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‘#प्रज्ञा’ की ‘ठकुराई’, मेनस्ट्रीम के ये राजनेता जादू-टोना, तंत्र-मंत्र व ज्योतिष विद्या का सहारा लेते हैं

‘#प्रज्ञा’ की ‘ठकुराई’, मेनस्ट्रीम के ये राजनेता जादू-टोना, तंत्र-मंत्र व ज्योतिष विद्या का सहारा लेते हैं
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

विजय शंकर पांडेय

मानव मन के ही दो आयाम हैं – बुद्धि और प्रज्ञा. बुद्धि अर्थात इंटलेक्ट और प्रज्ञा मतलब इंटेलिजेंस. बुद्धि अपने एलओसी पर आकर थथम जाती है, वहीं से प्रज्ञा का भूगोल आकार लेने लगता है. प्रज्ञा का एक अर्थ आत्मा की निकटता वाली बुद्धि भी होता है. आप माने या न माने भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर भारतीय राजनीति की ‘आत्मा’ के अब और ज्यादा करीब नजर आने लगी हैं. पहले बड़े बुजुर्ग कहा करते थे कि ‘करु अनीति, कहू नीति, इसे कहते हैं राजनीति.’ बुद्धि हमारे राजनेताओं को पाखंडी भी बनाती है. वे प्रज्ञा ठाकुर की तर्ज पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का रसास्वादन नहीं कर सकते. मगर सच्चाई चाह कर भी छुपा नहीं सकते. आप खबरों पर चौकस नजर रखते होंगे तो आपको पता होगा कि मेनस्ट्रीम के हमारे ज्यादातर राजनेता जादू-टोना, तंत्र-मंत्र व ज्योतिष विद्या का सहारा लेते हैं.

मां बगलामुखी के मंदिर के पास श्मसान साधना

प्रज्ञा ठाकुर जिस राज्य का प्रतिनिधित्व करती हैं, वहां के लिए तो यह आम बात है. मध्य प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ज्यादातर उम्मीदवारों ने उज्जैन के पास नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर में शत्रु विजय यज्ञ करवाया. ‘आज तक’ के पोर्टल पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक पंडितों की माने तो इस साल (2018) होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत के लिए करीब 150 से ज्यादा प्रत्याशी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर पहुंचे थे. मां बगलामुखी का मंदिर चारों तरफ से श्मशान घाट से घिरा हुआ है. पंडित ने बताया कि श्मशान साधना राजनीतिक कारणों से ही की जाती है. मां बगलामुखी के बारे में मान्यता है कि वह शत्रुनाशक हैं और अपने सच्चे भक्त पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है. यही वजह है कि राजनीति के बड़े-बड़े नाम यहां अक्सर आशीर्वाद लेने आते रहते हैं. चुनाव से पहले यहां शत्रु विजय यज्ञ करा चुके प्रत्याशियों की माने तो मां के आशीर्वाद से उन्हें जीत ज़रूर मिलेगी. डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में तो तांत्रिक रामलाल कश्यप ने छत्तीसगढ़ विधानसभा को ही बांध देने का भरोसा दिलाया था. उन्होंने डॉ. रमन सिंह को चौथी बार मुख्यमंत्री बनवाने के लिए अमरनाथ की यात्रा का भी वादा मीडिया से बातचीत में किया था.

बतौर सीएम अखिलेश नोएडा नहीं गए तो शिवराज नर्मदा नहीं ‘लांघे’

