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अमेरिकी सेनाओं से घिरने पर रो रहा था दुनिया का सबसे खूंखार आतंकी सरगना अबू-बकर-अल-#बगदादी, जानिए बगदादी की पूरी कहानी

अमेरिकी सेनाओं से घिरने पर रो रहा था दुनिया का सबसे खूंखार आतंकी सरगना अबू-बकर-अल-#बगदादी, जानिए बगदादी की पूरी कहानी
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
इस्लामिक स्टेट का नेता और दुनिया का सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन का प्रमुख अबू बकर अल बगदादी सीरिया में मारा जा चुका है. दुनियाभर में खौफ का पर्याय बन चुके बगदादी को ढेर किए जाने का ऐलान अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में किया. हालांकि, पिछले करीब 10 घंटों से उसके मारे जाने को लेकर अनधिकृत तौर पर जानकारियां सामने आ रही थीं.
रविवार की सुबह लगभग नौ बजे की गई (भारतीय समयानुसार शाम) ह्वाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ट्रंप ने बताया कि अमरीकी सेना ने सीरिया में एक ऑपरेशन में बग़दादी को मार गिराया है. ट्रंप से मिली जानकारी की मुताबिक इस ऑपरेशन में किसी अमरीकी सैनिक की मौत नहीं हुई है लेकिन बग़दादी के साथ कई आतंकी भी मारे गए हैं. कुछ को पकड़ा भी गया है.
ट्रंप ने ये भी कहा कि इस ऑपरेशन से अमरीकी सेना को ‘बहुत सी संवेदनशील जानकारियां और चीज़ें’ मिली हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए रूस, तुर्की और सीरिया का शुक्रिया भी अदा किया. ट्रंप ने कहा, ”अबू बकर अल बग़दादी की मौत हो चुकी है. वो इस्लामिक स्टेट का संस्थापक था. ये दुनिया का सबसे हिंसक और क्रूर संगठन है. अमरीका कई सालों से बग़दादी को खोज रहा था.” ट्रंप ने कहा, ”बग़दादी को ज़िंदा पकड़ना या मारना मेरी सरकार की सबसे पहली राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता थी. अमरीकी सेना के विशेष बलों ने उत्तर पश्चिम सीरिया में रात में एक बहादुर और ख़तरनाक अभियान किया और शानदार कामयाबी हासिल की.” गौरतलब है कि अमेरिकी सैनिकों ने ही पाकिस्तान में घुसकर अलकायदा सरगना ओसामा-बिन-लादेन को भी एक विशेष ऑपरेशन में ढेर कर दिया था.

‘लगातार रो और चीख रहा था बग़दादी’

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा, “मैं बग़दादी के मारे जाने की पुष्टि करता हूं.” ट्रंप ने संवाददाताओं को बताया, “शनिवार को स्पेशल फ़ोर्सेस के रेड के बाद बग़दादी ने अपने आत्मघाती जैकेट से ख़ुद को उड़ा लिया.” ट्रंप ने बताया कि बग़दादी के साथ उसके तीन बच्चे भी थे, जो मारे गए. आत्मघाती विस्फोट से बग़दादी का शरीर टुकड़ों में बिखर गया लेकिन डीएनए टेस्ट से उसकी पहचान की पुष्टि हो गई. ट्रंप ने कहा, “वो एक अपराधी था जिसने दूसरों के डराने की हर कोशिश की लेकिन अपनी ज़िंदगी के आख़िरी लम्हों में वो ख़ुद बेहद डरा और घबराया हुआ था. अमरीकी सेना ने उसका पीछा किया और मौत के मुंह तक पहुंचाया.”

