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अमेरिका की आशंका, ओबीओआर की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बना सकता है चीन

अमेरिका की आशंका, ओबीओआर की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बना सकता है चीन
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने भारत की टेंशन बढ़ाने वाली आशंका जताई है. पेंटागन को आशंका है कि चीन, पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बना सकता है. भारत का शातिर पड़ोसी मुल्क चीन केवल पाकिस्तान ही नहीं, कई अन्य मुल्कों में भी सैन्य अड्डा स्थापित करने की तैयारी में है. ये सैन्य अड्डे चीन की वन बेल्ट वन रोड (OBOR) परियोजना की रक्षा के लिए स्थापित किए जा सकते हैं.
चीन की शातिर चालों और लगातार सैन्य ताकत में बढ़ोत्तरी के साथ भारत को समुद्री व जमीनी क्षेत्रों से लगातार घेरने से केवल भारत ही चिंतित नहीं है. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की भी टेंशन बढ़ गई है.  दि न्यूज वेबसाइट के अनुसार अमेरिकी रक्षा विभाग ने गुरुवार को एक आधिकारिक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्केट में चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ वैश्विक बुनियादी ढाँचा कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई गई है.
पेंटागन ने कहा है कि ओबीओआर में अपने निवेश की सुरक्षा के लिए चीन ने पाकिस्तान सहित दुनिया भर में अधिक सैन्य ठिकाने स्थापित करने की अपेक्षा की है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास वर्तमान में केवल जिबूती में एक विदेशी सैन्य अड्डा है. अब वह ‘वन बेल्ट, वन रोड’ पहल (OBOR) जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए संभवतः पाकिस्तान सहित अन्य देशों में सैन्य अड्डा की योजना बना रहा है.
पेंटागन ने चीन पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि “चीन की वन बेल्ट, वन रोड´ परियोजनाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक विदेशी सैन्य अड्डों की आवश्यकता महसूस कर रहा है. इन सैन्य अड्डों के माध्यम से चीन विदेशों में ड्राइव भी कर सकता है.”
रिपोर्ट में कहा गया है, “चीन उन देशों में अतिरिक्त सैन्य ठिकाने स्थापित करने की कोशिश करेगा, जिनके साथ लंबे समय से दोस्ताना संबंध और समान रणनीतिक हित हैं जैसे कि पाकिस्तान.” लेकिन सैन्य ठिकाने के लिए लक्षित स्थानों में मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत शामिल हो सकते हैं.
क्या है ओबीओआर
“चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI), जिसे सार्वजनिक रूप से 2013 में जारी किया गया था और जिसे पहले” वन बेल्ट, वन रोड “नाम दिया गया था. इसका उद्देश्य परिवहन अवसंरचना, प्राकृतिक गैस पाइपलाइन, जल विद्युत परियोजनाओं के वित्त पोषण, निर्माण और चीन द्वारा आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों का विस्तार करना है. इंडो-पैसिफिक, अफ्रीका, मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका भर में प्रौद्योगिकी और औद्योगिक पार्क की स्थापना करना भी इसका उद्देश्य है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने व्यापारिक संपर्क को बढ़ाने के लिए BRI को एक तरीका मानता है.

 

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