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नोटबंदी का असरः #IncomeTax ने पकड़े 87 हजार `टैक्स चोर`

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अब तक आपने 2जी, 3जी, कोयला या चारा जैसे तमाम घोलाटों के नाम सुने होंगे लेकिन इन दिनों एक नये किस्म का घोटाला सामने आने की आशंका बढ़ गई है. यह टैक्स घोटाले के रूप में माना जा रहा है. आयकर विभाग ने नोटबंदी के बाद संदिग्ध जमा के लिए 87 हजार लोगों के खिलाफ टैक्स चोरी की आशंका में कार्रवाई शुरू कर दी है. सीबीडीटी ने पांच मार्च को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी किया है. इसके तहत सीबीडीटी ने आयकर विभाग से चालू वित्त वर्ष के अंत तक और किसी भी स्थिति में 30 जून तक इन मामलों को निस्तारित करने को कहा है.

नोटिस के बाद भी नहीं दिया जवाब

एसओपी बताता है कि आयकर विभाग ने नोटबंदी के बाद तीन लाख ऐसे लोगों को सेक्शन 142(1) के तहत मूल्यांकन से पहले जांच के लिए नोटिस भेजा था. नोटिस के लिए ई-मेल, एसएमएस आदि का इस्तेमाल किया गया था. इसमें से अन्य लोगों ने नोटिस का जवाब दाखिल कर अलग-अलग मौकों पर विभागीय सुनवाई में आय को प्रमाणित किया या टैक्स और जुर्माना जमा कर मामलों को निस्तारित कराया. परंतु, 87 हजार ऐसे लोगों को नोटिस जारी हुई है जिन्होंने 2017-18 तक अपनी आय के संबंध में कोई जवाब विभाग को नहीं दिया.
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर विभाग के आकलन अधिकारियों (एओ) के लिए नीति फ्रेमवर्क जारी किया है. अब इन मामलों को अंतिम रूप से निस्तारित करने के लिए आईटी अधिनियम की धारा-144 के तहत निर्धारित ‘सर्वश्रेष्ठ निर्णय मूल्यांकन’ प्रक्रिया का उपयोग करने के लिए कहा है.

एओ को डेटा उपलब्ध कराएगा सीबीडीटी

अफसरों के अनुसार “यदि कोई भी व्यक्ति धारा 142 (1) के तहत जारी किए गए नोटिस की सभी शर्तों का पालन करने में विफल रहता है तो एओ सभी प्रासंगिक सामग्री को ध्यान में रखते हुए निर्धारिती को सुनवाई का अवसर देगा. सीबीडीटी ने अपनी ओर से एओ को आश्वासन दिया कि इसकी तकनीकी और डेटा माइनिंग आर्म उन्हें इन 87,000 व्यक्तियों और संस्थाओं के पते, बैंक खातों और लेनदेन के विवरण प्रदान करेगा, जिन्होंने “विमुद्रीकरण अवधि के दौरान पर्याप्त नकदी जमा” किया है. अधिकारियों ने कहा, इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो बड़ी मात्रा में संदिग्ध जमा से संबंधित हैं या उनके लेनदेन आयकर में दाखिल रिटर्न के इतिहास के अनुरूप नहीं हैं.

3.10 लाख बढ़े करदाता

8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी. इसके तहत उच्च मूल्य वाले 500 और 1000 रुपये को चलन से बाहर कर दिया गया था. इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने खातों में 500 और 1000 रुपये जमा कराए थे. इसका असर इस रूप में भी देखा गया कि नोटबंदी के पहले करीब तीन लाख रिटर्न प्रत्येक वर्ष दाखिल किए जा रहे थे. नोटबंदी के बाद रिटर्न दाखिल करने वालों संख्या बढ़ाकर 6.10 लाख तक पहुंच गई यानी नोटबंदी के पहले 3.10 लाख लोग टैक्स चोरी में शामिल थे. ऐसे लोगों के पास एकत्रित नगदी को भी कालेधन के रूप में ही पहचाना गया है.

संदिग्ध लेनदेन की होगी तलाश

सीबीडीटी के निर्देश में कहा गया है कि एओ को इन संस्थाओं/व्यक्तियों के मूल्यांकन का निर्धारण करते हुए “विमुद्रीकरण से संबंधित लेन-देन की प्रकृति के बारे में यदि उपलब्ध हो तो पिछले आयकर रिटर्न का विस्तृत विश्लेषण करना चाहिए. एसओपी में कहा गया है कि आकलन की कार्यवाही के दौरान एओ द्वारा एकत्रित सभी सामग्रियों और साक्ष्यों के आधार पर निर्धारिती को उसके मामले की व्याख्या करने का अवसर प्रदान किया जाएगा. इन मामलों कार्रवाई के लिए सीबीडीटी ने एओएस को उन लोगों के बारे में अतिरिक्त जानकारी इकट्ठा करने के लिए कानून की धारा 133(6) (सूचना के लिए कॉल करने की शक्ति) के तहत “उपयुक्त” कार्रवाई करने के लिए कहा है, जहां से “संदिग्ध लेनदेन” हुआ था.

एओ के फैसले पर क्षेत्र प्रमुख रखेंगे निगरानी

सीबीडीटी द्वारा जारी एसओपी में कहा गया है कि एक बार “लेन-देन का अंतिम लाभार्थी का खुलासा हो जाने के बाद जांच अधिकारियों को अपने समकक्ष के पास इसे भेजना चाहिए, जिसके पास इकाई के अंतर्गत अधिकार क्षेत्र है. एसओपी ने एक विशेष मामले को यह कहते हुए भी चिह्नित किया कि यदि “एंट्री ऑपरेटर” या हवाला-व्यापार जैसे उदाहरण पाए जाते हैं तो न्यायिक एओ को “बेहिसाब कमीशन प्राप्तियों पर कर” लगाना चाहिए और कर चोरों को पकड़ने के लिए सांठगांठ का पता लगाना चाहिए. यही नहीं, विभाग के क्षेत्र प्रमुखों को इन मामलों के अंतिम मूल्यांकन आदेश के निर्धारण की “निगरानी” करने के लिए भी कहा गया है.

 

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