विश्वविद्यालयों में आरक्षण पर मोदी कैबिनेट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति और नियुक्ति के रोस्टर पर जारी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को विश्वविद्यालयों को इकाई मानते हुए नियुक्ति और आरक्षण की व्यवस्था लागू करने के फैसले को 24 घंटे के अंदर ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई है. कैबिनेट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजामंदी वाले आदेश को पलटते हुए विश्वविद्यालयों में आरक्षण और नियुक्ति की पुरानी व्यवस्था को बहाल कर दिया था. जबकि हाईकोर्ट ने विभागों को इकाई मानते हुए आरक्षण और नियुक्ति का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे ही सही माना था. सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कोर्ट के फैसले को पलटने वाले कैबिनेट के इस निर्णय को रद करने की मांग की गई है.

गौरतलब है कि गुरुवार को ही विश्वविद्यालयों में विभाग और संकाय को यूनिट मानकर शिक्षक भर्ती आरक्षण की व्यवस्था के फैसले को पलटा गया था. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस व्यवस्था को बदलते हुए तय किया था कि शिक्षक भर्ती के लिए विश्वविद्यालय को यूनिट मानकर आरक्षण लागू किया जाएगा. सरकार ने इसके लिए अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि कैबिनेट के फैसले से आरक्षित वर्ग के लोगों को उनका अधिकार मिलेगा. साथ ही जल्द ही 5000 रिक्त पदों पर भर्तियां भी की जाएंगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल होने से भर्ती प्रक्रिया में व्यवधान खड़ा हो सकता है.

@PrakashJavdekar

आज केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऐतिहासिक फैसला लिया है – विश्वविद्यालय / महाविद्यालय को एक इकाई मानते हुए “केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों (शिक्षकों के संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश, 2019” के प्रचार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। @PMOIndia @PIBHindi @MIB_Hindi @DDNewsHindi

विश्वविद्यालयों में आरक्षण का मामला हाईकोर्ट में था. कोर्ट ने फैसला दिया कि आरक्षण की व्यवस्था विश्वविद्यालय को यूनिट मानकर नहीं लागू की जाएगी. इसके लिए विभागों को ही यूनिट माना जाएगा. इस मुद्दे को लेकर राजनीति भी गरमा रही थी. आरक्षण वर्ग के आवेदकों और शिक्षकों का कहना था कि विभाग को यूनिट मानने से उनके अधिकारों और पदों का नुकसान होगा.
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि यह निर्णय एससी/एसटी/एसईबीसी से संबंधित व्यक्तियों की दीर्घकालिक मांगों को भी संबोधित करेगा और संविधान के तहत उनके अधिकारों को सुनिश्चित करेगा. साथ ही यह निर्णय 200 पॉइंट रोस्टर पर आधारित पहले की आरक्षण प्रणाली को पुनर्स्थापित करता है. अब विभाग/विषय को एक इकाई के रूप में नहीं माना जाएगा. यह निर्णय अब शिक्षक संवर्ग में सीधी भर्ती द्वारा 5000 से अधिक रिक्तियों को भरने का मार्ग प्रशस्त करेगा. पुरानी व्यवस्था लागू करने के लिए कैबिनेट ने केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों (शिक्षकों के संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश-2019 लागू किया जाएगा.

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

NationalWheels will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.