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कैंसर और कोरोना दोनों का वाहक है तंबाकू- डा. सोनिया तिवारी

कैंसर और कोरोना दोनों का वाहक है तंबाकू- डा. सोनिया तिवारी

कमला नेहरू क्षेत्रीय कैंसर संस्थान प्रयागराज की कैंसर रोग विशेषज्ञ डाक्टर सोनिया तिवारी से वरिष्ठ पत्रकार बीरेंद्र सिंह व सौरभ सिंह सोमवंशी की बातचीत।

दुनिया में विश्व तंबाकू निषेध दिवस-2020 की थीम थी “युवाओं को इंडस्ट्री के हथकंडे से बचाना और उनको तंबाकू और निकोटीन के सेंवन से बचाना”। लोगों को तंबाकू से दूर रहने की नसीहत दी जाती हैं, क्योंकि तंबाकू बीमारियों की जड़ है. प्रतिवर्ष 80 लाख लोग तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर व अन्य बीमारियों से हर रोज दम तोड़ देते हैं। कमला नेहरू क्षेत्रीय कैंसर संस्थान प्रयागराज की डाक्टर सोनिया तिवारी ने बताया कि ‘दुनिया में कैंसर की रोकथाम के लिए तंबाकू सेवन पर रोक सबसे कारगर है उपाय है।
धूम्रपान से कैंसर रोग का खतरा बढ़ता है साथ ही तंबाकू का धुआं रहित रूप भी समान रूप से हानिकारक है। डॉक्टर तिवारी ने बताया कि वर्तमान में फैली हुई खतरनाक भयंकर महामारी कोविड 19 में भी तंबाकू का बहुत बड़ा योगदान है क्योंकि इससे फेफड़ों की क्षमता कमजोर हो जाती है और कोरोनावायरस अपना प्रभाव आसानी से डाल देता है, इसके अलावा तंबाकू का सेवन कर इधर- उधर थूकने वाले लोग भी इसके संक्रमण में सहायक होते हैं। न केवल सिर्फ कैंसर बल्कि अन्य रोगो के वाहक के रूप में भी तंबाकू कार्य करता है और इसका धुआं सर्वाधिक खतरनाक होता है क्योंकि उसमें पाये जाने वाले 700से अधिक रसायन कुल 5 घंटे तक हवा में जीवित रहते हैं जो 69 तरह के कैंसर का कारण बनते हैं। इस धुएं के प्रभाव में आने वाले छोटे बच्चे बुजुर्ग भी अस्थमा, निमोनिया, कान में संक्रमण, खांसी, जुकाम, श्वास संबंधी समस्या और ब्रोंकाइटिस जैसे रोग से प्रभावित होते हैं। इसके अलावा धुआं शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को अनियंत्रित कर देता है जो हृदयाघात का कारण बनता है।
उन्होंने बताया कि ‘ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण’ (जीएटीएस-दो) 2016-17 के अनुसार, भारत में धुआं रहित तंबाकू का सेवन धूम्रपान से कहीं अधिक है. वर्तमान में 42.4 फीसदी पुरुष, 14.2 फीसदी महिलाएं और सभी वयस्कों में 28.8 फीसदी धूम्रपान करते हैं या फिर धुआं रहित तम्बाकू का उपयोग करते हैं. आंकड़ों के मुताबिक इस समय 19 फीसदी पुरुष, 2 फीसदी महिलाएं और 10.7 फीसदी वयस्क धूम्रपान करते हैं, जबकि 29.6 फीसदी पुरुष, 12.8 फीसदी महिलाएं और 21.4 फीसदी वयस्क धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं. 19.9 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं जिनकी संख्या सिगरेट या बीड़ी का उपयोग करने वाले 10 करोड़ लोगों से कहीं अधिक हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 19 फीसदी पुरुष, 0.8 फीसदी महिलाएं और 10.2 फीसदी कुल वयस्क तम्बाकू धूम्रपान करते हैं, जबकि 38.7 फीसदी पुरुष, 16.8 फीसदी महिलाएं और 28.1 फीसदी कुल वयस्क वर्तमान में धुआं रहित तम्बाकू का उपयोग करते हैं.डा०सोनिया तिवारी ने बताया कि तम्बाकू का सेवन किसी भी रूप में शरीर के किसी भी हिस्से को हानिकारक प्रभाव से नहीं बचाता. यहां तक कि धुआं रहित तंबाकू प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में भी इसी तरह के दुष्प्रभाव का कारण बनता है. हमारे शरीर के अंगों को सीधे नुकसान पहुंचाने के अलावा, धुआं रहित तम्बाकू (गुटका, पान मसाला)का उपभोग करने से दिल के दौरे से मरने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है.उन्होंने बताया कि सभी कार्डियो वेस्कुलर (सीवी) रोगों में लगभग 10 फीसदी का कारण तम्बाकू का उपयोग है. भारत में सीवी रोग की बड़ी संख्या को देखते हुए, इसका दुष्प्रभाव बहुत अधिक है. उन्होंने कहा कि जब सरकारें स्वास्थ्य, देखभाल सुविधाओं की स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर बजट खर्च कर रही हैं, उन्हें रोकथाम की रणनीतियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जिनमें तम्बाकू उपयोग में कमी करना प्रमुख है।
तंबाकू और कैंसर
डा० सोनिया तिवारी के मुताबिक मुंह कैंसर के आरंभिक लक्षणों को मरीज नजरअंदाज करते हैं। तंबाकू का गुटखा मुँह में दबाकर रखने से कैंसर को खुला न्योता मिल जाता है। बावजूद इसके कि वे मुँह में हो रहे जख्मों की नियमित जाँचें कराएँ वे इसकी ओर ध्यान ही नहीं देते। जब मर्ज बढ़ जाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, उन्होंने कहा कि भारत में मुख कैंसर के मरीज पूरे विश्व में सबसे ज्यादा हैं। मुख कैंसर के करीब 90 प्रतिशत मरीज तंबाकू का सेवन करते हैं। अधिकतर लोग तंबाकूयुक्त गुटखा मुँह में या दाँतों व गाल के बीच में दबाकर रखते हैं। उन्हें यहीं पर कैंसर हो जाता है। तंबाकू के प्रयोग की अवधि व उसकी मात्रा के अनुपात में जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा, शराब का अत्यधिक सेवन भी मुख कैंसर का जोखिम बढ़ाती है। टूटे हुए दाँत का चुभता हिस्सा, खराब फिटिंग्स वाले दाँत भी बार-बार रगड़कर मुख कैंसर का कारण हो सकते हैं।

