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कुलपति ने छः महीने में बदल दी इविवि के हिंदी विभाग की सूरत

कुलपति ने छः महीने में बदल दी इविवि के हिंदी विभाग की सूरत
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
कहते हैं कि तस्वीरें खुद सच्चाई बयान कर देती हैं। जिन बातों के लिए कई पन्ने रंगने पड़ते हैं उनके लिए कुछ तस्वीरें ही काफी होती है।आज हम आपको इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की बदली सूरत की ऐसी ही तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
लंबे समय तक विवि के हिन्दी विभाग को सबसे उपेक्षित हिस्सों में गिना जाता रहा है लेकिन इन दिनों इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हिंदी विभाग अचानक नए कलेवर में दिख रहा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हिंदी विभाग कभी आचार्य धीरेंद्र वर्मा, रघुवंश, रामस्वरूप चतुर्वेदी, डॉ रामकुमार वर्मा और डॉ सत्यप्रकाश मिश्र जैसे बड़े साहित्यकारों का केंद्र हुआ करता था। विभाग में पिछले 15 सालों से रंग रोगन तक नहीं हुआ था। शिक्षकों के बैठने की मुकम्मल व्यवस्था तक नहीं थी। निराला और महादेवी के नगर में हिंदी विभाग जर्जर अवस्था में पहुंच गया था।

(नए कार्यों के बाद निखरा कुछ ऐसा निखरा विवि के हिन्दी विभाग।)

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हंगलू ने अक्टूबर से इस विभाग की सुध लेनी शुरू की और देखते देखते मात्र छः- सात महीने में ही हिंदी विभाग की पुरानी रंगत लौट आई। कुलपति ने समय समय पर व्यक्तिगत स्तर पर हिंदी विभाग के हर काम की जानकारी ली। उनके प्रयास से अब हिंदी विभाग जगमगा उठा है।
कुछ महीने पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हिंदी विभाग खस्ताहाल अवस्था में। पूरे विभाग में गंदगी का साम्राज्य था। आधारभूत संरचनाओं का घोर अभाव था। छात्र-छात्राओं के शौचालय की व्यवस्था तक नहीं थी, पर जब से हिंदी विभाग में 32 अध्यापकों की नियुक्ति हुई है यह सूरत पूरी तरह से बदल गई है। अब किसी को भी हैरानी होती है कि विभाग में कितना सकारात्मक बदलाव हुआ है।

(मरम्मत के पहले हिन्दी विभाग की कुछ ऐसी थी तस्वीरें )

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ चित्तरंजन कुमार का कहना है कि पिछले 20 सालों से हिंदी विभाग में किसी आधारभूत संरचना का विकास नहीं हुआ था। यहां तक कि कई शिक्षकों के बैठने के लिए मेज और कुर्सी तक नहीं थी। पिछले कुछ महीने में हिंदी विभाग में न सिर्फ रंग रोगन का काम हुआ बल्कि शिक्षकों के लिए बेहद उच्चस्तरीय कक्ष बनाए गए। इमारत के कई हिस्से का रंग रोगन भी किया गया और हिंदी विभाग को हर तरीके से उन्नत करने की कोशिश की गई।
हाल ही में 70 शोध छात्रों का नामांकन भी हिंदी विभाग में किया गया। जबकि पिछले 2 सालों से विभाग में एक भी शोध छात्र का नामांकन नहीं किया गया था। विभागाध्यक्ष प्रो चंदा देवी का कहना है कि ‘हिंदी विभाग में आधारभूत संरचना के साथ साथ शैक्षिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गोष्टियों और सेमिनार के लिए ऊपरी तल पर एक बड़ा सभागार निर्माणाधीन है, जो जून तक बन जाएगा।’

 

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