पिछले दिनों कर्नाटक में संकट गहराते ही वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री कुमार स्वामी के भाई एचडी रेवन्ना नंगे पांव चलना शुरू कर दिए थे. सदन में विश्वास मत पर बहस के दौरान एक्सपर्ट की सलाह के मुताबिक विधानसभा में वे हाथ में नींबू रखना भी नहीं भूले. आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी. बीजेपी सांसद शोभा करंदलजे भी येदियुरप्पा को सीएम बनाने के लिए कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती थीं . एक मंदिर की 10,001 सीढ़ियां चढ़ कर उन्होंने अनुष्ठान पूरा किया था. इसी तर्ज पर केसीआर ने जून 2014 में तेलंगाना के मुख्यमंत्री पद की शपथ दोपहर 12.57 बजे ली थी, जिसका मूलांक योग छह ही होता है. मुख्यमंत्री के रूप में कैबिनेट की वे सारी महत्वपूर्ण बैठकें, जिनमें बड़े निर्णय हुए, उनमें छह का संयोग बनाया गया. जिन गाड़ियों पर वह चलते हैं उनका नंबर भी छह होता है. छह सितंबर को कैबिनेट की बैठक के बाद विधानसभा भंग करके राज्य में तय समय से आठ महीने पहले चुनावों का इंतजाम कर दिया. यूपी के मुख्यमंत्रियों के लिए नोएडा जाना अपशकुन माना जाता है. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहते अखिलेश यादव कभी नोएडा नहीं गए. मध्य प्रदेश के सीएम रहते शिवराज सिंह चौहान ने कभी नर्मदा नदी को हवाई यात्रा के जरिए पार नहीं की. कारण, अमरकंटक जाने के लिए नर्मदा लांघने और उसके बाद सत्ता गंवाने वालों में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के अलावा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा, उमा भारती, सुंदरलाल पटवा, श्यामाचरण शुक्ल, केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत जैसे नाम शामिल हैं. शिवराज सिंह चौहान ने न तो खुद और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कभी नर्मदा लांघने दिया.

2004 के बाद से उमा भारती सड़क मार्ग से ही अमरकंटक जाती हैं

मध्य प्रदेश के सियासी हलके में एक आम धारणा है कि हवाई यात्रा के जरिए जिसने भी नर्मदा को लांघा है, उसे कुर्सी गंवानी पड़ी है. साल 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हेलीकॉप्टर से अमरकंटक गईं थीं, उसके बाद ही उनकी 1984 में हत्या हो गई थी. पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले अमरकंटक हेलीकॉप्टर से आए थे, नतीजा सभी को पता है. एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा बाबरी मस्जिद ध्वंस से पहले हेलीकॉप्टर से अमरकंटक पहुंचे, कुछ ही दिन बाद कुर्सी हाथ से निकल गई. एमपी में ही अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री रहते हेलीकॉप्टर से अमरकंटक गए थे, इसके बाद ही उन्हें कांग्रेस से विदा होने की नौबत आ गई. फायर ब्रांड उमा भारती एमपी की सीएम रहते 2004 में हेलीकॉप्टर से अमरकंटक गई थीं, उसके बाद उन्हें भी कुर्सी गंवानी पड़ी थी. इसके बाद से तो उमा हमेशा सड़क मार्ग से ही अमरकंटक जाती हैं. इन सबमें एक ही समानता है, जितने भी नेताओं का जिक्र किया गया है वे सभी हेलीकॉप्टर से ही अमरकंटक पहुंचे थे. इसलिए शिवराज सिंह चौहान ने तो जाते जाते अलग स्थान पर हेलीपेड बनवा दिया, जबकि तब तक जितने भी राजनेता अमरकंटक पहुंचे उनका उड़न खटोला यहां के लालपुर हेलीपेड पर लैंड करता था.

दिल्ली के लुटियन जोन की एक कोठी में तीन महीने चला महा अनुष्ठान

‘ओपिनियन पोस्ट’ में प्रकाशित एक आर्टिकल के मुताबिक पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली के लुटियन जोन की एक बड़ी सी कोठी में करीब तीन महीने से तंत्र-मंत्र का महा अनुष्ठान चल रहा था. यह कोठी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट के एक वरिष्ठतम सदस्य की थी. उन्हें किसी ने बताया था कि 2019 के चुनाव के बाद कुछ भी हो सकता है. कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है. मंत्री महोदय को 2014 में भी किसी तांत्रिक ने उनके प्रधानमंत्री बनने का योग बताया था. उस बार भी कई महीने तक तंत्र-मंत्र और पूजा-साधना का दौर चला था. लेकिन, इस बार भी नतीजा सिफर निकला. हालांकि गौरतलब यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार खत्म होते ही केदारनाथ पहुंच कर धुनी रमा दिए. प्रसंगवश मैं यहां जिक्र करना चाहूंगा कि ज्योतिष के 18 आदि गुरुओं में वशिष्ठ का नाम भी आता है. गुरु वशिष्ठ ने ही श्रीराम के राज्याभिषेक का मुहूर्त निकाला था, लेकिन उसी मुहूर्त में श्रीराम को वनवास हो गया था. हां, आप चाहे तो इसे यूं भी समझा जा सकता है कि यदि वह गणना सही निकल जाती तो श्रीराम एक सूर्यवंशी राजा से अधिक न माने जाते, उसी वनवास ने उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम, भगवान श्रीराम बना दिया.

