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यूपीपीसीएस परीक्षा: जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं

यूपीपीसीएस परीक्षा: जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

अमरीश मनीष शुक्ला

प्रयागराज । सफलता की ये कहानियां आज के युवाओं के प्रेरणादायक हैं, क्योंकि यह फिल्मी पर्दे पर रची गयी कोई काल्पनिक स्टोरी नहीं है, बल्कि जिंदगी की असल फिल्म का हिस्सा है। मेरा मानना है कि टापर जो भी हैं या जिन्होंने ने भी सफलता पायी है, वह एक दिन का परिणाम नहीं है। इसके लिये वह कड़ी तपस्या से गुजरे हैं, वैसे भी विद्यार्थी जीवन को सन्यासी के जीवन से ही कंपेयर किया जाता है। अगर आपको भी सफलता का रास्ता तय करना है तो लक्ष्य तो तय करना ही होगा। अगर मंजिल पानी है तो इस कठिन सफर पर चलना ही होगा। रास्ता कठिन है, दूर है, लेकिन सफलता के आगे यह बहुत छोटी सी बात है। आज आपकी मेहनत आपके कल के भविष्य को सुनहरा बनायेगी। बस जरूरत है एक बार खुद से कहने की – जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं।
पिछले कुछ सालों से विवादों में घिरे उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने लगभग 3 साल बाद पीसीएस भर्ती 2016 का रिजल्ट जारी किया है। इस भर्ती ने लंबे समय बाद युवा सपनों को पंख लगाये हैं। सैकड़ों युवाओं के सपनों को आयम मिल गये, तो कुछ के मौके खत्म हो गये हैं। पर अभी भी उम्मीदें बाकी हैं और लाखों होनहारों की आंखों में सफलता के सपने पलने लगे हैं। वैसे भी युवाओं में सरकारी नौकरी के प्रति क्रेज और उसमें भी सिविल सेवाओं का ग्लैमर हमेशा से आकर्षण का केन्द्र रहा है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाला हर युवा सिविल सर्विस में अपनी किस्मत अजमाने के लिए जरूर मेहनत करता है।
वर्षो की कड़ी तपस्या के फलस्वरूप इन्हें सफलता भी मिलती है, कुछ चूक भी जाते हैं, लेकिन यह एक कारवां है, जो रुकता है, न झुकता है, बस बढ़ता ही चला जा रहा है। देश के विकास में प्रशासनिक अधिकारियों का बहुत महत्व होता है, ऐसे में युवाओं का कम उम्र में अफसर बनकर आना देश और समाज दोनों के लिये फायदेमंद हैं। छोटी उम्र के अफसरों को देखकर युवा इस फील्ड में जाने को लालायित होते हैं और इस जॉब के ग्लैमर को देखकर रोमांचित भी होते हैं। लेकिन, एक सिविल सर्वेंट बनने के लिये आपको कड़ी और असाध्य साधना से गुजरना पड़ता है। अपना सबकुछ छोड़कर विद्या की देवी की तपस्या करने वाले युवाओं को सालों किसी साधु की तरह आप तप करते देख सकते हैं। जो अपना घर बार छोड़कर प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर और दिल्ली जैसे शहरों में किराये पर कमरा लेकर अपनी जिंदगी का नया अध्याय खुद लिखते हैं।

 

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