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#यूपीपीसीएस: सफलता की वो कहानियां जो युवा पीढ़ी के लिए नजीर है

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

अमरीश मनीष शुक्ला

प्रयागराज । सफलता की ये कहानियां आज के युवाओं के प्रेरणादायक हैं, क्योंकि यह फिल्मी पर्दे पर रची गयी कोई काल्पनिक स्टोरी नहीं है, बल्कि जिंदगी की असल फिल्म का हिस्सा है। मेरा मानना है कि टापर जो भी हैं या जिन्होंने ने भी सफलता पायी है, वह एक दिन का परिणाम नहीं है। इसके लिये वह कड़ी तपस्या से गुजरे हैं, वैसे भी विद्यार्थी जीवन को सन्यासी के जीवन से ही कंपेयर किया जाता है। अगर आपको भी सफलता का रास्ता तय करना है तो लक्ष्य तो तय करना ही होगा। अगर मंजिल पानी है तो इस कठिन सफर पर चलना ही होगा। रास्ता कठिन है, दूर है, लेकिन सफलता के आगे यह बहुत छोटी सी बात है। आज आपकी मेहनत आपके कल के भविष्य को सुनहरा बनायेगी। बस जरूरत है एक बार खुद से कहने की – जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं।

लाठियां खाने के बाद पीसीएस बनी

ऐसी ही एक और प्रेरणादायक कहानी है इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की धाकड़ छात्र नेता रही रोशनी यादव की। छात्रों के लिये लाठियां खाने वाली और छात्र मुद्दों के साथ जझारू नेता के तौर पर उभरी रोशनी ने 2013 में समाजवादी छात्रसंघ के पैनल से अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, पर चुनाव हार गयी। राजनीति में बड़े ख्वाब देखने वाली रोशनी को एहसास हुआ कि उनका रास्ता कहीं और है। फिर क्या था राजनीति से मोह भंग हुआ तो बीटीसी करके टीचर बन गयी । पर बड़े सपने देखना उन्होंने नहीं छोड़ा और सिविल की तैयारी के साथ परीक्षा में हिस्सा लेती रही। 2016 के पीसीएम एग्जाम में रोशनी भी एसडीएम बन गई हैं।

