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कश्मीर में राजमार्ग पर प्रतिबंध का पहला दिन बवाल में गुजरा, सियासी पार्टियों का हंगामा

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
जम्मू-कश्मीर सरकार के उधमपुर और बारामूला के बीच राजमार्ग पर सैन्य कर्मियों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए नागरिक वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने का आदेश रविवार को लागू हो गया. जम्मू-कश्मीर की सभी लोकल सियासी पार्टियां इस फैसले के विरोध में सड़क पर उतर आई हैं. आधिकारिक आदेशों की अवहेलना करते हुए सड़कों पर उतर प्रतिबंध को रद्द करने का आह्वान किया है.
लोकसभा चुनावों के कारण राज्यपाल के इस आदेश का व्यापक पैमाने पर कश्मीरी राजनीतिक पार्टियां विरोध कर रही हैं. श्रीनगर के बाहरी इलाके पंथाचौक में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वह सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती देंगी. उन्होंने लोगों से नागरिक यातायात पर प्रतिबंध के आदेश का पालन न करने का आग्रह किया है. “अगर भारत सरकार को लगता है कि ऐसी चीजें करने से वे राज्य के लोगों का दमन कर सकते हैं, तो वे गलत हैं. हम इस आदेश की अवहेलना कर रहे हैं और अदालत में याचिका भी दायर कर रहे हैं. कश्मीर कश्मीरियों का है और उनके लिए अपनी खुद की सड़कों का उपयोग करने की अनुमति लेनी होगी, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी.”
उन्होंने विरोध के बाद ट्वीट किया कि गवर्नर के खिलाफ विरोध किया गया है. प्रशासन के सख्त और बेतुके प्रतिबंध को स्वीकार नहीं किया जाएगा. आप हमारे मुख्य राजमार्ग पर नागरिक आंदोलन को कैसे रोक सकते हैं? आप कश्मीरियों को सुलगाना चाहते हैं. राज्य की जनसांख्यिकी को बदलना चाहते हैं और उन्हें अपनी जमीन में कैद करना चाहते हैं? मेरे शव के ऊपर से गुजरना होगा.”
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी विरोध में सड़कों पर उतरकर आदेश को रद्द करने का आह्वान किया. उन्होंने यह जानने की मांग की कि क्या कश्मीर एक “उपनिवेश” था. उन्होंने कहा, “यह एक गलत आदेश है. उन्होंने कहा कि इसे वापस लेने की आवश्यकता है. यह एक तानाशाही आदेश की तरह लगता है. यदि सैनिकों को स्थानांतरित करने की आवश्यकता है तो उन्हें रात में ट्रेन या यात्रा का उपयोग करना चाहिए.”
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सजाद लोन ने ट्विटर पर कहा, “राजमार्ग प्रतिबंध अब मानवीय आपदा में बदल रहा है. राज्यभर से असहाय अवस्था में फंसे जीवित लोगों की दिनभर की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोगों को यात्रा करने की आवश्यकता होती है. राज्यपाल को अमानवीय आदेश को रद्द करने की तत्काल आवश्यकता है.”
गौरतलब है कि राज्यपाल सत्य पाल मलिक प्रशासन ने 3 अप्रैल को जारी आदेश में रविवार और बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग की 270 किलोमीटर की सीमा पर सभी नागरिक यातायात को रोककर राज्य के सर्दियों और गर्मियों की राजधानियों के बीच स्थानांतरित करने के लिए काफिले को आसान बनाने का प्रयास किया है.
इस आदेश में “संसदीय चुनाव और सुरक्षा बलों के काफिले पर किसी भी फिदायीन आतंकी हमले की आशंका” का हवाला दिया गया है. यह आदेश 31 मई तक सप्ताह के निर्दिष्ट दिनों में राजमार्ग पर नागरिक यातायात को प्रतिबंधित करने के लिए लागू रहेगा. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि वीवीआईपी प्रतिबंध के दायरे से बाहर हैं. नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को उत्तरी कश्मीर में उरी की यात्रा करने की अनुमति दी गई और मुफ्ती को बडगाम जिले के बीरवाह में लोकसभा चुनावों के लिए रविवार को प्रचार करने के लिए भी अनुमति दी गई है.
पार्टी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा, “क्या कहीं लिखा है कि  रविवार और बुधवार को ही खतरा है. मैं फिर यह गुज़ारिश करता हूँ कि इस फैसले को वापिस लिया जाए.”
बता दें कि जम्मू कश्मीर सरकार में पुलवामा और बनिहाल में सुरक्षाबलों पर हमले के बाद नया आदेश जारी किया गया. नए आदेश में कहा गया है कि हफ्ते में दो दिन रविवार और बुधवार को जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारामूला से उधमपुर तक केवल सुरक्षाबलों के काफि‍ले ही चलेंगे. आम यातायात को चलने की अनुमति नहीं होगी.
प्रशासन के मुताबिक इन दो दिनों में स्कूल बसों को चलने की अनुमति होगी. साथ ही परमिशन के बाद मेडिकल इमरजेंसी के चलते उन गाड़ियों को भी चलने दिया जाएगा. प्रशासन के मुताबिक बारामूला से उधमपुर तक हर क्रॉसिंग पर एक मजिस्ट्रेट लेवल का अधिकारी रहेगा जिनके फ़ोन नंबर सार्वजनिक किये गए हैं.

 

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