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#TransformingIndia : 2014 की तुलना में 2022 में बायो फ्यूल ब्लेंडिंग में आई तेजी

#TransformingIndia : 2014 की तुलना में 2022 में बायो फ्यूल ब्लेंडिंग में आई तेजी

जैव ईधन भविष्य में ऊर्जा का सबसे आशाजनक विकल्प है और भारत की ऊर्जा नीति का प्रमुख अंग भी है। जैव ईंधन यानि बायो फ्यूल जिसके लाभों के बारे में पीएम मोदी तक बता चुके हैं कि जैव ईंधन एक स्वच्छ ईंधन मात्र नहीं है, बल्कि यह ईंधन में आत्मनिर्भरता के इंजन को, देश के विकास के इंजन को और गांव के विकास के इंजन को गति देने का भी एक माध्यम है।

पीएम मोदी के विजन पर हो रहा काम

इस लिहाज से केंद्र सरकार ने पीएम मोदी के विजन के अनुसार बीते कुछ साल में जैव ईंधन को बढ़ावा देने का कार्य किया जिसका सकारात्मक परिणाम आज हम सभी के सामने है। वाकयी आज जैव ईंधन (बायोफ्यूल) ईंधन में आत्मनिर्भरता, देश के विकास और गांवों के विकास का इंजन साबित हो रहा है।

पूरी दुनिया में ऊर्जा की खपत तेज, विकल्प बनेगा बायो फ्यूल

वर्तमान में केंद्र सरकार इस बात को भली-भांति समझती है कि पूरी दुनिया में ऊर्जा की खपत तेजी से हो रही है। कहीं यह स्रोत खत्म न हो जाए उसके खत्म होने से पहले-पहले हमें ईंधन की व्यवस्था करनी होगी, ताकि हमारा जीवन सुचारू रुप से चल सके। उसके लिए सबसे बेहतर उपाय जैव ईंधन की अधिक से अधिक आपूर्ति है। यही कारण है कि केंद्र सरकार जैव ईधन को भविष्य में ऊर्जा का सबसे आशाजनक विकल्प मानते हुए तेजी से कार्य रही है।

हरित आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम

ज्ञात हो जैव ईंधन एक ऐसी ऊर्जा है जिसे हम घर और खेत के कचरे से, पौधों से, खराब सड़े हुए अनाज से प्राप्त कर सकते हैं। भारत इस क्रम में बीते 6-7 साल में करीब 10% ब्लेंडिंग के लक्ष्य के तक पहुंच चुका है। अब आगामी 4-5 साल में भारत 20% ब्लेंडिंग के लक्ष्य को हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। कहा जा सकता है कि भारत के कदम लगातार हरित आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।

बायो फ्यूल ब्लेंडिंग से विदेशी मुद्रा में 30,000 करोड़ की बचत

इससे न सिर्फ पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे, बल्कि बायो फ्यूल ब्लेंडिंग के माध्यम से भारत ने विदेशी मुद्रा में 30,000 करोड़ की बचत भी की है। जी हां, भारत ने वर्ष 2014 में 1.4% के अपेक्षाकृत 2022 में 10 फीसदी का बायोफ्यूल ब्लेंडिंग लक्ष्य हासिल किया गया।

पर्यावरण प्रदूषण में आई कमी

देश को इसका एक फायदा यह भी मिला है कि इससे पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आई है। दरअसल किसान पहले खेत में पराली जला दिया करते थे जिसके कारण पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा था और प्रदूषण भी फैलता था, लेकिन अब देश में पराली जलाए जाने पर रोक के साथ ही किसानों को उसका इस्तेमाल कमाई में करना सिखाया जा रहा है। केंद्र सरकार के प्रयासों से किसानों को विभिन्न पहलों और अभियानों के जरिए समझाया जा रहा है कि वे कचरे से, पौधों से, खराब सड़े हुए अनाज व पराली से जैव ईंधर प्राप्त कर सकते हैं। इसके जरिए वे अच्छी कमाई कर सकते हैं।

वहीं वाहनों में जैव ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारत में परिवहन क्षेत्र में तेजी से बदलाव आ रहा है। इससे भी प्रदूषण के स्तर में खासी कमी देखने को मिल रही है। प्रति वर्ष लगभग 10 लाख टन कार्बन-डाय-ऑक्साइड की बचत करते हुए भारत प्रति रिफाइनरी में 40-50 मिलियन लीटर इथेनॉल का उत्पादन कर सकता है। यह भारत में हर साल 850,000 कारों को सड़क से हटाए जाने के बराबर है। दरअसल परिवहन क्षेत्र को एक प्रमुख प्रदूषणकारी क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है।

पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में जैव ईंधन अधिक परिणामकारी

पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में जैव ईंधन अधिक परिणामकारी भी साबित हो रही है। भारतीय वैज्ञानिक लगातार जैव ईंधन के उपयोग के एक नए मॉडल को विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं। देश के बड़े-बड़े संस्थान जैसे आईआईटी इत्यादि भी इस मुहिम में जुड़कर कार्य कर रहे है और गांव में जैव ईंधन तैयार करने के विकल्प किसानों को उपलब्ध करा रहे हैं।

गौरतलब हो, सभ्यता की शुरुआत के बाद से, मनुष्य जैविक सामग्री पर निर्भर है । खाना पकाने और गर्मी के लिए एशिया और अफ्रीका के कई विकासशील देश अभी भी “बायोमास” का उपयोग करते हैं । ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने में जैव ईंधन देश की उम्मीद की किरण है। जैव ईंधन पर्यावरण के अनुकूल ईंधन हैं और उनका उपयोग कार्बन उत्सर्जन को रोकने के बारे में वैश्विक चिंताओं को संबोधित करेगा।

इसलिए जैव ईंधन का उपयोग वायु प्रदूषण को रोकने के लिए ऑटोमोटिव वाहन उत्सर्जन मानकों को ध्यान में रखते हुए मजबूर हो गया है। विश्व स्तर पर, तरल जैव ईंधन को तीन मुख्य उत्पादन स्रोतों में वर्गीकृत किया जा सकता है; संयुक्त राज्य अमेरिका से मक्का इथेनॉल, ब्राजील से गन्ना एथेनॉल और यूरोपीय संघ से बायोडीजल रेपसीड किया गया। इसी क्रम में अब भारत भी अग्रसर है।

भारत में जैव ईंधन से होने वाली कमाई के रूप में अच्छा उदाहरण उत्तर प्रदेश का लिया जा सकता है, जहां साल 2020 में 7 हजार करोड़ रुपए मूल्य का इथेनॉल खरीदा गया है। यानि विक्रेता को इससे अच्छी खासी कमाई हुई है। इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

यूपी में इथेनॉल से हुई जबरदस्त कमाई का ही परिणाम है कि वहां इथेनॉल और जैव ईंधन से जुड़ी कई इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के 70 जिलों में गन्ने के अवशेष से कम्प्रेस्ड बायोगैस बनाने के लिए सीबीजी प्लांट की इकाई स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। वहीं ‘पराली’ से जैव ईंधन बनाने के लिए भी प्लांट लगाए जा रहे हैं।

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