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नजरियाः लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने जो कहा, गहरे हैं उसके मायने

नजरियाः लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने जो कहा, गहरे हैं उसके मायने
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
पड़ोसी पाकिस्तान की रीढ़ को गीला कर देने वाला कश्मीर का अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त करने का जिक्र हो या जनसंख्या विस्फोट पर चिंता, प्लास्टिक से होने वाले नुकसान या फिर एक देश- एक चुनाव का मुद्दा रहा या फिर पूरे भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), राशन वितरण में नेशनल मोबिलिटी कार्ड को लागू करना हो या ट्रिपल तलाक़ का अंत कर मुसलमान महिलाओं को अन्य धर्म की महिलाओं के साथ बराबरी पर लाने के लक्ष्य को पूरा करने की बात हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल क़िले की प्राचीर से पूरे भारत को एक धागे में पिरोता नव राष्ट्रवाद से प्रभावित भाषण दिया. संकेतों और भाषणों के जरिए पीएम मोदी के कदमों पर नजदीकी नजर रखने वालों का मानना है कि यह केवल स्वतंत्रता दिवस समारोह नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी ने अगले पांच वर्षों का रोड मैप खींच दिया है. प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सरकार के दूसरे कार्यकाल में लालकिले से दिए पहले भाषण के जरिए नए भारत की राजनीतिक तस्वीर भी खींच दी है. इस दौरान पीएम ने कई प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक पहल को भी अपनी हरी झंडी दिखाई, जिसके दूरगामी प्रभाव दिख सकते हैं.
प्रधानमंत्री ने जल, थल और वायु सेनाओं के लिए चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ (सीडीएस) की नियुक्ति की घोषणा की है. यह लंबे समय से चली आ रही एक प्रशासनिक नियुक्ति है जिसकी वकालत पूर्व कैबिनेट सचिव नरेश चंद्र की अध्यक्षता वाली समिति ने 1990 में दोहराया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीएसडी तीनों सेनाओं से जुड़े मुद्दों पर समन्वयक का काम करेगा. हालांकि, अभी यह साफ होना बाकी है कि सीडीएस का मॉडल क्या होगा? क्या यह वर्तमान इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ़ की महज एक औपचारिकता होगी या प्रधानमंत्री को सभी सैन्य मामलों पर सलाह देने वाला एक अंतिम बिंदु होगा जो सशस्त्र बल के भीतर अधिकार के संतुलन को बदलने में काफ़ी प्रभावी हो सकता है.
प्रधानमंत्री सशस्त्र बलों के सामने नई चुनौतियों का उल्लेख किया. उन्होंने आतंकवाद की चुनौती का भी ज़िक्र किया लेकिन इस दौरान उन्होंने एक बार भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. जबकि बाक़ी पड़ोसी देशों जैसे अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के बारे में कहा कि पड़ोस के सभी देश किसी न किसी प्रकार के आतंकवाद का शिकार थे. इसके जरिए पाकिस्तान को लेकर प्रधानमंत्री ने अपनी प्राथमिकता भी साफ कर दी.
प्रधानमंत्री ने आर्थिक प्रबंधन की बात की और विकास पर जोर देते हुए कहा कि इसी के बल पर सामाजिक समता प्राप्त की जा सकती है. उन्होंने ग़रीबों के सशक्तिकरण की दिशा में योगदान के लिए किए गए सभी उपायों जिसमें वित्तीय समावेशी योजनाएं, टॉयलेट के निर्माण, बिजली, पानी और अन्य कदमों के प्रावधानों की बात की. प्रधानमंत्री ने देश के सभी नागरिकों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था के लिए ज़रूरी सरकार व्यय (3.5 लाख करोड़ रुपये) की घोषणा और जल संरक्षण और पानी को रिसाइकल करने को लेकर योजना की घोषणा की. वर्तमान में केवल 50 फीसदी गांवों में ही पीने का साफ पानी उपलब्ध है.
पीएम ने अपने भाषण में एक नया एजेंडा पेश किया जो भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल नहीं था लेकिन पिछले दो महीनों से इस पर चर्चा बढ़ी है. यह जनसंख्या विस्फ़ोट को लेकर काम करने की बात है. माना जा रहा है कि सरकार जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सख्त उपाय अपना सकती है, जिसके राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं. वजह, जनसंख्या नियंत्रण की बात आते ही देश का एक समुदाय बिदक जाता है. बता दें कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता यह विषय उठाते रहे हैं कि बहुसंख्यकों की तुलना में अल्पसंख्यक तेज़ी से जनसंख्या बढ़ा रहे हैं. प्रधानमंत्री ने धर्म से इतर जनसंख्या विस्फ़ोट पर अपनी चिंता जताते हुए कहा परिवारों को चाहिए कि वो पहले यह सोचें कि क्या वे अपने भावी बच्चों की देखभाल करने की स्थिति में हैं.
पीएम ने एक राष्ट्र, एक चुनाव का विचार लालकिले से फिर दुहराया है, लेकिन अभी इसका कोई रोडमैप नहीं बन सका है. जनसंख्या नियंत्रण और एक साथ चुनाव दोनों ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें लेकर विपक्ष का विरोध जताना तय है. जनसंख्या नियंत्रण का मुद्दा भाजपा सांसद राकेश सिन्हा प्राइवेट बिल के जरिए राज्यसभा में उठा चुके हैं तो भाजपा नेता अश्वनी उपाध्याय ने कोर्ट में इसे लेकर एक याचिका दायर कर रखी है. ऐसे में प्रधानमंत्री का लालकिले से जनसंख्या विस्फोट पर बोलना यह साफ संकेत है कि सरकार इस पर कोई नीति बनाने की सोच रही है.
हालांकि, प्रधानमंत्री ने पूरे भाषण के दौरान राम मंदिर जैसे ज्वलंत मुद्दे का जिक्र नहीं किया. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को मद्देनजर रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय को उठाने से बचने की कोशिश की है.

 

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