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#WorldBiofuelDay उत्पादन 148 लाख लीटर से ज्यादा, रेलवे बॉयोफ्यूल से चला रहा ट्रेन

#WorldBiofuelDay उत्पादन 148 लाख लीटर से ज्यादा, रेलवे बॉयोफ्यूल से चला रहा ट्रेन
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
नई दिल्लीः तेल उद्योग (उत्तर प्रदेश) की ओर से विश्व जैव ईंधन दिवस पर्यटन भवन में मनाया गया. जैव ईंधन दिवस में निबंध व चित्रकला प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले स्कूलों के छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया. केंद्र सरकार की ओर से जैव ईंधन को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. विश्व जैव ईंधन दिवस पर सरकारी और गैर सरकारी संगठनों की ओर से तमाम कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं. पेट्रोल और डीजल के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए सरकार बॉयोफ्यूल को प्रोत्साहित कर रही है. रेलवे इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है. रेलवे ने अलग-अलग स्थानों पर बॉयोफ्यूल उत्पादन इकाइयों की स्थापना कर रहा है.
बॉयोफ्यूल (जैव ईंधन) प्राकृतिक रूप से बहुत ही सुरक्षित है. इसका पर्यावरण पर भी प्रभाव नहीं पड़ता है. पेट्रोल-डीजल से पर्यावरण प्रदूषित होता है. बॉयोफ्यूल का दाम भी कम है. उत्तर प्रदेश में बॉयोफ्यूल को बनाने का तरीका किसानों और छात्रों को बताया जाएगा. किसान बॉयोफ्यूल की दिशा में काफी कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी उसके सही उपयोग के बारे में नहीं पता है.
कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ में बॉयोफ्यूल से बस तक चलाई गईं. रेलवे ने बॉयोफ्यूल से चलने वाले ट्रेन इंजनों का भी विकास किया है. वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. पीके सेठ ने विश्व जैव ईंधन दिवस के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि बताया कि भुट्टे के अपशिष्ट से बॉयोफ्यूल बन सकता है. प्रो. सेठ ने कहा कि वैसे तो हमारे किसान काफी समझदार हैं. बस जरुरत है कि उन्हें बॉयोफ्यूल के विभिन्न तरीकों पर वैज्ञानिक तरीके से सहयोग प्रदान किया जाए.
उन्होंने यह भी कहा कि नीम, महुआ, सीमारुबा, करंज, जेट्रोफा, लेमनग्रास (नींबू घास), पामारोजा या रोषा घास, चिया, बांस, किनवा समेत कई प्रकार की खेती से जैव ईंधन बनता है. साथ ही भुट्टे के अपशिष्ट से भी बॉयोफ्यूल बनाया जा सकता है. इस बार प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित इनवेस्टर समिट मीट में भी इस क्षेत्र से जुड़े 10 से अधिक उद्योगपति सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की तरह से ही छात्र-छात्राओं को भी बॉयोफ्यूल के प्रति उनके शिक्षकों द्वारा जागरुक करने की जरुरत है. इसके अधिक उत्पादन से हमारे देश के आयात पर पड़ रहे बोझ को कम करने में मदद मिलेगी.

20 फीसदी तक क्षमता बढ़ाने पर जोर

इंडियन ऑयल के कार्यकारी निदेशक एके गंजू ने कहा कि वर्ष 2006 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल में पांच फीसदी इथेनॉल मिश्रण (बॉयोफ्यूल) मिलाने का निर्देश दिया था, जो कि अक्तूबर, 2008 में 10 फीसदी तक पहुंच गया. अब इसे 15 से 20 फीसदी तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है. पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण भी इतनी ही मात्रा में मिलाया जाएगा, जिससे पर्यावरण पर पेट्रोल, डीजल का असर कम पड़ेगा.
वर्ष 2013-14 में बॉयोफ्यूल का 38 करोड़ लीटर उत्पादन था, जो कि वर्ष 2017-18 तक 148 करोड़ लीटर से ज्यादा पहुंच चुका है. साथ ही सरकार ने बॉयोफ्यूल पर 18 से घटाकर पांच फीसदी जीएसटी कर दिया है.

 

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