‘सुरंग में गिरकर कुत्ते की मौत मरा’

ट्रंप ने बताया कि बग़दादी की मौत एक घातक सुरंग में गिरने के बाद हुई. ट्रंप ने कहा, “बग़दादी ‘कुत्ते की मौत’ मरा. अमरीकी कुत्तों ने बग़दादी को दौड़ाया और वो लगातार रो रहा था, चीख रहा था और चिल्ला रहा था.” ट्रंप ने कहा कि बग़दादी एक ऐसा कायर था जो मरना नहीं चाहता था. इससे पहले डोनल्ड ट्रंप ने रविवार को एक ट्वीट करके बताया था कि ‘कुछ बहुत बड़ा हुआ है.’ ट्रंप ने कहा, “वो एक बीमार और अनैतिक व्यक्ति था.
इमेज कॉपीरइटAFPः वो जगह जहां ऑपरेशन हुआ

ऑपरेशन के बारे में अब तक क्या पता है?

बग़दादी जहां मारा गया वो जगह सीरिया के इदलिब प्रांत से काफ़ी दूर है. माना जा रहा है कि बग़दादी सीरिया-इराक़ सीमा के पास छिपा हुआ था. इदलिब के कई हिस्से अब भी जिहादी आतंकियों के क़ब्ज़े में हैं. अमरीकी राष्ट्रपति ने बग़दादी की लोकेशन को ‘कंपाउंड’ कहा और बताया कि उस पर कुछ हफ़्तों से निगरानी रखी जा रही थी.
ट्रंप ने बताया कि इससे पहले भी रेड की योजना थी लेकिन उसके बार-बार जगह बदलने की वजह से उन्हें रद्द करना पड़ा था. बीबीसी के अनुसार बरीशा के एक निवासी (जहां पर कथित रूप से ऑपरेशन को अंजाम दिया गया) ने बताया कि शनिवार देर रात इलाके में हेलिकॉप्टरों के जरिए हमला हुआ. हेलिकॉप्टरों ने दो घरों पर हमला किया और हमले में एक घर पूरी तरह नष्ट हो गया. इसके बाद सैनिक ज़मीन पर सक्रिय हो गए.

पांच साल से अंडरग्राउंड था बग़दादी

बग़दादी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का मुखिया था और वो मारे जाने के डर से पिछले पांच वर्षों से अंडरग्राउंड था. अप्रैल में इस्लामिक स्टेट के मीडिया विंग अल-फ़ुरक़ान की ओर से एक वीडियो जारी किया गया था. अल-फ़ुरक़ान ने वीडियो के ज़रिए कहा था कि बग़दादी ज़िंदा है. जुलाई 2014 में मूसल की पवित्र मस्जिद से भाषण देने के बाद बग़दादी पहली बार दिखे था. फ़रवरी 2018 में कई अमरीकी अधिकारियों ने कहा था कि मई 2017 के एक हवाई हमले में बग़दादी ज़ख़्मी हो गया था. बग़दादी 2010 में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक़ (आईएसआई) का नेता बना था.

