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#विजयदशमीः आतंकी, नक्सली, बलात्कारी, भ्रूणहत्या और उनकी सोच है कलियुग का रावण

#विजयदशमीः आतंकी, नक्सली, बलात्कारी, भ्रूणहत्या और उनकी सोच है कलियुग का रावण
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
पूरा देश आज हर्षोल्लास के साथ विजयदशमी पर्व मना रहा है. रामलीला का समापन कर आज ही दशानन रावण के पुतले फूंके जाएंगे. कलियुग में साक्षात रावण तो नहीं है लेकिन इन पुतलों में रावणी प्रवृत्तियों और समाज व देश को नुकसान पहुंचाने वाली सोच भरी हुई है. पुतलों के दहन के साथ यह सोच भी मरेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है लेकिन सभ्य देश में आतंकवादी, देश को घुन की तरह खोखला कर रहे विदेशों से प्रभावित नक्सली, बेटियों और महिलाओं को जीवनभर का जख्म दे रहे बलात्कारी व उनके जैसी सोच रखने वाले ही कलियुग के रावण हैं. देश को इनका अंत करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना चाहिए. वर्तमान में आतंक और नक्सली समस्या की जड़ों पर गहरे वार हो रहे हैं लेकिन यह कहना कठिन है कि देश के अंदर बैठे इनके पालनहारों के रहते रावणी प्रवृत्तियों वाले इन कलियुगी दानवों का अंत कब तक हो सकेगा.
प्रयागराज के वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीश त्रिपाठी का मानना है कि आज रावण दृश्य नहीं है लेकिन सीता हरण हो रहा है. दुर्योधन प्रत्यक्षतः दिखाई नहीं पड़ता फिर भी चीर-हरण रोज हो रहा है. भाई द्वारा भाई का हक छीना जा रहा है.  कंस दृश्य नहीं है फिरभी अबोध शिशुओं की हत्याएं हो रही है. ऐसी ही तमाम आसुरी शक्तियां दृश्य न होने के बावजूद सारे आसुरी कार्य से समाज विकृत हो चुका है. इसका एकमात्र कारण दुर्बुद्धि रूपी आसुरी शक्तियों ने व्यक्ति, परिवार, समाज पर अपना अधिकार जमा रखा है. ऐसे में आवश्यता है अपने अंदर के रावण, दुर्योधन, कंस और दुश्चिन्तन रूपी आसुरी शक्तियों को दहन करने की. यदि हम ऐसा कर सके तभी दुर्गा पूजा और बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को दहन करने का दर्शन पूरा हो सकता है.

भूतपूर्व सैनिक अरविंद सिंह कहते हैं कि देश के अंदर फैली देश विरोधी शक्तियां भी रावणी सोचों से भरी पड़ी हैं. यह देश की आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक धमनियों को रोजाना चोट पहुंचा रही हैं. यह सोच देश को खोखला कर रही है. रोजाना अरबों रुपये का नुकसान होने के साथ मानवीय क्षति भी देश के लिए भारी है. अकेले कश्मीर में आतंकी गतिविधियों से करीब 45000 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा. इसने देश के ताने-बाने को बिगाड़ दिया. पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक समृद्ध जंगलों को नक्सली खोखला कर रहे हैं. देश को होने वाला नुकसान भी समाज की क्षति है. यही नहीं, समाज में दहेज, भ्रूण हत्या, बालिकाओं के प्रति हिकारत भरी सोच भी दानवी प्रवृत्ति का ही स्वरूप है. इसका सर्वनाश ही समाज का अंधेरा दूर कर विजयदशमी के दर्शन को पूरा कर सकता है.

 

 


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