Ram Mandir, #Ayodhya भव्य #RamMandir के लिए चाहिए पूरे 100 एकड़ जमीन, अस्पताल और होटल भी होंगे प्रस्तावित

#Ayodhya भव्य #RamMandir के लिए चाहिए पूरे 100 एकड़ जमीन, अस्पताल और होटल भी होंगे प्रस्तावित

Ram Mandir, #Ayodhya भव्य #RamMandir के लिए चाहिए पूरे 100 एकड़ जमीन, अस्पताल और होटल भी होंगे प्रस्तावित
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारियों में जुटा है तो हिन्दू पक्ष जन्मभूमि पर सरकार की मदद से रामलला के भव्य मंदिर निर्माण को अंतिम रूप देने में लगा है. उम्मीद जताई जा रही है कि 2 अप्रैल 2020 को रामलला के जन्मदिन यानी रामनवमी पर मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा. अगले लोकसभा चुनाव के पहले हर हाल में दुनिया का भव्यतम मंदिर पूरी शान-ओ-शौकत के साथ खड़ा हो जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय भी राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन के कानूनी और व्यवहारिक पक्षों की पड़ताल में पूरी शिद्दत के साथ जुट गया है. अनुमान लगाया जा रहा है कि दिसंबर के पहले पखवाड़े में ही ट्रस्ट की रूपरेखा साफ हो जाएगी.
मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने अयोध्या ने 1991 में ही करीब 68 एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर लिया था. इसमें 2.77 एकड़ जमीन का विवाद सुप्रीम कोर्ट में था जो 9 नवंबर को श्रीराम जन्मभूमि न्यास को मिल चुका है. सूत्रों का कहना है कि भव्य राम मंदिर परियोजना के लिए करीब 100 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी. इसिलए मौके पर 33 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता होगी. हालांकि, इस जमीन के मिलने में होने वाले विलंब से मंदिर निर्माण पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. वजह, मंदिर निर्माण के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध है लेकिन पूरी परियोजना के लिए यह अनुपयुक्त बताई जा रही है. जमीन अधिग्रहण में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर जैसी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है. राम मंदिर को सीधे सरयू नदी से जोड़ा जा सकता है.
मुस्लिम पक्ष अधिग्रहीत जमीन में ही 5 एकड़ मांग रहा है लेकिन विहिप और अन्य हिन्दू पक्षों ने यह साफ कर दिया है कि यह संभव नहीं है. सरकार भी इस इरादे में नहीं दिखती. सरकारी सूत्रों का कहना है कि अधिग्रहीत परिसर में मस्जिद निर्माण के लिए जमीन देने से हमेशा के लिए झगड़ा बना रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने विवाद का समूल निराकरण कर दिया है. ऐसे में अब विवाद के लिए कोई भी गुंजाइस नही छोड़ी जाएगी. मुस्लिम पक्षकारों को राज्य सरकार अयोध्या की सीमा के अंदर ही 5 एकड़ जमीन अन्यत्र उपलब्ध कराएगी. जमीन उपलब्ध कराने में केंद्र सरकार कोई दखल भी नहीं देना चाहती है.
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार राम मंदिर निर्माण के लिए गठित होने वाला ट्रस्ट सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट जैसा रहेगा. हालांकि, सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट में सदस्यों की संख्या 6 है जबकि अयोध्या में सदस्यों की संख्या 15 के आसपास हो सकती है. यह पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निर्भर है. यह भी संभव है कि सरकार नया ट्रस्ट बनाने के बजाए पहले से मौजूद श्रीराम जन्मभूमि न्यास समिति को ही इसके लिए अधिकृत कर दे. नया ट्रस्ट केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन पंजीकृत किया जाएगा.

मंदिर में 250 स्तंभ, सबमें श्रीराम की 16 प्रतिमाएं

आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा ने कहा है कि मंदिर में करीब 250 स्तंभ होंगे. प्रत्येक स्तंभ में श्रीराम की 16 प्रतिमाएं होंगी. गर्भगृह में स्थापित होने वाली प्रतिमा करीब 7 फिट ऊंची होगी. हिन्दू शास्त्र के अनुसार जरूरत पड़ने पर मौजूदा डिजाइन में संशोधन से भी उन्होंने इनकार नहीं किया है.

40 फीसदी कार्य पूर्ण

विश्व हिन्दू परिषद की ओर से डिजाइन किए गए राम मंदिर के मुख्य आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा ने कहा कि वर्तमान में मंदिर निर्माण से जुड़ी 40 फीसदी तैयारी पूरी है. मंदिर परिसर के लिए जमीन की ज्यादा आवश्यकता होगी. परियोजना में मंदिर परिसर में भोजन के लिए एक हॉल, एक भोगशाला, पुजारियों के आवास, भक्तों को ठहराने के स्थान की व्यवस्था भी की जाएगी. सोमपुरा ने मंदिर टाउनशिप में अस्पताल और होटल की भी आवश्यकता बताई है. ताकि, यहां देशभर से ही हीं, दुनियाभर के लोग पहुंच सकें और कुछ वक्त गुजार सकें.

अयोध्या का मास्टर प्लान

केंद्र सरकार अयोध्या का नया मास्टर प्लान तैयार करा रही है. नई अयोध्या 388 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विकसित होगी. रिपोर्ट के अनुसार हनुमान गढ़ी को केंद्र मानकर अयोध्या को फिर से डिजाइन किया जाएगा. अयोध्या को स्मार्ट सिटी की सुविधाओं से भी सुसज्जित किया जाएगा. इसमें बाहरी रिंग रोड, पार्क, ट्रीटमेंट प्लांट, आधुनिक बस अड्डा, नव निर्माणाधीन विकसित रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं.


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