मुख कैंसर के लक्षण
डाक्टर सोनिया तिवारी के अनुसार मुख में छाला या गांठ जो लंबे समय से ठीक नहीं हो रही हो,ऐसा छाला जिसको हाथ लगाने पर खून आता हो,मुख में खुरदुरापन लगना, गाल पर सूजन या गांठ,मुँह खुलने में या खाना खाने में दर्द या परेशानी,जबड़े में सूजन या गांठ और मुख से बार-बार खून आना। कैंसर होने वाले लक्षण हो सकते हैं।डा० तिवारी के अनुसार मुख कैंसर को प्रारंभिक अवस्था में पकड़ने के लिए व उपरोक्त लक्षणों की जाँच के लिए, ‘ स्वमुख परीक्षण’ हर तंबाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति को तो अवश्य ही करना चाहिए।स्वपरीक्षण करने के लिए अपनी उँगलियों को एक-दूसरे से चिपकाकर जोड़ लें। अब मुँह खोलकर इसमें तीन उँगलियों को इस तरह घुसाने की कोशिश करें कि अंगूठे के पास की उँगली ऊपर वाले दाँतों को स्पर्श करे और नीचे दाँतों पर सबसे छोटी उँगली हो। अब देखें कि तीनों उँगलियाँ अंदर जा रही हैं या नहीं। इससे यह पता लगेगा कि आप अपना मुँह खोल पा रहे हैं अथवा मुश्किल आ रही है।
प्रश्न–तंबाकू की वजह से कौन से कौन से रोग होते है?
डाक्टर- तंबाकू की वज़ह से हर वर्ष 50 लाख लोगों की मृत्यु होती है फिर भी लोग लगातार इसके आदी बनते जा रहे हैं, इसके बहुत सारे दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं जैसे कि कैंसर इसमें भी फेफड़े का कैंसर, मुंह का कैंसर प्रमुख हैं,इसके अलावा हृदय रोग,दमा की बीमारी,मानसिक तनाव के रोग , गर्भवती महिलाओं में तमाम सारे विकार आ जाते है जैसे समय से पहले बच्चे का पैदा होना,कम वजन का बच्चा पैदा होना और साथ ही साथ अन्य विकारों का होना।
ये सब कुछ तंबाकू की वजह से संभव हो पाता है।
प्रश्न- किसी व्यक्ति को कैंसर का कोई लक्षण पता चलता है , तो उसे क्या करना चाहिए?
डाक्टर–यदि किसी व्यक्ति में कैंसर का कोई लक्षण पता चलता है जैसे खांसी में खून आना या अन्य लक्षण तो डाक्टर के पास अवश्य जाना चाहिए और उनके निर्देश के अनुसार एक बार जांच अवश्य करानी चाहिए क्योंकि कैंसर का पता बिना जांच के नहीं चल सकता है। और तभी उसका कोई इलाज भी हो सकता है।
प्रश्न- कैंसर के होने में तंबाकू का क्या योगदान है?
डाक्टर- कैंसर होने में तंबाकू का सबसे बड़ा योगदान होता है और तंबाकू में पाए जाने वाले निकोटीन नामक पदार्थ की बड़ी भूमिका होती है। निकोटीन एक रासायनिक पदार्थ है जो तंबाकू की लत को बढ़ा देता है।और कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है और जब धूम्रपान के रूप में तंबाकू का प्रयोग किया जाता है तब इससे निकलने वाला तार फेफड़ों में जम जाता है और निकोटीन ब्लड प्रेशर बढ़ाने में सहायक होता है। खून का प्रवाह करने वाली धमनियों को यह शून्य कर देता है।ये सब दिल की बीमारी में भी सहायक होते हैं।
