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ट्रेन-18 यानी वंदे भारत की `छोटी बहन` बनाने में जुटा रेलवे

ट्रेन-18 यानी वंदे भारत की `छोटी बहन` बनाने में जुटा रेलवे
न्यूज डेस्क, नेशनल व्हील्स

रणविजय सिंह

बहुप्रचारित स्वदेशी सेमी हाईस्पीड रेलगाड़ी ट्रेन-18 यानी वंदे भारत को मिली देशव्यापी वाहवाही ने रेलवे के जोश को बढ़ा दिया है. रेलवे मंत्रालय ने इंटरसिटी ट्रेनों के रूप में तीव्र गति की आवाजाही की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मेनलाइन बिजली बहुयूनिट (एमईएमयू) बनाने में जुट गया है. ईएमयू में नई कर्षण यूनिट और सुविधाओं का विकास कर इसे बनाया जा रहा है. इन ट्रेनों के लिए अंडरस्लंग एमईएमयू का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है. इस ट्रेन को तैयार करने के लिए 26 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. सुविधाओं और तकनीक के लिहाज से इसे ट्रेन-18 की `छोटी बहन` कहा जा रहा है.
130 किमी होगी गति
चेन्नई स्थित सवारी डिब्बा कारखाना ने देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन-18 तैयार किया है. यह ट्रेन 17 फरवरी से नई दिल्ली से कानपुर-इलाहाबाद होते हुए वाराणसी के बीच संचालित की जा रही है. इस ट्रेन को वर्तमान में 130 किमी प्रति घंटे की गति से संचालित किया जा रहा है. हालांकि, इसकी क्षमता 180 किमी प्रति घंटे के संचालन की है. ट्रेन-18 में अंडरस्लंग प्रोपल्शन समेत कई विशेषताएं हैं.
इस अंडरस्लंग प्रोपल्शन के कारण यात्रियों के लिए कोचों में अधिक स्थान बनाया जा सका है. इसकी खूबियों को देखते हुए सवारी डिब्बा कारखाना ने मास ट्रांजिट सिस्टम जैसे बिजली बहुयूनिट (ईएमयू) और मेनलाइन बिजली बहुयूनिट (एमईएमयू) आदि में भी अंडरस्लंग प्रोपल्शन प्रौद्योगिकी अपनाने का फैसला किया है. इसके प्रयोग के लिए सवारी डिब्बा कारखाना ने अंडरस्लंग इलेक्ट्रिक्स युक्त पहली मेनलाइन बिजली बहुयूनिट (एमईएमयू) तैयार किया है.

लगेंगे टी-18 के लंबे कोच
मेनलाइन बिजली बहुयूनिट (एमईएमयू) में भी ट्रेन-18 की तरह यात्री एक छोर से दूसरे छोर तक आ-जा सकत हैं. इन ट्रेनों की गति क्षमता 110 से 130 किमी प्रति घंटे है. अंडरस्लंग एमईएमयू भी ट्रेन-18 के कोचों की तरह लंबे हैं. ऑनबोर्ड एमईएमयू कोच की लंबाई 21.3 मीटर होती है. जबकि अंडरस्लंग इलेक्ट्रिक्स एमईएमयू की लंबाई 2.31 मीटर है. इस ट्रेन में भी टी-18 के ही कोचों का इस्तेमाल किया गया है.
2618 यात्री कर सकेंगे सफर
तत्काल ब्रेकिंग के लिए व्हील माउंटेड डिस्क ब्रेक और रीजेनरेशन ब्रेक हैं जो प्रभावकारी हैं. नई एमईएमयू में 2618 यात्री सफर कर सकते हैं जबकि परंपरागत एमईएमयू में 2402 यात्री ही सफर कर सकते हैं. इस तरह नौ फीसदी अधिक यात्री इसमें यात्रा कर सकेंगे. इस अंडरस्लंग एमईएमयू रैक में 2 ड्राइविंग मोटर कोच (डीएमसी) तथा 6 पैसेंजर कोच (टीसी-ट्राइलर कोच) होंगे. डीएमसी में 280 यात्री (84 बैठकर और 196 खड़े होकर) तथा टीसी-ट्राइलर कोच में 343 यात्री (96 बैठकर और 247 खड़े होकर) यात्रा कर सकते हैं.
ये होंगी खासियत
  • टी-18 की तरह आपातकालीन स्थिति में ड्राइवर से संपर्क के लिए टॉकबैक सिस्टम.
  • दो शहरों के बीच कम समय में यात्रा कराने के लिए 130 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ने में सक्षम.
  • जीपीएस आधारित सूचना/उद्घोषणा प्रणाली और डबल लीफ स्लाइडिंग डोर.
  • सीसीटीवी निगरानी प्रणाली और टी-18 की आधुनिक बोगी.
  • एक छोर से दूसरे छोर तक आने-जाने के लिए कोचों के बीच सील्ड गैंगवे.
  • फिसलन मुक्त स्टेनलेस स्टील फ्लोरिंग और स्लीक एल्यूमिनियम लगेज रैक.
  • पैसेंजर कोचों में दो शौचालय एवं ड्राइवर मोटर कोच में एक टाइलेट की सुविधा.
  • उन्नत श्रेणी की कुशन शीट और स्क्रू रहित आंतरिक पैनल, स्टेनलेस स्टील कोच बॉडी.
  • वातानुकूलित ड्राइवर कक्ष और एर्गोनामिक एफआरपी ड्राइवर डेस्क.
  • एयरोडाइनामिक आकार वाला स्टेनलेस स्टील ड्राइविंग एंड नोस.
  • रिजनेटिव ब्रेकिंग जिससे 35 फीसद तक की ऊर्जा की बचत.
  • 3 फेस इंडीजीनियस इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम (सभी अंडरस्लंग).
  • 25 किलोवॉट एसी ओवर हेड ट्रैक्शन से चालू.

 

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