पावर, सेक्स, हथियार, मनी, और पॉवर ब्रोकिंग का कॉकटेल

भारतीय राजनीति में चंद्रा स्वामी का भी कभी सितारा बुलंद रहा है. सूद पर पैसा चलाने वाले धर्मचंद जैन के बेटे चंद्रास्वामी ने पावर, सेक्स, हथियार, मनी, और पॉवर ब्रोकिंग को वो काकटेल बना लिया था, जिसमें वो फ़िक्सिंग के किंग बनकर उभर चुके थे. पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह ने अपनी पुस्तक ‘वॉकिंग विद लायंस’ में लिखा है, “1979-80 में मैं पेरिस में बीमार पड़ा था. चंद्रास्वामी उस वक्त फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के निजी फिज़िशयन के साथ मुझसे मिलने आए थे, ये देखकर ही मैं सकते में था कि उन्होंने मुझसे कहा कि वे सीधे यूगोस्लाविया से फ़्रांसीसी राष्ट्रपति से मिलने आए हैं. फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने लेने के लिए अपना निजी विमान भेजा था.” इसी पुस्तक में नटवर सिंह ने उस वाकये का भी ज़िक्र किया है जिसमें किस तरह से मार्गरेट थैचर के ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी, जो बाद में सच साबित हुई. ब्रिटिश प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि ब्रूनेई के सुल्तान, बहरीन के शासक, ज़ायर के राष्ट्राध्यक्ष भी चंद्रास्वामी के भक्त हो गए थे. बीबीसी में प्रकाशित इस रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी चंद्रास्वामी के बारे में बताते हैं, “वे बेहद विवादास्पद थे, लेकिन सभी पार्टियों में उनकी एक तरह से स्वीकार्यता थी. राम मंदिर निर्माण कराने के लिए वे जब मध्यस्थता कर रहे थे तो उनकी बात मुलायम सिंह भी सुन रहे थे, नरसिम्हा राव भी और भाजपा की ओर से भैरों सिंह शेखावत भी. राजनीति में ऐसे फ़िक्सर समय के साथ सामने आते रहते हैं.” राम मंदिर के निर्माण के लिए 1993 में चंद्रास्वामी ने अयोध्या में सोम यज्ञ का आयोजन किया था. इस आयोजन में शामिल होने के लिए दुनिया भर से हिंदू जुटे थे. लेकिन वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक और राम बहादुर राय की माने तो चंद्रास्वामी को ना तो तंत्र-मंत्र आता था और ना ही उन्हें ज्योतिष का कोई ज्ञान था.

जब राजीव गांधी की सही जन्म कुंडली बनवाने के लिए पंडित नेहरू ने लिखी चिट्ठी

पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और चंद्रशेखर तक के कभी न कभी करीबी रहे चंद्रा स्वामी. चंद्रास्वामी के तिलिस्म से प्रभावित लोगों में हथियारों के व्यापारी अदनान ख़शोगी भी थे. 1982 की मिस इंडिया रहीं पामेला बोर्डेस ने ‘डेली मेल’ को दिए इंटरव्यू में बताया था कि अदनान ख़शोगी और चंद्रास्वामी के लिए वो सेक्सुअल प्रेज़ेंट के तौर पर काम करती रहीं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव का तांत्रिक पगला बाबा से करीबी रिश्ता किसी से नहीं छिपा. बिहार के ही मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार का भी झप्पी बाबा से रिश्ता सभी जानते हैं. एक बार तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने संसद के रिसर्च विभाग को मजबूत करने का फैसला किया, इसी कोशिश के तहत पंडित जवाहर लाल नेहरू की एक चिट्ठी शोधकर्ताओं के हाथ लगी. द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त ये चिट्ठी पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपनी सबसे छोटी बहन कृष्णा हठीसिंह को लिखी थी. चिट्ठी का मकसद था अपने नाती राजीव गांधी की सही जन्मकुंडली बनवाना. इस चिट्ठी से कुछ ही वक्त पहले राजीव गांधी का जन्म हुआ था. पंडित नेहरू ने चिट्ठी में ये भी लिखा है कि उन्होंने इंदिरा गांधी से भी राजीव गांधी की उचित जन्मकुंडली बनवाने के लिए लिखा है.

 

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