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हाँ तो राम मंदिर निर्माण की तारीख़ नोट कर लो 26 मई 2020- रंजन गोगोई

हाँ तो राम मंदिर निर्माण की तारीख़ नोट कर लो 26 मई 2020- रंजन गोगोई
क्या अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है? अयोध्या के आधुनिक इतिहास में 26 मई 2020 दर्ज हो गया है? श्रीराम जन्मभूमि पर विर्माणाधीन भव्य मंदिर का इतिहास जब भी याद किया जाएगा, यह तारीख याद आएगी? मंगलवार को श्रीराम मंदिर निर्माण की पहली ईंट नींव में रख दी गई है? रंजन गोगोई ने ट्वीट कर इस तारीख की याद दिलाई है। उन्होंने लिखा है कि हां तो राम मंदिर निर्माण की तारीख नोट कर लो-26 मई 2020।
दरअसल, इसी दिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने 28 वर्षों के बाद पहली बार जन्मभूमि परिसर में कदम रखा था। उन्होंने अस्थाई राम मंदिर में भगवान की पूजा-अर्चना करने के बाद जन्मभूमि परिसर में चल रहे समतलीकरण कार्य का मौका-मुआयना भी किया। इस दौरान उन्होंने जन्मभूमि परिसर क्षेत्र में समतलीकरण के दौरान मिले पुरातात्विक शिलाओं, मूर्तियों, पत्थरों आदि को भी देखा।
बुधवार को फूल-माला से सुसज्जित एक ईंट सोशल मीडिया पर वायरल हुई। हालांकि, यह ईंट कौन किसे दे रहा है, यह साफ नहीं है। तस्वीर में ईंट लेने और देने वाले के चेहरे नहीं दिख रहे हैं। एक अंग्रेजी न्यूज चैनल में भी इसी के आधार पर यह खबर चली कि अयोध्या में 26 मई 2020 को मंदिर निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस तस्वीर का कोी ओर-छोर तो नहीं पता चला लेकिन राज्य सभा सदस्य और पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के नाम से बने ट्वीटर हैंडल से यह ट्वीट हुआ कि हां तो राम मंदिर निर्माण की तारीख नोट कर लो- 26 मई 2020।

रंजन गोगोई ने बुधवार को एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि राम मंदिर की हर ईंट में उन तमाम कारसेवकों का बलिदान जुड़ा है जिनके खून से सरयू को लाल कर दिया गया। मैं उन कारसेवकों को ह्रदय से प्रणाम करता हूं।

दरअसल, रंजन गोगोई का यह ट्वीट 1990 की उन घटनाओं को लेकर है, जिसमें अयोध्या में कारसेवकों पर पुलिस ने गोली चलाई थी। अयोध्या की दीवारों पर अब भी उन गोलियों के निशान हैं। तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सरकार के आदेश पर कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी। उस घटना में सैकड़ों कारसेवकों को राम मंदिर निर्माण के लिए बलिदान देना पड़ा था। मंदिर परिसर में चल रहे समतलीकरण कार्य के दौरान मिले पुरातात्विक साक्ष्यों को लेकर भी सीएए विरोधियों पर रंजन गोगोई ने तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट किया कि तुम तो कागज तक नहीं दिखा पा रहे हो,, और यहां की मिट्टी-पत्थर तक “हिंदूराष्ट्र” होने का प्रमाण दे रहे हैं…।
बता दें कि जन्मभूमि परिसर में 11 मई से समतलीकरण का कार्य चल रहा है। इस दौरान तमाम ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की प्रतिमाएं, मूर्तियां, पत्थर आिद मिल रहे हैं जिन्हें राम मंदिर के अवशेष बताया जा रहा है। बता दें कि पहले मुगल शासक बाबर के सेनापति मीरबाकी ने 1528 में राम मंदिर को ध्वस्त कराकर उसी जगह पर बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। कहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण 2000 साल पहले हिन्दुओं में किवदंती बने महाराज विक्रमादित्य ने कराया था। तमाम अड़चनों के बाद 9 नवंबर 2019 को सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता में गठित संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से दिए फैसले में विवादित स्थान को हिन्दू पक्षकारों को दे दिया। साथ ही राम मंदिर निर्माण की बाधाएं भी दूर हो गईं।
इस प्रकरण में विश्व हिन्दू परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि वायरल हो रही तस्वीर पुरानी है। ट्रस्ट अध्यक्ष के जन्मभूमि परिसर में जाने से इस तस्वीर का कोई लेना-देना नहीं है।

 


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