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कमलनाथ के करीबियों पर आयकर रेड में दिखा `स्पेशल-26` इफेक्ट, हवाला रैकट से जुड़ा तार

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अक्षय कुमार की फिल्म ‘स्पेशल 26’ जैसा इफेक्ट मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के यहां पड़े आयकर रेड में भी दिखा है. छापेमारी के तौर-तरीके से ऐसा लगा कि आयकर अफसरों की टीम ने फिल्म से टिप्स लिया है. मुख्यमंत्री के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ की कुछ आयकर अफसरों से अच्छी जान-पहचान को देखते हुए रेड के लीक होने का खतरा भांपकर दिल्ली की आयकर टीम ने छापेमारी के लिए ऐसा ताना-बाना बुना कि हर कोई भौचक्क रह गया. बताया जा रहा है कि गोपनीय तरीके से मारे गए इस छापे की भनक मुख्यमंत्री को भी दो घंटे बाद लग सकी. इस रेड में 300 अफसरों-कर्मचार‍ियों ने अपनी-अपनी भूम‍िका बखूबी न‍िभाई. इस रेड में सीआरपीएफ के करीब 300 जवान और अफसर भी लगे.
आयकर विभाग ने मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और गोवा में मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीब‍ियों पर रविवार की आधी रात को रेड डाली. रेड का खाका इस तरह बुना गया था क‍ि मुख्यमंत्री को भी इसकी भनक नहीं लग सकी. ये रेड तीन राज्यों के 50 ठ‍िकानों पर रव‍िवार सुबह तीन बजे से शुरू हुई जो 30 घंटे बाद भी जारी है. इस छापेमारी में अब तक करीब 100 करोड़ रुपये म‍िलने की बात कही जा रही है. माना जा रहा है कि इस रकम का इस्तेमाल चुनावी प्रबंधन में होना था.
मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के घर छापा मारने के लिए आयकर अफसरों ने शनिवार देर रात 12 बजे टूरिस्ट का बोलकर गाड़ियां बुक कराईं. इसके बाद रात 3 बजे छापे की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. सूचना लीक होने के डर से इस पूरी कार्रवाई से भोपाल और इंदौर के आयकर अफसरों, कर्मचारियों और मध्य प्रदेश पुलिस को दूर रखा गया. छापेमारी के लिए टीम ने सीआरपीएफ की मदद ली. हालांकि, दोपहर में सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस के बीच भारी विवाद भी खड़ा हो गया. मध्य प्रदेश पुलिस ने पश्चिम बंगाल की तरह केंद्रीय सुरक्षा बलों की राह में रोड़ा अटकाना शुरू कर दिया.
रात को ढाई बजे खटखटाया ‘टारगेट’ का दरवाजा
सीएम कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के करीबी अश्विनी शर्मा के घर पर आयकर विभाग की टीम रात ढाई बजे पहुंची. टीम के दरवाजा खटखटाने पर अश्व‍िनी के परिजनों ने दरवाजा खोला लेकिन सशस्त्र बल और आयकर की टीम को देखते ही दोबारा दरवाजा बंद कर लिया. टीम के लोग बार-बार उनसे दरवाजा खोलने को कहते रहे,  पर दरवाजा नहीं खुला. काफी मशक्कत के बाद रात 3 बजे दरवाजा खुला. यह आशंका जताई जा रही है कि इस दौरान घर के लोगों ने कैश और दस्तावेज ठिकाने लगाने की कोशिश की होगी.
ऐसे जुड़े नाम से नाम
जबलपुर के हवाला व्यापारी और दिल्ली में एक उद्योगपति के यहां कुछ समय पहले पड़े छापों से आयकर विभाग को मिली कुछ डायरियों में मिले नामों से लिंक जोड़कर सीएम कमलनाथ के करीबियों के नाम भी जुड़े. जांच आगे बढ़ने पर इस हवाला रैकेट के तार भोपाल में अश्विन शर्मा और इंदौर में ललित छजलानी तक जा पहुंचे. जांच की इसी कड़ी में प्रवीण कक्कड़ और आरके मिगलानी का नाम भी जुड़ गया.

ट्रांसफर और पोस्टिंग से जमा की अकूत दौलत

इन्हीं सूचना के आधार पर द‍िल्ली, इंदौर, भोपाल, गोवा में छापे मारे गए. कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़, पूर्व सलाहकार राजेंद्र म‍िगलानी, भांजे रातुल पुरी, कक्कड़ के करीबी प्रतीक जोशी और सरकारी लॉब‍िस्ट अश्विन शर्मा के ठ‍िकाने खंगाले गए. भोपाल के प्लेट‍िनम प्लाजा में प्रतीक जोशी के घर से 9 करोड़ रुपये नकद म‍िले. अश्विन शर्मा के घर नोट ग‍िनने की मशीन लगाई गई है. बताया जा रहा है क‍ि ये रकम 100 करोड़ रुपये हो सकती है. माना जा रहा है क‍ि अश्विन शर्मा मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ट्रांसफर और पोस्टिंग में काफी सक्रिय था. इस काली कमाई की बदौलत ही इतनी अकूत दौलत जमा की गई थी. इसके अलावा मध्य प्रदेश की नई आबकारी और ट्रांसपोर्ट पॉल‍िसी बनाकर भी जमकर माल कूटने के संकेत मिले हैं.
जांच के लिए आए अधिकारी भी दिल्ली से
बताया जा रहा है कि इस छापे के लिए 15 द‍िन से तैयारी चल रही थी. ‌आयकर की कई जांचों में हवाला से राशि इधर से उधर होने की बात सामने आ रही थी. इसी से इसे लिंक किया गया. बताते हैं कि गोपनीयता के लिए दिल्ली मुख्यालय ने जयपुर से डायरेक्टर जनरल एससी गुप्ता को इंदौर भेजा था और वह लगातार इस पर नजर रखे हुए थे. इस बीच कई अन्य अफसर भी जांच के लिए इंदौर पहुंचते रहे.
पूरी रात क‍िया सफर
आयकर विभाग का ऑपरेशन कक्कड़ बेहद सीक्रेट मिशन बताया जा रहा है. विभाग को अंदेशा था कि स्थानीय अफसरों और कर्मचारियों से सहयोग लेने से जानकारी लीक हो सकती है. इसलिए सीआरपीएफ की टीम दो दिन पहले दिल्ली से रवाना हुई. डिप्टी कमांडेंट महेंद्र सिंह वर्मा की अगुवाई में पूरी रात के सफर के बाद यह टीम शनिवार को दिन के 11 बजे नीमच पहुंची.
चुनाव में बन सकता है मुद्दा
लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होना है. मंगलवार की शाम को पहले चरण का प्रचार थम जाएगा. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी और दूसरे करीबियों के फंसने के बाद कांग्रेस के लिए जवाब देना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, कांग्रेस हाईकमान की ओर से अब तक कोई बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन भाजपा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा सकती है. लोकसभा चुनावों के दौरान इसे कमीशनखोरी और काला धन से जोड़कर प्रचार-प्रसार संभव है.
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