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इस मुल्क में करते हैं अपने ही अपनों की सौदेबाजी, ऐसे होती है युवतियों की खुली तस्करी

इस मुल्क में करते हैं अपने ही अपनों की सौदेबाजी, ऐसे होती है युवतियों की खुली तस्करी
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
देश बिदेश में कहीं भी बरामद नेपाली युवतियों के वहां तक पहंुचने का मार्ग सिर्फ एक, नेपाल की खुली सीमा, नेपाली युवतियों की तस्करी के लिए सर्वाधिक बदनाम है सोनौली बार्डर

यशोदा श्रीवास्तव

महराजगंज। यूपी का गाजियाबाद हो या प्रधानमंत्री का ससंदीय क्षेत्र बनारस या कुछ माह पहले दुबई में बरामद नेपाली युवतियों का मामला हो, वहां तक पहुंचने का मार्ग सिर्फ एक है. भारत ही नहीं दुनिया के किसी भी देश में पंहुचाई जा रही नेपाली युवतियों का रास्ता है भारत-नेपाल की खुली सीमा. और इसमें सर्वाधिक बदनाम महाजगंज जिले का सोनौली बार्डर है, जहां कड़ी चौकसी के बीच नेपाली युवतियां दलालों के जरिए भारत में प्रवेश करने में कामयाब हो ही जाती हैं.
नेपाल से निकल कर भारत सीमा में प्रवेश करते ही उनकी नारकीय यात्रा शुरू हो जाती है. नेपाली युवतियों को बेहतर जिंदगी के सुनहरे ख्वाब दिखाकर दलाल चोरी छिपे भारत लाते हैं. यहां मुंबई और दिल्ली से लेकर दुबई तक के एजेंट उन्हें लपक लेते हैं. इसके बाद ही सौदेबाजी का दौर भी शुरू हो जाता है. लालच दिया जाता है कि मुंबई, दिल्ली, गुड़गांव, बंगलौर या दुबई जहां भी वे जाना चाहें, उन्हें नौकरी से अच्छे पैकेज पर काम दिया जाएगा.
काम क्या होता है?
देह व्यापार! इस नरक में घुसने के बाद बेहतर जिंदगी और अच्छे पैकेज का उनका सपना चूर चूर हो जाता है. कहना न होगा कि कइयों को यही जीवन इतना रास आता है कि वे इसके दलालों के दलाल बनकर नेपाल में शिकार तलाशने लगती हैं. ऐसी कई नेपाली युवतियां हैं जो दिल्ली या मुंबई से निकल कर स्वयं इस क्षेत्र में युवतियों की खरीद-फरोख्त में दलालों के मददगार की भूमिका निभा रही हैं.
नेपाल से युवतियों की तस्करी को रोकने के लिए नेपाल में कड़े कानून बने हैं. जैसे कोई युवती यदि अपनों के साथ भारत आती है तो इसके लिए उसे दस्तावेजी सबूत दिखाने पड़ेंगे. दस्ताबेजी सबूत के तौर पर उसे अपने गांव पालिका या नगर पालिका का यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वह अपने साथ के व्यक्ति की रिश्त में क्या लगती हैं बेटी, बहन, भतीजी आदि.
बताने की ज्ररूरत नहीं कि नेपाल की गरीबी का फायदा उठाते हुए मानव तस्कर युवतियों की तस्करी जैसे धंधे को आबाद किए हुए हैं. युवतियों की तस्करी में आम तौर अपने ही शामिल हैं. जैसे चाची, मौसी बुआ आदि. दलाल सीधे इनसे सौदा करते हैं और ऐसे ही रिश्तों के साथ नेपाल सीमा पार करते हैं. गांव पालिका या नगरपालिका इन रिश्तों के आधार पर प्रमाण पत्र जारी कर देते है. अब सीमा पर जांच पड़ताल में रिश्तों की प्रमाणिकता के बाद उन्हें बिना रोक टोक सीमा पार करने दिया जाता है.
सोनौली स्थित सरकारी बस स्टैंड या दलालों की लक्जरी गाड़ियों तक युवती की कथित बुआ या मौसी उसे सीआफ कर लौट जाती हैं. इसे कहते हैं युवतियों की सौदेबाजी जिसे अपने ही अपने के लिए करते हैं. नेपाल का यह धंधा नया नहीं है लेकिन इधर नेपाल में जागरूकता और समृद्धि के साथ जहां इस धंधे में कमी आनी चाहिए वहां इसमें इजाफा समझ से परे है.
हालाकि,  जानकारों का कहना है कि गत वर्ष आया भूकंप इसकी बड़ी वजह है. उस त्रासदी में हजारों बच्चे अनाथ हुए थे. अनाथ हो चुके इन बच्चों को अपने ही पालपोश कर बड़ा कर रहे हैं. अब वे दोहरे लाभ के चक्कर में दलालों के दिखाए गए सब्जबाग में फंस कर इनका सौदा कर दे रहे हैं. दोहरे लाभ का मतलब यह है कि एक तो इनकी सौदेबाजी से फौरन इन्हें मोटी रकम का लाभ मिल जा रहा है. दूसरा, यह कि भारत या दुबई या कहीं और वे कमाएंगे तो वह भी इन्हें ही मिलेगा. नेपाल में युवतियों की खरीद फरोख्त या तस्करी रोकने के लिए काम कर रही एक संस्था माइती का आरोप है कि भारत के विभिन्न होटलों और घरों में करीब पांच लाख नेपाली युवतियां कैद हैं जो नारकीय जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं.
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