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येचुरी का विवादित बयान- कैसे कहें हिंदू हिंसक नहीं होता, रामायण-महाभारत में भी हुई थी लड़ाई

येचुरी का विवादित बयान- कैसे कहें हिंदू हिंसक नहीं होता, रामायण-महाभारत में भी हुई थी लड़ाई
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के निकट आते-आते नेताओं की जुबान तल्ख होती जा रही है. बयानों की बौछारों के बीच ऐसी बयानबाजी कर जनता को भड़काने की कोशिशें भी की जा रही हैं जिससे जातीय और धार्मिक आधार पर वोटों का बंटवारा हो सके. कोई विचारधारा के नाम पर दूसरे को नीचा दिखा रहा है तो कोई वोटों का ध्रुवीकरण कराने के लिए हिन्दू-मुसलमान का सीधा उल्लेख कर रहा है. देश के बड़े दो छोटे राज्यों की सत्ता तक सिमट चुकी वामपंथी पार्टियों के नेता भी इसमें पीछे नहीं हैं.
ताजा बयान सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी का आया है. इसमें उन्होंने सवाल किया है कि क्या हिंदू हिंसक नहीं है का दावा सही है? एक बयान में सीताराम येचुरी ने कहा कि रामायण और महाभारत भी लड़ाई और हिंसा से भरी हुई थीं, लेकिन एक प्रचारक के तौर आप सिर्फ महाकाव्य के तौर पर उसे बताते हैं. उसके बाद भी दावा करते हैं कि हिंदू हिंसक नहीं है.

ANI

@ANI

Sitaram Yechury, CPI(M): Ramayana & Mahabharata are also filled with instances of violence & battles. Being a pracharak, you narrate the epics but still claim Hindus can’t be violent? What is the logic behind saying there is a religion which engages in violence & we Hindus don’

येचुरी बोले कि ऐसे में किसी एक धर्म को हिंसा से जोड़ने का क्या तर्क है और हम हिंदुओं को नहीं. गौरतलब है कि इस चुनाव प्रचार में हिंदू और हिंदुत्व से जुड़े कई ऐसे बयान हैं, जो चर्चा में बने हैं या जिनको लेकर विवाद भी होता रहा है.

हिंदू मुद्दे पर जारी है विवाद

इस विवाद से पहले जब भारतीय जनता पार्टी ने मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से अपना प्रत्याशी बनाया, तब हिंदू आतंकवाद की थ्योरी पर जमकर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी कई मौकों पर कहा कि कांग्रेस जिस हिंदू आतंकवाद के नाम पर हिंदुओं को बदनाम करती रही है, साध्वी प्रज्ञा उसी के खिलाफ हमारा जवाब है. माना जा रहा है कि सीताराम येचुरी का यह बयान हिन्दू आतंकवाद मुद्दे को लेकर दिया गया है.

मुस्लिम वोटों के लिए भी मची थी रार

सिर्फ हिंदू शब्द ही नहीं बल्कि मुस्लिम वोटों के लिए भी इस चुनाव में विवाद हुआ था. बसपा प्रमुख मायावती ने देवबंद की एक रैली में मुस्लिम मतदाताओं से अपील की थी कि वह एकजुट होकर महागठबंधन के लिए मतदान करें. जिसे चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन माना था और उन पर 48 घंटे के लिए चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाई थी. मायावती के अलावा नवजोत सिंह सिद्धू ने भी एक सभा में कुछ इसी तरह मुस्लिम मतदाताओं से वोट मांगे थे. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी अली और बजरंग बली पर बयान देकर चुनाव आयोग की कार्रवाई झेल चुके हैं.
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