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नौ धनाड्य नेताओं पर नजर रखने की व्यवस्था न होने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, पूछा सवाल

नौ धनाड्य नेताओं पर नजर रखने की व्यवस्था न होने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, पूछा सवाल
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
लोकसभा चुनावों के ऐलान के बाद नवधनाड्य नेताओं की कमाई पर निगरानी का कोई इंतजाम न होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि दो चुनावों के दौरान बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने वाले उम्मीदवारों पर नजर रखने के लिए कोई स्थाई तंत्र क्यों नहीं है. इसके साथ ही एनआरसी रजिस्टर में नाम न होने वालों के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने पर भी सवाल खड़े किए हैं. दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है.
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि दो चुनाव के बीच बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने वाले उम्मीदवार पर नज़र रखने के लिए कोई स्थाई तंत्र क्यों नही है. कोर्ट ने कहा कि दो हफ़्ते में हलफ़नामा दाखिल कर बताओ कि ऐसे उम्मीदवारों की कमाई पर नजर रखने के लिए सरकार ने क्या किया और क्या करना चाहती है. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि फ़ार्म-26 में संशोधन कर उम्मीदवार घोषित करे कि वह जनप्रतिनिधि कानून में अयोग्य नहीं है. फार्म-26 में उम्मीदवारों की आय का ब्योरा दर्ज किया जाता है.
इसके अलावा असम के एनआरसी रजिस्टर में नाम न होने और मतदाता सूची में नाम होने से उन मतदाताओं के मतदान की वैधता को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछा है कि उनका क्या होगा जिनका नाम 31 जुलाई 2019 को प्रकाशित होने वाली असम की फ़ाइनल एनआरसी में नही हैं. पर वोटर लिस्ट में शामिल है. चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ़्ट एनआरसी में नाम न होने के आधार पर किसी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया है.

 

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