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श्रीरामजन्मभूमि निर्माण की आ गई शुभ घड़ी, भगवान शिव की पूजा कर 10 जून से शुरू होगा कार्य : महंत कमल नयन दास

श्रीरामजन्मभूमि निर्माण की आ गई शुभ घड़ी, भगवान शिव की पूजा कर 10 जून से शुरू होगा कार्य : महंत कमल नयन दास

श्रीराम जन्मभूमि परिसर में प्रस्तावित मॉडल में मंदिर के साथ-साथ कई अन्य भवन भी बनाए जाएंगे। इनमें धर्मशाला, स्वास्थ्य केंद्र, प्रसाद केंद्र, आराधना केंद्र समेत कई भवन शामिल हैं। इसीलिए इसे राम मंदिर संकुल के रूप में भी जाना जा रहा है। ऊपर दिया मॉडल उसी का हिस्सा है।

अजय सिन्हा

अयोध्याः रामनगरी में श्रीराम मंदिर के लिए सदियों की लड़ाई का दाग खत्म करने का वक्त करीब आ चुका है। चार दिन बाद जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण कार्य सुरू होने जा रहा है। समतलीकरण के बाद निर्माण कार्य के लिए परिसरम में पूरी तैयारी हो चुकी है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए भगवान राम के आराध्य भोलेनाथ की आराधना की जाएगी।
राम जन्मभूमि परिसर में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भगवान शिव की आराधना की जाएगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी कमलनयन दास ने कहा है कि 10 जून को परिसर में ही स्थित कुबेर टीले पर विराजमान शशांक शेखर भगवान शिव की पूजा की जाएगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। विधि विधान से पूजा संत कमल नयन दास करेंगे।
उन्होंने बताया कि रामजन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण को लेकर तैयारी पूरी की जा चुकी है। परिसर में चल रहे समतलीकरण के बाद फाउंडेशन बनाए जाने की तैयारी को लेकर एलएंडटी कंपनी के अधिकारियों ने परिसर में डेरा डाल दिया है। वहीं मंदिर निर्माण की प्रक्रिया के लिए परिसर में धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन परिसर में स्थित प्राचीन कुबेर टीला पर होगा, जहां भगवान शिव विराजमान है। 10 जून को महंत कमल नयन दास अन्य संतों के साथ पूजन को आरंभ करेंगे जो कि सुबह 8:00 बजे से शुरू होगा। 2 घंटे तक चलने वाले अनुष्ठान के बाद मंदिर निर्माण कार्य शुरू होगा।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास के मुताबिक भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त से पहले भगवान रामेश्वर की स्थापना कर अभिषेक किया था। इसलिए मंदिर निर्माण से पहले भगवान शशांक शेखर का पूजन किया जाएगा। कहा कि मंदिर निर्माण की तैयारी पुरजोर तरीके से चल रही है। तराशे गए पत्थरों से ही मंदिर का निर्माण किया जाना है। भगवान श्रीरामलला अपने गर्भगृह में विराजमान होंगे।
इसके साथ ही अब यह भी साफ हो गया है कि विहिप के प्रस्तावित मॉडल के खिलाफ आवाज उठाने वाले संतों की मांग पूरी नहीं होगी। विरोधी खेमे के संतों ने मंदिर निर्माण मकराना पत्थर से करने और दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर के रूप में करने की मांग उठाई थी, लेकिन स्वामी वासुदेवानंद समेत कई संतों ने इस मांग को यह कहते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया कि तीन दशक पहले जिस मॉडल को मंजूर किया गया था,उसी आधार पर मंदिर बनेगा। मकराना में सफेद पत्थर नहीं हैं। नई डिजाइन बनाने और उसके हिसाब से निर्माण सामग्री जुटाने में भारी विलंब होगा।

 


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