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धारा 370 और 35ए हटने से उभरा #नवराष्ट्रवाद का ज्वार, कई पार्टियों में उठे विरोधी स्वर

धारा 370 और 35ए हटने से उभरा #नवराष्ट्रवाद का ज्वार, कई पार्टियों में उठे विरोधी स्वर
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

रणविजय सिंह

केंद्र की मोदी सरकार ने सावन के तीसरे सोमवार को जम्मू- कश्मीर से धारा 370 को भोथरा कर दिया. कश्मीर के पुनर्गठन विधेयक को राज्यसभा में मिले भारी बहुमत ने 35ए के भी परखच्चे उड़ा दिए. साथ ही 70 वर्षों से लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा देने की जारी मांग भी एक ही झटके में पूरी हो गई. खुद जम्मू-कश्मीर भी अब केंद्र के अधीन हो गया. यहां राष्ट्रपति शासन के फैसले से आतंकवाद की रीढ़ तोड़ने के साथ ही अलगाववादियों और उनके समर्थक नेताओं की कमर भी टेढ़ी करने का इंतजाम हो गया है.
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म करने की मांग जनसंघ के संस्थापक रहे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उठाई थी. देश के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल ने भी तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को इस धारा को हटाने के लिए राजी करने की नाकाम कोशिशें की. समाजवादी आंदोलन के अग्रणी नेता रहे डॉ राम मनोहर लोहिया ने भी देश की खातिर इसके खिलाफ आवाज उठाई थी. कालांतर में बनी भारतीय जनता पार्टी ने इसके खिलाफ प्रमुखता से आवाज उठाई. इसे पार्टी के घोषणा पत्र का मुख्य हिस्सा बना दिया लेकिन देश की राजनीतिक धारा में कई बार लोगों को यह महसूस हुआ कि कश्मीर धारा370 के बिना नहीं रह सकता.
ऐसा माहौल कश्मीरी नेताओं और देश के अन्य हिस्से में फैले वामपंथी और कांग्रेस नेताओं की बयानबाजियों से बना. नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली वर्तमान भाजपा सरकार ने पिछले कुछ दिनों में कश्मीर में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई. अमरनाथ यात्रा रोककर श्रद्धालुओं को घाटी छोड़ने की सलाह दी तो कश्मीर के प्रमुख नेताओं महबूबा मुफ्ती और पिता-पुत्र फारुख अब्दुल्ला-उमर अब्दुल्ला ने तीखी बयानबाजियों से यह जाहिर करने की कोशिश की कि धारा 370 हटी तो कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा.
हालांकि, मोदी सरकार ने रणनीतिक तरीके से कश्मीरी अवाम को साधने का काम किया, जिससे इन नेताओं के पीछे खड़ी होने वाली भीड़ गायब है या न्यूनतम है. हैरत यह कि नेताओं की गिरफ्तारी और नजरबंदी से सरकार के फैसले के बाद भी कश्मीर घाटी में कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ. पूर्व में नेतृत्वविहीन जनआंदोलन भी हुए हैं लेकिन कश्मीरी अवाम ने यह साफ कर दिया कि नेता ही उन्हें भड़काते और बरगलाते हैं. वरना वह देश की मुख्यधारा के साथ हैं. उन्हें रोजगार और विकास चाहिए. सरकार के फैसले के बाद कश्मीर में कई जगहों पर भाजपा नेताओं ने खुलकर तिरंगा लहराया और भारत माता के जयकारे लगाए. दो दिन पहले तक यह नेता आतंकियों के डर से बाहर निकलने में भी कांपते थे. इस फैसले ने कश्मीर में बड़ा बदलाव की यह एक झांकी दिखाई है.
धारा 370 और 35ए के खिलाफ देशभर में सरकार के समर्थन में एक ऐसा माहौल खड़ा हो गया है जिसे नव राष्ट्रवाद की संज्ञा दी जा सकती है. इसमें केवल जनता ही शामिल नहीं है, बल्कि उन पार्टियों के नेता भी शामिल हैं जो विभिन्न मंचों पर सरकार के इस प्रयास के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं. लोगों को हैरत तब हुई जब धारा-370 की समर्थक रही समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी ने भी राज्यसभा में कश्मीर के पुनर्गठन विधेयक के पक्ष में मतदान किया.

सपा, कांग्रेस और आप में दिखा भारी विरोधाभास

धारा-370 के पक्ष-विपक्ष को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में भी भारी विरोधाभास देखने को मिला है. राज्यसभा और बाहर कांग्रेस सरकार के फैसले का विरोध कर रही थी लेकिन उसके कर्णधारनेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने समर्थन या विरोध में एक भी शब्द नहीं बोला. यहां तक कि सोनिया गांधी के सलाहकारों में गिने जाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विदी ने खुलेआम कहा कि देर से ही सही, इतिहास की भूल को सुधारा गया है. इसका स्वागत है.
यही नहीं, कांग्रेस के राज्यसभा में चीफ ह्वीप भुवनेश्वर कलिता ने पार्टी नेताओं के हाथ से तोते उड़ा दिए. असम से राज्यसभा में चुने गए कलिता ने यह कहकर कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया कि पार्टी अपने आप को खत्म करने के रास्ते पर चल पड़ी है. यह देश के मिजाज के खिलाफ है. मैं इसमें उसका भागीदार नहीं बन सकता. यही नहीं, युवा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि मेरी व्यक्तिगत राय यही है कि 21वीं सदी में अनुच्छेद 370 का औचित्य नहीं है. इसको हटना चाहिए. हालांकि, पार्टी नीति के खिलाफ बयान देखकर उन्होंने ट्वीटर से इसे हटा लिया है. मिलिंद देवड़ा और रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह भी धारा 370 के खिलाफ सरकार के पक्ष में खड़े नजर आए.
आम आदमी पार्टी की नेता अलका लांबा ने कहा कि एक नेता को नहीं पता कि दूसरा नेता क्या फ़ैसले ले रहा है, कार्यकर्त्ता तो खुद ही गुमराह होगा. अरविंद केजरीवाल सरकार का समर्थन कर रहे हैं और संजय सिंह, प्रीति मेनन  और कुछ विधायक विरोध… समाजवादी पार्टी के सांसद संजय सेठ ने भी सरकार के समर्थन में राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है.

 

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