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बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी का अटैक, कहा- कांग्रेस के कारण हल नहीं हो सका अयोध्या विवाद

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के अयोध्या पहुंचने पर राममंदिर/बाबरी मस्जिद विवाद के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कांग्रेस पर हमला बोला है. अंसारी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की वजह से अयोध्‍या विवाद हल नहीं हो पाया. उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा हिंदू-मुस्लिमों को लड़ाया है. अयोध्‍या विवाद कांग्रेस की ही देन है. उन्होंने कहा कि अयोध्‍या में प्रियंका गांधी सिर्फ राजनीति कर रही हैं. वह वहां केवल राजनीति करने गई हैं. दर्शन पूजा का कोई राजनीतिक फायदा नहीं होगा. लोकसभा चुनाव के वक्त इकबाल अंसारी के इस हमले से कांग्रेस को असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.
यूपी दौरे के तीसरे दिन शुक्रवार को प्रियंका गांधी अयोध्या दौरे पर हैं. अमेठी के मोहनगंज पहुंची कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से स्वागत किया. जानकारी के मुताबिक, प्रियंका गांधी हनुमानगढ़ी के दर्शन कर वहां पूजन करेंगी, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं करेंगी. प्र‍ियंका गांधी हनुमानगढ़ी में महंत ज्ञानदास से भी मुलाकात करेंगीं. इस मुलाकात में महंत ज्ञानदास राम मन्दिर पर चर्चा करेंगे. आपको बता दें कि प्रियंका गांधी से पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राहुल गांधी भी हनुमानगढ़ी अयोध्या के राजा हनुमान जी का दर्शन कर आशीर्वाद ले चुके हैं.
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 8 मार्च 2019 को रामजन्मभूमि विवाद मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय समिति से मध्यस्थता कराए जाने का आदेश दिया. इस समिति के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ.एम.आई. कलीफुल्ला हैं. उनके साथ आर्ट ऑफ लीविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू इसके सदस्य हैं. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल दो चक्रों में बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद को सुलझाने के लिए अपनी बैठक फैजाबाद में की.
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने आदेश में कहा था, “हमने विवाद की प्रकृति पर विचार किया है. इस मामले में पक्षकारों के बीच सर्वसम्मति की कमी के बावजूद, हमारा विचार है कि मध्यस्थता के जरिए विवाद को सुलझाने का एक प्रयास किया जाना चाहिए.”
मुस्लिम वादकारियों ने मध्यस्थता पर सहमति जताई थी, लेकिन हिंदू वादकारियों ने इसका विरोध किया. हिंदू पक्ष ने कहा था कि उनके लिए भगवान राम का जन्मस्थान निष्ठा व मान्यता का विषय है और वे इस मध्यस्थता में विपरीत स्थिति में नहीं जा सकते. हालांकि, कई मुस्लिम नेताओं ने श्रीश्री रविशंकर के नाम को लेकर भी आपत्ति जताई थी.
बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 2010 के फैसले में विवादित स्थल को तीन समान भागों में बांटा है, जिसमें निर्मोही अखाड़ा, रामलला व सुन्नी वक्फ बोर्ड प्रत्येक को एक-एक भाग दिया है.
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