर्षीय योगिता अपने और अपने बच्चों का भरण पोषण करने के लिए ये काम करती हैं. हालांकि, इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ट्रक चलाते वक्त चौंकना रहना होता है, ताकि कोई हादसा ना हो.
देशभर में ट्रक से सफर करने वाली योगिता को इस काम से काफी मदद मिली है. योगिता ना केवल हिंदी, बल्कि अंग्रेजी, गुजराती, मराठी और तेलुगू भी काफी अच्छे सीख चुकी हैं.

योगिता का जीवन हमेशा से ऐसा नहीं था. साल 2003 में उनके पति राजबहादुर रघुवंशी की सड़क हादसे में मौत हो गई. योगिता के पति के अंतिम संस्कार में आते वक्त उनके भाई की भी एक हादसे में रास्ते में ही मौत हो गई. योगिता के पास कॉमर्स और लॉ की डिग्री हैं. साथ ही उनके पास ब्यूटीशियन का प्रमाणपत्र भी है, लेकिन जब उन्हें लगा कि उनके बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए ये सब पर्याप्त नहीं है, तब उन्होंने ट्रक चलाने का फैसला लिया.
योगिता का कहना है कि अपने ट्रक चलाने के लंबे सफर में उन्हें कभी कोई डर और खतरा महसूस नहीं हुआ. बाकी ड्राइवर भी उन्हें प्रोत्साहित करते हैं. योगिता कहती हैं कि ढाबों पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है.
एक ट्रक ड्राइवर के तौर पर उनका ये सफर काफी उतार चढ़ाव भरा रहा. उन्होंने अपने जीवन में बहुत सारी तकलीफें देखीं पर उन्होंने इसका भी डटकर सामना किया.
योगिता रघुवंशी मानती हैं कि भारत में महिलाएं खेल और सेवा क्षेत्र के करियर में निखर रही हैं पर वो मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में जगह बनाने में अब भी जद्दोजहद कर रही हैं.
योगिता रघुवंशी ने अच्छी कमाई के लिए ड्राइविंग का क्षेत्र चुना. वो कहती हैं कि इस जॉब में उन्हें हर दिन 2 से 3 हजार रुपये मिल जाते हैं और उसी पैसों से उन्हें अपने दो बच्चों का पालन-पोषण करना है. इस काम से उनका ड्राइविंग और अलग-अलग राज्यों की यात्रा का शौक भी पूरा हो जाता है. योगिता का मानना है कि ट्रक चलाते समय काफी चौंकना रहना पड़ता है. जरा सी चूक एक बड़े को दावत दे सकती है.

 

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