सफलताः पटरियों पर दौड़ी सोलर ऊर्जा वाली ट्रेन, इन ट्रेनों में भी लगेंगे सौर पैनल

भारतीय रेलवे ने मंगलवार को बड़ा मुकाम हासिल किया. रेलवे में फ्लेक्सिबल सौर पीवी पैनल लगे डिब्बों को पटरियों पर उतार दिया है. इससे ट्रेनों के अंदर पंखे और लाइट की समस्या का समाधान हो जाएगा. अभी जिन डिब्बों में सौर पैनल लगाए गए हैं वह गैरवातानुकूलित और कम दूरी की ट्रेनों में लगे हैं. इनकी सफलता का परीक्षण होने के बाद लंबी दूरी और वातानुकूलित डिब्बों में भी इनका इस्तेमाल शुरू हो जाएगा. इससे एसी फेल होने की घटनाएं कम हो सकेंगी. साथ ही एसी फेल होने से नाराज याित्रयों की ओर से ट्रेनों को रोकने और उसके कारण होने वाली लेटलतीफी पर भी लगाम लग सकेगी.

भारतीय रेलवे में फ्लेक्सिबल सौर पीवी पैनल वाले यात्री डिब्बों का उदघाटन  रेलवे बोर्ड के सदस्य, चल स्टॉक, रविन्द्र गुप्ता ने 24 जुलाई को नई दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर किया. उन्होंने पहले ऐसे गैर वातानुकूलित यात्री डिब्बे का उदघाटन किया जिसकी छत पर फ्लेक्सिबल सौर पीवी पैनल लगाए गए हैं. इनसे उत्पादित होने वाली बिजली से डिब्बे के पंखे, लाइट और मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट चलाए जाएंगे.  इस दौरान रेलवे बोर्ड, इंडियन रेलवे ऑर्गेनाईजेशन फॉर अल्टरनेट फ्यूल्स (IROAF) और मैसर्स सीईएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

रेलवे डिब्बों पर सौर ऊर्जा का उपयोग करने के लिए आईआरओएएफ ने पिछले वर्ष डीईएमयू रेलगाड़ी के 6 ट्रेलर कोचों पर परम्परागत पीवी सौलर पैनल लगाए थे. डीईएमयू रेलगाडियों के मामलों में, सोलर पीवी पैनलों के माध्यम से होने वाली अनुमानित बचत, उच्च गति के डीज़ल की खपत में कमी के कारण डिब्बों की 25 वर्ष की आयु के दौरान प्रति गाड़ी 3 करोड रुपये तक होगी. इस दौरान कार्बन के उत्सर्जन में प्रति गाड़ी 1350 टन की कमी होगी.

डीईएमयू रेलगाडि़यों के 250 कोचों में लगेंगे सोलर पैनल

सौर ऊर्जा की इस तकनीक का उपयोग मेन लाइन के उन डिब्बों के लिए भी किया जा सकता है जिनमें रेलगाड़ियों की धीमी गति के कारण उनमें लगा अल्टरनेटर चार्ज नहीं हो पाता और डिब्बे के भीतर आवश्यक विद्युत की आपूर्ति नहीं हो पाती. रेलवे बोर्ड ने  आईआरओएएफ को ऐसी चार पैसेंजर रेलगाडियों की छतों पर सोलर टीवी पैनल लगाने के निर्देश दिए थे, जिनमें धीमी गति के कारण बैटरियां चार्ज नहीं हो पाती. सोलर पीवी पैनलों वाले डिब्बों को 54585/54586 सीतापुर-दिल्ली-रेवाड़ी पैसेंजर रेलगाड़ी में लगाया गया है. इन डिब्बों की छतों पर पैनल लगाने का कार्य मैसर्स सीईएल लिमिटेड द्वारा किया गया है.

आईआरओएएफ ने डीईएमयू रेलगाड़ियों के 250 ट्रेलर कोचों पर सौर पैनल लगाने की योजना बनाई है. इनसे आईआरओएएफ ऐसी 3 और पैसेंजर रेलगाड़ियों को सौर ऊर्जा से समर्थ बनाएगा जिनमें धीमी गति के कारण बैटरी चार्ज नहीं हो पाती. इन रेलगाड़ियों में 54255/54256 वाराणसी-लखनऊ बरास्ता प्रतापगढ़, 54334/54333 लखनऊ-वाराणसी बरास्ता फ़ैज़ाबाद और  14203/14204 वाराणसी-लखनऊ इंटरसिटी शामिल हैं.

सौर पैनल वाले डिब्बों में बहुउपयोगी सेंसर भी लगे

फ्लैक्सिबल सौर पीवी पैनल कम भार वाले और आसानी से लगाए जाने योग्य हैं. ज्यादातर पैनलों का निर्माण मैसर्स सीईएल लिमिटेड द्वारा किया गया है. सीतापुर-दिल्ली-रेवाड़ी पैसेंजर रेलगाड़ी में पैनल लगाने का व्यय आईआरएफसी के कोरपोरेट सोशल रिस्पाँसिबिलिटी के तहत वहन किया गया है. उम्मीद है कि ऐसे प्रत्येक डिब्बे से प्रतिदिन 15 से 20 यूनिट बिजली का उत्पादन होगा.  इन डिब्बों पर लगाए गए सौर पैनलों का कुल भार लगभग 120 किलोग्राम है. यह सौर पैनल कुछ मामलों में अलबेले हैं. विद्युत उत्पादन सुविधा के साथ-साथ यह डिब्बे सेंसरों से भी युक्त हैं जो पैनलों पर सौर विकिरण, उनसे उत्पन्न होने वाले कम्पन, सौर वोल्टेज और करंट, कोच/रैक द्वारा सौर ऊर्जा उत्पादन, सापेक्ष आर्द्रता, तापमान, रेलगाड़ी और हवा की गति, भौगोलिक सूचना (अक्षांश/देशांतर और ऊंचाई), तिथि और समय भी प्रदर्शित करता है.

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