कौन था बग़दादी?
इब्राहिम अवाद इब्राहिम अल-बादरी को अबु बक्र अल-बग़दादी के नाम से जाना जाता था. बग़दादी का जन्म 1971 में इराक़ के समार्रा में निम्न-मध्य वर्गीय सुन्नी परिवार में हुआ था. यह परिवार अपनी धर्मनिष्ठता के लिए जाना जाता था. बग़दादी के परिवार का दावा है कि जिस क़बीले से पैग़ंबर मोहम्मद थे, उसी क़बीले से वो भी है. यह परिवार पैग़ंबर मोहम्मद का वंशज होने का दावा करता रहा है.
युवा अवस्था में ही बग़दादी कुरान की आयतों को कंठस्थ करने के लिए जाना जाता था. इसके साथ ही बग़दादी का इस्लामिक क़ानून से भी ख़ासा लगाव था. परिवार में बग़दादी की पहचान घोर इस्लामिक व्यक्ति की थी. बग़दादी अपने रिश्तेदारों को बहुत ही सतर्क नज़रों से देखता था कि इस्लामिक क़ानून का पालन हो रहा है या नहीं. बग़दादी ने यूनिवर्सिटी में भी मजहब की पढ़ाई की. 1996 में यूनिवर्सिटी ऑफ बग़दाद से इस्लामिक स्टडीज़ में बग़दादी ने ग्रैाजुएशन की पढ़ाई की.
इसके बाद 1999 से 2007 के बीच क़ुरान पर इराक़ की सद्दाम यूनिवर्सिटी फ़ॉर इस्लामिक स्टडीज़ से मास्टर्स और पीएचडी की पढ़ाई की. 2004 तक बग़दादी बग़दाद के पास तोबची में अपनी दो पत्नियों और छह बच्चों के साथ रहा. इसी दौरान वो स्थानीय मस्जिद में पड़ोस के बच्चों को क़ुरान की आयतें पढ़ाने लगा. बग़दादी फ़ुटबॉल क्लब का भी स्टार खिलाड़ी रहा. इसी दौरान बग़दादी के चाचा ने उसे मुस्लिम ब्रदरहुड जॉइन करने के लिए प्रेरित किया. बग़दादी तत्काल ही रूढ़िवादी और हिंसक इस्लामिक मूवमेंट की तरफ़ आकर्षित हो गया.

एक्टिविस्ट से बाग़ी

2003 में इराक़ पर अमरीका के हमले के कुछ ही महीने बाद बग़दादी ने विद्रोही गुट जैश अह्ल अल-सुन्नाह वा अल-जमाह के गठन में मदद की. फ़रवरी 2004 में अमरीकी बलों ने फलुजा में बग़दादी को गिरफ़्तार कर लिया और बक्का डिटेंशन कैंप में 10 महीने तक रखा. क़ैद के दौरान भी बग़दादी ने ख़ुद को मजहब पर ही केंद्रित रखा. वो क़ैदियों को इस्लाम की शिक्षा देता था.
साथ के क़ैदियों के अनुसार बग़दादी अन्तर्मुखी स्वभाव का था लेकिन प्रतिद्वंद्वियों की पूरी ख़बर रखता था. दिसंबर 2004 में क़ैद से बाहर होने के बाद बग़दादी ने उन सभी से गठजोड़ किया जिनसे वो संपर्क में था. बाहर निकलने के बाद बग़दादी ने इराक़ में अल-क़ायदा के प्रवक्ता से संपर्क किया.
अल-कायदा प्रवक्ता बग़दादी के इस्लामिक ज्ञान से प्रभावित हुआ. बताते हैं कि उसी प्रवक्ता ने बग़दादी को दमिश्क जाने के लिए राज़ी किया. बग़दादी को यहां अल-क़ायदा के प्रॉपेगैंडा को फैलाने की ज़िम्मेदारी मिली. अल-क़ायदा इन इराक़ को ख़त्म कर अबू अय्युब अल-मासरी ने इस्लामिक स्टेट इन इराक़ का गठन किया. इस समूह का अलक़ायदा से भी संबंध बना रहा.

आईएस का नया शासक

इस्लामिक विश्वसनीयता के कारण बग़दादी में आईएस के अलग-अलग धड़ों को एकजुट करने की क्षमता थी. इस्लामिक स्टेट से बग़दादी ने लोगों को जोड़ना शुरू किया. बग़दादी को शरीया समिति का पर्यवेक्षक बनाया गया. इसके साथ ही उसे शुरा काउंसिल के 11 सदस्यों में भी शामिल किया गया. बाद में बग़दादी को आइएस की समन्वय समिति में रखा गया जिसका काम इराक़ में कमांडरों के बीच संवाद कायम करना था. अप्रैल 2010 में आईएस के संस्थापक के मारे जाने के बाद शुरा काउंसिल ने बग़दादी को आइएस का प्रमुख बना दिया.

(स्रोतः बीबीसी हिन्दी सेवा)

 

 


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