पुलिस कॉस्टेबल को सलाम

तीन साल बाद जारी हुये यूपी पीसीएस 2016 के रिजल्ट ने सफलता की कई ऐसी कहानियां सामने लायी हैं, जो युवा पीढ़ी के लिए नजीर हैं। युवा जिनसे प्रेरणा लेकर अपने संपनों को पंख दे सकते हैं। इस बार का रिजल्ट जब आया तो दुनिया ने देखा कि कैसे एक पुलिस कांस्टेबल ने अपने अथक परिश्रम से डिफ्टी कलेक्टर की पोस्ट हासिल की तो लोगों ने यह भी देखा कि शादी के बाद अपने सपने पूरे करने उतरी लड़की यूपी पीसीएस की टॉपर बन गयी।
इस बार के रिजल्ट ने पहले से सरकारी नौकरी कर रहे युवाओं का कद भी बढ़ाया तो वर्षों से घर बार छोड़कर आये युवा को अफसर बनाकर भेजा। मुझे इन सफलताओं से जुड़ी हुई एक फिल्म हमेशा से पसंद रही है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म मांझी दा माउंटेन मैन। इस फिल्म में एक इंसान के बुलंद इरादों की बानगी है, जो एक पूरे पहाड़ को काट कर रास्ता बना देता है और इसमें उसकी पूरी उम्र ही गुजर जाती है। लेकिन वह एक बात पर अड़ा था कि ‘जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं’।
वैसे इस बार पीसीएस परीक्षा में इतिहास बनाने वालों में एक कहानी है उत्तर प्रदेश पुलिस के एक साधारण से कांस्टेबल श्याम बाबू की। जिन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत तो पुलिस डिपार्टमेंट में बतौर कांस्टेबल शुरू की, लेकिन वह यहां रुके नहीं, बल्कि अब वह जिन अफसरों को सलामी दिया करते थे, वह खुद श्यामबाबू को सलामी दे रहे हैं। बलिया के छोटे से गांव इब्राहिमाबाद के रहने वाले श्यामबाबू आर्थिक तौर पर बेहद कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं, इस समय उनकी उम्र 33 को पार कर गयी है। ढंग से शिक्षा भी न पिल पाने का मलाल छोड़कर श्याम बाबू ने स्वाध्याय से पुलिस में सिपाही की नौकरी पाई । फिर शुरू की पीसीएस बनने की तैयारी। लेकिन, एक समय ऐसा आया कि पुलिस डिपार्टमेंट में विभागीय परीक्षा पास कर वह दारोगा बनने की दहलीज पर थे।
लखनऊ में फिजिकल चल रहा था, 20 राउंड की दौड़ खत्म हो चुकी थी और 4 राउंड लगाकर श्याम बाबू दारोगा के लिये क्वालीफाई कर जाते। श्याम बाबू बताते हैं कि अचानक से उनके दिमाग को एक झटका लगा कि अगर आज उन्होंने यह दौड़ पूरी की तो वह फिर कभी पीसीएस नहीं बन पायेंगे, क्योंकि दारोगा बनने के बाद उन्हें पढाई के लिए समय नहीं मिलेगा। फिर क्या था श्याम बाबू ने वहीं कदम रोक लिये और वापस लौट आये। अफसर भी श्याामबाबू के इस एक्शन पर हतप्रभ थे, लेकिन किसे पता था कि श्याम बाबू कुछ बड़ी छलांग लगाने के लिए दो कदम पीछे हट रहे हैं। श्याम बाबू ने कई प्रयास किये पर वह सफल नहीं रहे, पर हार नहीं मानी और अब वह 2016 पीसीएस परीक्षा में एसडीएम का पद हासिल कर पूरे पुलिस डिपार्टमेंट के साथ युवाओं के लिये प्रेरणा बनकर उभरे हैं।

पति-पत्नी दोनों बने पीसीएस

बात करें इस बार पीसीएस टॉपर जयजीत कौर की तो उनकी कहानी और भी दिलचस्प है। बचपन की लव स्टोरी ने उन्हें कैसे पीसीएस बना दिया, यह आज के आशिक दिवानों को सही रास्ता दिखाता है। दरअसल कानपुर की रहने वाली जयजीत अपने बचपन के एक दोस्त से स्कूल शिक्षा के दौरान ही दूर हो गई। लेकिन कुछ सालों बाद दोनों की मुलाकात लखनऊ में हुई और उनकी दोस्ती की गाड़ी फिर चल पड़ी। दोनों ने फिर से एक साथ एमबीए की पढाई की और दोस्ती प्यार में बदली तो शादी भी कर ली। लेकिन, घरवालों की इच्छा के साथ रोशनी अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। पत्नी की दृढ़ इच्छा देख पति ने अपने साथ जयजीत को भी दिल्ली सिफ्ट कर लिया और एक साथ तैयारी शुरू की। मजेदार बात यह है कि इस परीक्षा में पति पत्नी दोनों का सेलेक्शन हुआ है, जिसमें जयजीत ने तो पीसीएस परीक्षा ही टाप कर ली है। सबसे खास बात यह है कि 2015 में जयजीत ने तैयारी शुरू की थी और 2016 की परीक्षा की टापर बनी हैं। फिलहाल मुझे तो एक और सफलता की कहानी खासी अच्छी लगी । इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के सर पीसी बनर्जी हास्टल में रहकर तैयारी कर रहे अमित सिंह चंदौली से कई साल पहले प्रयागराज चले आये थे। लेकिन, दो दिन पहले जब वह घर लौटे तो वह डीएसपी बन चुके थे। जब उनके गांव वालों को जानकारी हुई कि अमित घर आ रहे हैं तो उनके स्वागत को पूरा गांव ही उमड़ पड़ा।

 

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