प्रश्न -कैंसर के होने में शराब और तंबाकू में कौन अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
डाक्टर- कैंसर के रोग को बनाने में शराब और तंबाकू दोनों का बहुत बड़ा योगदान होता है और जो लोग दोनों का ही सेवन करते हैं उनके लिए स्थिति और खतरनाक होती है,
प्रश्न – तंबाकू किस तरह से शरीर को हानि पहुंचाता है?
डाक्टर–जब लोग तंबाकू से धूम्रपान करते हैं तो उनको फेफड़े का कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि धुआं मुंह के भीतर जाता है और फेफड़े में पहुंचकर नुकसान पहुंचाता है। इसके साथ ही साथ धूम्रपान करने वाले के साथ रहने वाले भी इसके शिकार हो सकते हैं उनको भी दिल की बीमारी गर्भवती महिलाओं को बीमारी, ब्रेन स्ट्रोक (ब्रेन के नसों की बीमारी) आदि की संभावना बढ़ जाती है।
प्रश्न – कैंसर के लक्षण क्या है? और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है?
डाक्टर–जहां तक कैंसर के लक्षण की बात है तो फेफड़ों के कैंसर में खांसी लंबे समय तक आना, वज़न में कमी, आवाज में बदलाव, खून मिला बलगम आना, सांस लेने में दिक्कत, बुखार, खाने पीने में तकलीफ होती है, सीने में दर्द में प्रमुख लक्षण है।
प्रश्न – तंबाकू से होने वाले कैंसर से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
डाक्टर- तंबाकू से होने वाले कैंसर से बचाव के लिए सर्वप्रथम तंबाकू निषेध करना है। क्योंकि 90फीसदी कैंसर के मामले इसी से फैलते हैं। तंबाकू की ही वजह से नींद अच्छी न आना, तनाव, पेट की बीमारी, अवसाद में जाना, मुंह कम खुलना ,मुंह में बदबू और दांतों में दाग पड़ना आदि है।
प्रश्न -स्मोकिंग से बचा कैसे जाय?
डाक्टर- नशा अथवा स्मोकिंग से बचने के लिए नशा मुक्ति केंद्र जाकर चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए, जहां पर च्यूइंगम के साथ दवायें भी दी जाती हैं इसके अलावा तली-भुनी चीजों से दूर रहना, हेल्थी डाइट लेना, व्यस्त रहना और फल और हरी सब्जियों का अधिक से अधिक उपयोग करना अधिक फायदेमंद रहता है। परिवार के साथ अधिक से अधिक समय बिताना और योग क्रिया के साथ-साथ प्राणायाम पर समय देना भी लोगों को नशे से दूर रखता है।
प्रश्न – बहुत सारे लोगों में यह भ्रांति है कि कैंसर ऑपरेशन के बाद बहुत तेजी से फैलता है यह कहां तक सही है?
डाक्टर– हां यह केवल भ्रांति है कि ऑपरेशन के बाद कैंसर बहुत तेजी से फैलता है जबकि ऐसा नहीं है यदि डॉक्टर ऑपरेशन के लिए कहते हैं तो डरने की आवश्यकता नहीं है।

 


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