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घाघरा में समा गई किसानों की हजारों एकड़ जमीन , हो सकती है अनाज की किल्लत

घाघरा में समा गई किसानों की हजारों एकड़ जमीन , हो सकती है अनाज की किल्लत
बलिया। जिले के दक्षिणी छोर पर गंगा, उत्तरी छोर पर घाघरा और पूर्वी छोर पर दोनों नदियां एक साथ मिल जाती हैं यानि तीनों तरफ से बलिया जनपद नदियों से घिरा हुआ है। ऐसे में घाघरा नदी के जलस्तर में अनवरत वृद्धि जारी है। बाढ़ खण्ड के मीटर गेज के अनुसार सुबह 8 बजे डीएसपी हेड पर 64.36 मापा गया जब कि शाम चार बजे खतरा बिंदु 64.560 है। आपको बता दें कि उच्चतम खतरा बिंदु 66.00 है। ऐसे में कटान से किसानों के सैकड़ों बीघा खेत रोज घाघरा नदी में विलीन हो रहे हैं।
बांसडीह क्षेत्र के 56 गाँवों की लगभग 85000 आबादी को सरयू नदी प्रभावित करती है । क्षेत्र के रिगवन छावनी, नवकागाँव, बिजलीपुर, कोटवा, मल्लाहि चक, चक्की दियर, टिकुलिया, सुल्तानपुर, पर्वतपुर, रेगहा, रघुबरनगर, रामपुर नम्बरी आदि गाँवों के किसानों की लगभग हजारों एकड़ खेत घाघरा में समाहित हो चुके हैं। जिसमें लगीं बाजरा, मक्का, गन्ना, धान आदि फसलें घाघरा के पानी से बर्बादी के कगार पर हैं।
सरयू ने तटवर्ती गांवों की उपजाऊ जमीन को हमेशा की तरह इस बार भी धीरे-धीरे काटकर अपने आगोश मे ले रही है। इसके चलते इलाके के लोग परेशान हैं। नदी का रौद्र रूप देखकर किसानों के माथे की चिंता की लकीरें फिर बढ़ गई है। विवशता तो ये है कि उन्हें अपनी जमीन को बचाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा। सुरसा की तरह आए दिन नदी कई बीघा उपजाऊ जमीन को अपने आगोश में ले रही है , जिससे दियारे के लोग भय में है।
सुल्तानपुर गांव निवासी महेश राम का कहना है कि सुल्तानपुर बन्धे से पूर्व में कटान तेज है। सुल्तानपुर के बाजारी टोला निवासी बिजय बहादुर यादव का कहना है कि अगर ऐसे ही कटान होता रहा तो हम लोग भुखमरी के शिकार हो जाएंगे।

 


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