योगी सरकार के डर से वीआरएस लेने वाले डीएसपी की काली कमाई देख एसीबी अफसरों की आंखें चुंधियाईं

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
यूपी पुलिस का सेवानिवृत्त डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया एसीबी की कमजोर जांच में भी करोड़ों का मालिक निकला है. समाजवादी पार्टी की सरकार में नोएडा अथॉरिटी में सृजित डीएसपी रैंक के पद पर तैनात भदौरिया की काली कमाई की जांच में खुलासा हुआ कि उसने आय से 1178 फीसदी ज्यादा रकम खर्च की है. इटावा निवासी भदौरिया ने अथॉरिटी में तैनाती के दौरान ही 2017 में यूपी में योगी सरकार के आते ही काली कमाई के पकड़े जाने के डर से सेवानिवृत्ति के चार महीने पहले ही वीआरएस ले लिया था लेकिन शिकायतों के बाद हुई जांच में उसकी ऑलीशान हवेलियों ने एंटी करप्शन ब्यूरो के अफसरों की आंखों को भी चौंधिया दिया है.
बताते हैं कि दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-47 में सफेद संगमरमर से बनी एक आलीशान कोठी में जब एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने छापा मारा तो उस कोठी के अंदर का नजारा देखकर अफसर हैरान रह गए. बेहतरीन तरीके से डिजाइन कोठी देखकर किसी राजा महाराजा के महल का आभास हो रहा था.
छापेमारी के दौरान खुलासा हुआ कि संगमरमर की इस आलीशान कोठी के अलावा रसूखदार रिटायर्ड डीएसपी भदौरिया की ऐसी कई कोठियां हैं. हर्षवर्धन भदौरिया का नाम नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बेहद चर्चित है. नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे और हमेशा विवादों में रहने वाले रिटायर्ड डीएसपी हर्षवर्धन भदोरिया के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने मुकदमा दर्ज कराया है.
एंटी करप्शन ब्यूरो ने यह मुकदमा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दर्ज कराया है. आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में शिकायत मिलने पर जांच शुरू की गई. जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि भदौरिया ने अपनी आय से 1178 फीसदी ज्यादा संपत्ति अर्जित की है. एंटी करप्शन ने लगभग 2 साल तक भदौरिया की संपत्तियों की जांच की और उसके बाद नोएडा के सेक्टर 49 थाने में मुकदमा दर्ज करवाया.
एंटी करप्शन ब्यूरो के अफसरों के मुताबिक 2003 से 2017 तक हर्षवर्धन भदौरिया के जरिए अर्जित की गई आय की जांच की गई तो उसमें पाया गया कि भदौरिया ने अपनी सैलरी से अर्जित रुपये से कहीं ज्यादा करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए. करोड़पति रिटायर्ड डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया की संपत्तियों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो ढंग से नहीं कर पाया है. इसलिए आगे की जांच के लिए नोएडा पुलिस से ब्यूरो ने मदद मांगी है.
बताते हैं कि 1981 में हर्षवर्धन भदौरिया बतौर सब इंस्पेक्टर यूपी पुलिस में भर्ती हुआ था. भदौरिया उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का रहने वाला है. अपने सियासी रसूख के दम पर सब-इंस्पेक्टर रहते हुए ही उसने करोड़ों की कमाई कर ली थी. सूत्र बताते हैं कि भदौरिया की लॉटरी सपा सरकार के दौरान नोएडा ऑथोरिटी में मिली तैनाती से खुली.
ऑथोरिटी में तैनाती के दौरान नोएडा के 47 में करोड़ों की कीमत आलीशान घर, सेक्टर 57 में अपने बेटे के नाम से 2-2 स्कूल भदौरिया ने खड़े कर दिए. नोएडा के सेक्टर 75 में उसका एक स्कूल नियम कानून को ताक पर रखकर बनाया गया.
भदौरिया के राजशाही रहन सहन का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने नोएडा के सेक्टर 47 में बने अपने आलीशान घर तक पहुंचने के लिए एक नया रास्ता बनवा लिया था. जिस पर सिर्फ उसे चलने का हक था. उसके घर तक पहुंचने के लिए ग्रीन बेल्ट पर अवैध निर्माण कराया गया है. घर के पास ग्रीन बेल्ट पर रास्ता और घर के बाहर गार्डरूम और अपने गुर्गों के लिए निर्माण कराया. भदौरिया ने अपने घर में आने वाले वीवीआईपी लोगों के लिए लॉन में एक स्टाइलिस्ट फूस की झोपड़ी भी बनवाई है. चर्चा है कि भ्रष्टाचार का यह मामला नोएडा के गिरफ्तार इंजीनियर यादव सिंह को भी पीछे छोड़ सकता है.
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