Nationalwheels

गरीब कल्याण योजना से पटरी पर लौटी श्रमिकों की जिंदगी

गरीब कल्याण योजना से पटरी पर लौटी श्रमिकों की जिंदगी
वैश्विक महामारी कोरोना ने हर किसी को तबाह कर दिया है, हर ओर भागम-भाग की हालत है। दैनिक मजदूरों की रोजी रोटी सब छीनी गई, श्रमिक सिर्फ बेरोजगार ही नहीं हुए, बल्कि काफी जलालत भी झेलनी पड़ी। अब अनलॉक-2 चल रहा है तो वैसे में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फिर से लॉकडाउन हो रहा है और लोग तेजी से अपने घर की ओर भाग रहे हैं। खास बात यह है कि घर लौट रहे इन श्रमिकों का कहना है कि सरकार ने जो गरीबों के कल्याण के लिए विशेष अभियान शुरू किया है उसकी वजह से अब दोबारा परदेस नहीं जाएंगे।
असम से लौटे अर्जुन राम, विनोद राम, सियाराम राम, राधा देवी और उर्मिला देवी ने बताया कि कोरोना ने हम लोगों की जिंदगी तबाह कर दी थी। लेकिन यहां सरकार के सहयोग से जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आयी है।
उन्होंने कहा, “तीन महीना असम में कैसे गुजरा यह नहीं बता सकते हैं, अब जब अपने गांव आ गए हैं तो दर्द क्या बताऊं। हम लोगों को कई दिनों तक रोटी नहीं मिला, चूल्हा जलाने पर आफत आ गई, चूरा खाकर और विभिन्न संगठनों द्वारा दिए जाने वाले एक समय भोजन के सहारे हम लोग किसी तरह जिंदगी गुजारते रहे। मालिकों ने काम बंद कर दिया, हम लोग किसी तरह रह रहे थे। लेकिन बिहार में जब कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़ी तो वहां के लोगों ने हम लोगों से दूरी बना ली। हमेशा साथ रहने वालों ने भी मुंह फेर लिया।
श्रमिकों ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने न केवल ट्रेन चलाई, बल्कि हम लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए गरीब कल्याण अभियान शुरू किया। यह रोजगार अभियान हम लोगों की जिंदगी बदलने वाला साबित हो सकता है। इसमें काम भले ही 125 दिन मिलेगा, लेकिन इस 125 दिन में ही ढ़ेर सारे फायदे होंगे, रोजगार के स्थाई उपाय हो सकते हैं।
असम के कोकराझार से लौटे महेश्वर महतों, सिंघेश्वर महतों, परमेश्वर महतों, शोभा महतों और ललन महतों की भी यही कहानी है। ये बताते हैं कि बिहार में जब काम नहीं मिला तो अपने हिम्मत और श्रम शक्ति के बदौलत आतंक प्रभावित कोकराझार की शरण ली। वहां पांच-छह वर्ष से कमा-खा रहे थे, परिवारों के दिन ठीक से गुजर रहे थे। ठेकेदार की मदद से वहां रहकर मजदूरी करते थे, वह बहुत ही मान सम्मान करता था, किसी चीज की कमी नहीं थी। लेकिन जब लॉकडाउन हुआ तो देखते ही देखते सब कुछ तबाह हो गया, रोजी-रोटी पर आफत आ गई, मान सम्मान तो दूर की बात है।
महेश्‍वर महतों बताते हैं कि जब रोटी पर आफत आई तो हम लोगों ने ठेकेदार से सहायता करने का अनुरोध किया, तो उसने भी अपना पल्ला झाड़ लिया और खुद के भरोसे रहने या पैदल ही गांव चले जाने को कहा। इतनी दूर से पैदल कैसे आते, किसी तरह 15-20 दिन गुजारे, इसके बाद बगल वहीं पर बिहार के रहने वाले किराना दुकानदार रामाधार इनका सहारा बने। उसने विश्वास किया और खाना के लिए जो सामान की आवश्यकता थी उधार देना शुरू कर दिया। 40-45 दिन तक उससे उधार लाकर खाते रहे, बकाया सात हजार से अधिक हो गया तो गांव फोन किया।
उन्‍होंने आगे कहा “मजबूरी में परिजनों ने गांव में महाजन से पांच रुपए प्रति सैकड़ा की दर से ब्याज पर पैसा लेकर भेजा, तब हम लोग जिंदा रहे। अनलॉक होने पर काम धंधा शुरू हो गया, लेकिन इसी बीच जानकारी मिली की प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत किया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया गया है, जो कि हम मजदूरों के लिए बड़ा सहारा बनेगा। अब अपने परिवार के साथ सुख पूर्वक दिन गुजारते हुए प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करेंगे।”

 


Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *