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क्या केरल में मुसलमानों का पहला जिहाद था #मोपला विद्रोह, इतिहासकारों में है मतभेद

क्या केरल में मुसलमानों का पहला जिहाद था #मोपला विद्रोह, इतिहासकारों में है मतभेद
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
इस्लामी देशों सीरिया, ईराक, सउदी अरब और अब अफगानिस्तान में फैल रहे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के जिहाद से केरल इकलौता ऐसा प्रदेश है जहां के युवा जिहाद की लड़ाई में शामिल होने गए. हालांकि, यह पहला मामला नहीं है जबकि केरल जिहाद के लिए देशभर में चर्चित हुआ हो. 20 अगस्त का दिन केरल के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है. 1921 में आज ही के दिन केरल के मालाबार इलाके में मोपला विद्रोह  की शुरुआत हुई थी. शुरुआत में अंग्रेजों के खिलाफ हुआ मोपला विद्रोह बाद में सांप्रदायिक रंग में रंग गया. जिहाद के इस काले इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि कभी व्यापारी के रूप में केरल पहुंचे मुसलमानों ने वक्त के साथ इतनी ताकत जुटा ली कि वह तत्कालीन सत्ता से ही नहीं टकराए, बल्कि हिन्दुओं के खून के भी प्यासे हो गए. कहा जाता है कि विद्रोह के दौरान मालाबार इलाके के मोपला मुसलमानों ने हजारों हिंदुओं की हत्या कर दी थी. हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार हुए. हजारों हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन कर उन्हें मुसलमान बना दिया गया.

केरल में अब भी मोपला विद्रोह की चर्चा कभी न कभी छिड़ती रहती है. खासकर दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग इस विद्रोह को लेकर केरल के वामपंथियों पर निशाना साधते रहते हैं. वामपंथी इतिहासकार इसे उच्च जाति के हिन्दू जमींदारों के खिलाफ हुआ आंदोलन बताते हैं तो दक्षिणपंथ से जुड़े इतिहासकार इसे धार्मिक कट्टरता से जोड़ते हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी मोपला विद्रोह को यादों को ताजा करने के लिए वामपंथियों पर हमले हुए थे. केरल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मोपला विद्रोह को केरल में हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों का पहला जिहाद बताया था. उनके बयान ने खासी राजनैतिक सुर्खियां बटोरी थीं.

खिलाफत आंदोलन के साथ भड़का था मोपला विद्रोह

मोपला विद्रोह खिलाफत आंदोलन की आग के साथ भड़का था. दरअसल, प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार हुई. इसके बाद अंग्रेजों ने वहां के खलीफा को गद्दी से हटा दिया. तुर्की में हुई इस कार्रवाई के खिलाफ दुनियाभर के मुसलमान नाराज हो गए. तुर्की के सुल्तान की गद्दी वापस दिलाने के लिए ही खिलाफत आंदोलन की शुरुआत हुई.

26th September 1925: Moplah prisoners go to trial at Calicut on the Malabar Coast in India’s south-western state of Kerala, charged with agitation against British Rule in India. (Photo by Topical Press Agency/Getty Images)
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल अबुल कलाम आजाद, जफर अली खां और मोहम्मद अली जैसे मुस्लिम नेताओं ने भी खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया. इस आंदोलन को मोहनदास करमचंद गांधी यानी बापू का भी समर्थन प्राप्त हुआ. दरअसल, महात्मा इस आंदोलन को समर्थन देकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में हिंदूओं और मुसलमानों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौर में बापू ने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन का बिगुल फूंका था. कुछ दक्षिणपंथी इतिहासकारों के मुताबिक खिलाफत आंदोलन के समर्थन में हिंदुओं को एकजुट करने के लिए ही असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गई.
केरल में ऊंची जाति के जमींदार हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों का विद्रोह 

केरल में खिलाफत आंदोलन में मालाबार इलाके के मोपला मुसलमान भी शामिल थे. मोपला खुद को मलयाली मुस्लिम बताते हैं. इस समुदाय के ज्यादातर लोग छोटे किसान और व्यापारी थे. उनपर इस्लाम के कट्टर मौलवियों का प्रभाव था. इसके विपरीत मालाबार इलाके की जमीनों और बड़े व्यापारों पर उच्च वर्ग के हिंदुओं का कब्जा था. मोपला मुसलमान इनके यहां बटाईदार या काश्तकार के तौर पर काम करते थे.

खिलाफत आंदोलन की शुरुआत में आंदोलन अंग्रेजों के खिलाफ था. अंग्रेजों ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए कड़ा रुख अपनाया. आंदोलन के बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. फिर, मालाबार इलाके में आंदोलन का नेतृत्व मोपला मुसलमानों के हाथों में चला गया. फिर, मालाबार में मोपलाओं के आंदोलन का स्वरूप धार्मिक हो गया. मोपलाओं ने जमींदार हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया.

इतिहाकारों के एक वर्ग का मानना है कि ये जमींदारों के खिलाफ बटाईदारों के विद्रोह था. मोपला मुसलमान कम मजदूरी, काम करने के तौर तरीकों और दूसरे भेदभावों की वजह से हिंदू जाति के जमींदारों से नाराज थे. इन इतिहासकारों का तर्क है कि केरल में जमींदारों के खिलाफ इस तरह के विद्रोह पहले भी होते रहे थे. 1836 और 1854 में भी इस तरह के विद्रोह हुए थे. 1841 और 1849 का विद्रोह काफी बड़ा था. लेकिन 1921 में मोपलाओं के विद्रोह ने हिंसक और धार्मिक शक्ल अख्तियार कर लिया.

मोपला विद्रोह में हजारों लोग मारे गए

मोपलाओं ने कई पुलिस स्टेशनों में आग लगा दी. सरकारी खजाने लूट लिए गए. अंग्रेजों को अपने निशाने पर लेने के बाद इन लोगों ने जमीदारों के साथ इलाके के आम हिंदुओं पर भी हमले शुरू कर दिए. कहा जाता है कि मोपला विद्रोह के दौरान हजारों हिंदू मारे गए. उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार हुए. हजारों हिंदुओं को धर्म परिवर्तन करना पड़ा. बाद में आर्य समाज की तरफ से उनका शुद्धिकरण आंदोलन चला. इस आंदोलन में मुस्लम बन गए तमाम लोगों को फिर हिंदू धर्म में वापस लाया गया. उन्हें हिंदू बनाया गया. इसी आंदोलन के दौरान आर्य समाज के नेता स्वामी श्रद्धानंद को उनके आश्रम में ही 23 दिसंबर 1926 को गोली मार दी गई.

कहा जाता है कि मोपलाओं का विद्रोह भटक गया था. इसने सांप्रदायिक रंग ले लिया. हिन्दुओं का साथ न मिलने के कारण ही ये असफल भी रहा. केरल में मोपलाओं के विद्रोह को लेकर आज भी मुस्लिम समुदाय को कटघरे में खड़ा किया जाता है.

 

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