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दो जनवरी को खत्म होगा सुप्रीम कोर्ट का विंटर विकेशन, जनवरी में अयोध्या व कश्मीरी नागरिकता पर सुनवाई संभव

दो जनवरी को खत्म होगा सुप्रीम कोर्ट का विंटर विकेशन, जनवरी में अयोध्या व कश्मीरी नागरिकता पर सुनवाई संभव
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स , प्रयागराज     
पहली जनवरी को नए साल की उमंग के अगले दिन सर्दियों की छुट्टियों के बाद सुप्रीम कोर्ट खुल रहा है. कोर्ट में कामकाज शुरू होने के बाद अयोध्या में रामजन्मभूमि विवाद के बहुप्रतीक्षित मामले और जम्मू कश्मीर के स्थाई निवासियों को विशेष दर्जा व पुनर्वास कानून की वैधानिकता जैसे बड़े मामले में सुनवाई संभव है.
यही नहीं, कोर्ट इसी माह सीबीआइ में घमासान के बाद निदेशक पद का कामकाज छीने जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आलोक वर्मा की याचिका पर फैसला भी सुना सकता है. साथ ही कांग्रेस की चुनावी फसल साबित हुए राफेल फैसले में संशोधन की मांग वाली सरकार की अर्जी पर भी सुनवाई हो सकती है.
गत 17 दिसंबर को सर्दियों की छुट्टी के लिए सुप्रीम कोर्ट बंद हो गया था. हालांकि, कोर्ट की रजिस्ट्री खुली थी जिसमें मामले दाखिल होते रहे. छुट्टियों के दौरान ही कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट से सिख विरोधी दंगों में सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को सजा भुगतने के लिए 31 दिसंबर तक सरेन्डर करने का आदेश दिया है. ऐसे में उम्मीद की जाती है कि अदालत खुलते ही सज्जन कुमार की ओर से भी तत्काल राहत की गुहार लगाई जाएगी. इसी बीच सरकार भी राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे की सीबीआइ जांच की मांग खारिज करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कुछ तकनीकी सुधार की मांग वाली अर्जी भी दाखिल कर चुकी है.
अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद वैसे तो 4 जनवरी को सुनवाई के लिए लगा है, लेकिन इस दिन मुख्य मामले की सुनवाई की तिथि तय होने पर ही सुनवाई होने की उम्मीद है. अयोध्या मामले की जल्द सुनवाई और स्थगन देने का कारण बताने की मांग वाली अर्जी भी सुनवाई के लिए लगी है. कोर्ट उस पर कोई आदेश दे सकती है.
भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की संभावना वाला जम्मू कश्मीर पुनर्वास कानून 1982 को चुनौती देने वाली याचिका को कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर जनवरी के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए लगाने का आदेश दिया था. यह कानून 1947 से 1954 के बीच पाकिस्तान चले गए लोगों और उनके वंशजों को जम्मू कश्मीर में पुनर्वास की इजाजत देता है.
पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने जम्मू कश्मीर सरकार से पूछा था कि इस कानून के तहत अभी तक कितने लोगों ने आवेदन किया है और आवेदन करने वालों में कितने राज्य के स्थाई निवासी हैं तथा कितने आवेदन उनके वंशजों की ओर से प्राप्त हुए हैं. उस दिन कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से कानून में प्रयुक्त वंशज शब्द के मायने और परिभाषा पूछते हुए अचरज के साथ सवाल किया था कि जो लोग 1947 से 1954 के बीच पाकिस्तान चले गए उनके वंशजों को कैसे फिर जम्मू कश्मीर में पुनर्वास की इजाजत दी जा सकती है.
इसके साथ ही जम्मू कश्मीर के स्थाई निवासियों को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 35ए की वैधानिकता के मुद्दे पर भी जनवरी में ही सुनवाई हो सकती है. हालांकि, जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर अप्रैल में सुनवाई होगी.
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