कमजोर तबकों को 10 फीसदी आरक्षण पर स्टे से सुप्रीम कोर्ट का इनकार लेकिन होगी सुनवाई

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स       
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का ट्रंप कार्ड माना जा रहा अनारक्षित जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर तबके को 10 फीसदी आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने एक फरवरी से लागू होने जा रहे इस आरक्षण पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया है लेकिन केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले का परीक्षण करेंगे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट चार सप्ताह बाद यानी मार्च में सुनवाई करेगा.

जानकारों का मानना है कि मार्च के पहले सप्ताह में ही लोकसभा चुनाव की रणभेरी भी बज जाएगी. ऐसे में मार्च में होने वाली सुनवाई का असर चुनावों पर भी पड़ सकता है.
गौरतलब है कि मोदी सरकार ने 124वें संविधान संशोधन के जरिए सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का कानून बनाया है. उत्तर प्रदेश, गुजरात, असम, हिमाचल प्रदेश, झारखंड राज्यों ने भी इसे लागू करने का फैसला कर लिया है. भाजपा समर्थित सरकारें भी इसे देने पर तैयार हैं. हालांकि, राज्य सभा में बहस के दौरान लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी समेत सात सांसदों ने इस कानून का विरोध किया था. संसद के बाहर कई अन्य पार्टियां भी इसके राजनैतिक नफा-नुकसान को देखते हुए विरोध और समर्थन कर रही हैं.
दो दिन पहले ही रेलवे ने 2.30 लाख रिक्त पदों की भर्तियों में 10 फीसदी आरक्षण का ऐलान कर दिया है. इसमें 23 हजार पद 10 फीसदी आरक्षण यानी सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों से भरे जाएंगे. मानव संसाधन मंत्रालय ने भी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों में भी इसे लागू करने का फैसला किया है. यह माना जा रहा है कि आरक्षण के इस ऐलान के साथ ही भाजपा ने हिन्दी पट्टी में सवर्णों के विरोध को कम करने का काम किया है. साथ ही गुजरात जैसे राज्यों में पटेल समुदाय का गुस्सा खत्म करने का प्रयास किया है.

 

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