Nationalwheels

मोदी सरकार के ऐतिहासिक कदम से कश्मीर में क्या-क्या बदलेगा, अमित शाह ने बताया

मोदी सरकार के ऐतिहासिक कदम से कश्मीर में क्या-क्या बदलेगा, अमित शाह ने बताया
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले तीन महीने में ही जम्मू-कश्मीर से धारा370 और 35ए की समाप्ति के साथ पूर्ण राज्य के दर्जे की समाप्ति, लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश के ऐलान के ताप से पूरे देश की राजनीति गरम है. मोदी सरकार के इस ताबड़तोड़ फैसले से कांग्रेस भी झुलस गई. उसके बड़े नेता जर्नादन द्विवेदी यह कहकर अपनी पार्टी के जख्मों पर नमक छिड़क दिया कि आजादी के समय हुई एक भूल को सुधारा गया है. कश्मीर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला को हिरासत में ले लिया गया है. कल से दोनों नेता नजरबंद थे. देश के ज्यादातर हिस्सों में सरकार के इस फैसले से जश्न का माहौल है.
अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर (201 पुनर्गठन) विधेयक, 2019 को जम्मू और कश्मीर को एक विधान सभा के साथ केंद्रशासित प्रदेश बनाने के साथ-साथ लद्दाख को एक विधान सभा के बिना केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया. जम्मू और कश्मीर आरक्षण अधिनियम (2004 में संशोधन) विधेयक, 2019 में जम्मू और कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन किया गया. यह विधेयक नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% कोटा बढ़ाने का प्रयास करता है. दोनों विधेयकों को राज्यसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया.
उधर, कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कौन-कौन प्रस्ताव पेश किए, लोगों में इसे लेकर भी उत्सुकता बनी रही. वजह,  धारा370 और 35ए पर ही पूरे दिन चर्चा होती रही. राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का संकल्प लाती है. अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर (पुनर्गठन) विधेयक, 2019 और जम्मू और कश्मीर आरक्षण (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2019 राज्यसभा में सर्वसम्मति से पारित भी हो गए.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज जम्मू और कश्मीर के संबंध में दो बिल और दो प्रस्ताव पेश किए. ये इस प्रकार हैं:
संविधान (जम्मू और कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश, 2019 {रेफ. भारत के संविधान का अनुच्छेद 370 (1)} – भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 370 से संबंधित 1954 के आदेश को वापस करने के लिए जारी किया गया.
भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का संकल्प {रेफ. अनुच्छेद 370 (3)}.
जम्मू और कश्मीर (पुनर्गठन) विधेयक, 2019 {रेफ. भारत के संविधान का अनुच्छेद 3}
जम्मू और कश्मीर आरक्षण (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2019.
बिल और प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेताओं ने भले ही विरोध किया लेकिन उनके चेहरों की हवाइयां उड़ी हुई नजर आईं. अमित शाह ने कहा कि सरकार एक प्रस्ताव ले रही है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत प्रावधानों को निरस्त करेगा, जिसने जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया. अनुच्छेद 370 के प्रावधान भारत के राष्ट्रपति द्वारा संसद की सिफारिश के बाद इस संबंध में एक अधिसूचना जारी होगा. इसके बाद भारत का संविधान देश के अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ जम्मू-कश्मीर पर भी लागू होगा.
संकल्प और जम्मू-कश्मीर के भविष्य पर आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह ने कहा, “मैं सिर्फ यह कहूंगा कि सरकार जो बिल ला रही है वह ऐतिहासिक है. धारा 370 ने J&K को भारत में विलय को रोका है. वोट बैंक की राजनीति ने राज्य के युवाओं को 70 से अधिक वर्षों तक लूटा है. धर्म की राजनीति को हर कीमत पर टाला जाना चाहिए. अनुच्छेद 370 सभी धर्मों के लोगों के लिए समान रूप से हानिकारक है.
शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में निजी निवेश के दरवाजे खुल जाएंगे, जिससे वहां विकास की संभावना बढ़ेगी. निवेश में वृद्धि से रोजगार सृजन में वृद्धि होगी और राज्य में सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे में और सुधार होगा. उन्होंने कहा कि भूमि खरीदने से निजी लोगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से निवेश आएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि इस ऐतिहासिक कदम का विरोध करने वाले लोगों ने इस आशंका को उठाया था.
गृह मंत्री ने उन नागरिकों और सैनिकों की शहादत को याद किया जिन्होंने 1989-2018 के दौरान अपनी जान गंवाई. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 नहीं होता ये लोग अपनी जान नहीं गंवाते. पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को अब तक नागरिकता नहीं मिली. वे राज्य में पार्षद नहीं बन सकते. भारत के दो प्रधानमंत्री उन शरणार्थियों में से ही चुने गए थे. 
शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 देश के लोगों को वहां व्यापार करने के लिए बाधित करता है. आर्थिक प्रतिस्पर्धा के अभाव ने विकास को रोक दिया है और भ्रष्टाचार पनप रहा है. कीमतें एक चट्टान के नीचे हैं क्योंकि कोई भी वहां जमीन नहीं खरीद सकता है. पर्यटन सहित किसी भी उद्योग को वहां पनपने की अनुमति नहीं है. स्थानीय आबादी के लिए प्रचुर मात्रा में आर्थिक अवसरों की मौजूदगी के बावजूद लोग बेरोजगार हैं. 
गृह मंत्री ने कहा, “मैं कश्मीरी युवाओं को बताना चाहता हूं कि धारा 370 उनके लिए कोई लाभकारी नहीं है. यह केवल कुछ संभ्रांत लोगों को लाभान्वित करेगा, जो युवाओं को हमेशा के लिए गरीब बनाए रखना चाहते हैं और अपने लिए सभी लाभ प्राप्त करना चाहते हैं. अनुच्छेद 370 का समर्थन करने वालों को यह जानना चाहिए कि यह धारा राज्य के बाहर के पेशेवरों को राज्य में बसने से रोकता है और इसलिए कोई भी वहां नहीं जाना चाहता है. अब, जब यह प्रस्ताव पारित हो जाता है और अनुच्छेद 370 को हटा दिया जाता है तो प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिलेगा और प्रत्येक रोगी को आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल मिलेगी. 
राज्य से बाहर शादी करने वाली राज्य की बेटियां संपत्ति पर अपना अधिकार खो देती हैं. यह महिलाओं और उनके बच्चों के लिए कितना भेदभावपूर्ण है. एससी और एसटी लोगों के साथ भेदभाव किया गया है और राजनीतिक कार्यालयों में आरक्षण से वंचित किया गया है. शाह ने सदन को आश्वासन दिया कि यदि केंद्र शासित प्रदेश मॉडल अच्छा काम करता है तो हमारी सरकार जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा देने पर भी विचार करेगी. इसके लिए किसी संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी.
उन्होंने कहा कि धारा-370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर भारत का एक सच्चा हिस्सा बन जाएगा. कश्मीर की सभी समस्याओं के समाधान का मार्ग अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के माध्यम से जाता है. अनुच्छेद 370 एक अस्थायी और क्षणिक प्रावधान है, इसे हटना था. इसके लिए केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता थी, जो केवल वर्तमान सरकार के पास थी. 
Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *