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कार्यकारी अध्यक्ष बनीं सोनिया गांधी के सामने बेटे राहुल से हुए नुकसान की भरपाई की है बड़ी चुनौती

कार्यकारी अध्यक्ष बनीं सोनिया गांधी के सामने बेटे राहुल से हुए नुकसान की भरपाई की है बड़ी चुनौती
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
लगातार दूसरे लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार और राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस की कमान फिर गांधी परिवार के पास आ गई है. शनिवार को दिनभर की माथापच्ची के बाद दिल्ली में जुटे 400 कांग्रेसी नेता गांधी परिवार से बाहर के किसी योग्य व्यक्ति को अध्यक्ष पद के लिए तलाश नहीं कर पाए. देर शाम सोनिया गांधी को ही कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में यह जिम्मेदारी और चुनौती सौंप दी गई कि वह बेटे राहुल गांधी के कार्यकाल में पार्टी को हुए नुकसान को करिश्माई नेतृत्व के जरिए भरपाई करें. हालांकि, देश के बदले राजनीतिक हालात में सोनिया गांधी के लिए कांग्रेस को पुनर्स्थापित करना काफी मुश्किल और चुनौतीभरा काम साबित हो सकता है. वजह, सोनिया गांधी के पिछले 20 वर्ष के कार्यकाल में लंबा वक्त ऐसा रहा है जिसमें विपक्ष के रूप में भाजपा सबसे कमजोर समय का सामना कर रही थी. जबकि वर्तमान में सोनिया गांधी को पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी से दो-चार होना है.
साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति की फैसले से यह भी साफ हो गया है कि कांग्रेस गांधी परिवार से बाहर किसी नेता की अगुवाई में काम करने के बारे में सोच भी नहीं सकती. गांधी परिवार में ही वह अदृश्य शक्ति है जिसके नेतृत्व में कांग्रेस चल सकती है. वजह, अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से लेकर समिति की बैठक तक में राहुल गांधी इस बात पर अड़े रहे कि कांग्रेस अध्यक्ष गांधी परिवार से किसी बाहरी व्यक्ति को बनाया जाए लेकिन यह संभव नहीं हो सका. फिलहाल, यह कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी नए अध्यक्ष के चुनाव तक यह जिम्मेदारी संभालेंगी. लेकिन यह भी सच है कि गैर गांधी-नेहरू परिवार के किसी नेता पर सहमति न बनने पर सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष पद की बागडोर संभालना पड़ा है.
असल में, कांग्रेस कार्यसमिति में अध्यक्ष पद के लिए राहुल, फिर प्रियंका और उसके बाद सोनिया गांधी, तीनों ने एक-एक कर मना कर दिया. फिर कार्यसमिति के सदस्यों ने कहा कि आप तीनों ही कोई एक नाम तय कर दें. इस पर भी बात नहीं बनी. तब सोनिया गांधी से अंतरिम अध्यक्ष बने रहने को कहा गया, जिसे उन्होंने मंजूर कर लिया.
पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया को बताया कि राहुल गांधी द्वारा पार्टी नेताओं का आग्रह विनम्रता से अस्वीकार किए जाने के बाद सीडब्ल्यूसी ने सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया. वह नए अध्यक्ष के चुनाव तक यह जिम्मेदारी निभाएंगी.
ये फैसला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में लिया गया. इससे पहले राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ने पर अड़ गए थे. लिहाजा, एक ही दिन में दो बार हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में तीन प्रस्ताव पारित किए गए. एक प्रस्ताव में बतौर अध्यक्ष राहुल गांधी के योगदान की सराहना की गई है. दूसरे में सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किए जाने और तीसरे प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर की स्थिति का उल्लेख है.
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी की तारीफ का प्रस्ताव भी पास किया गया. प्रस्ताव में कहा गया कि राहुल गांधी ने बेबाकी से देश के मुद्दों को उठाया, पार्टी को नई ऊर्जा दी और कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया.
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक शनिवार को दो बार हुई. इसमें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रियंका गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, एके एंटनी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए. सुबह 11 बजे हुई बैठक में नेताओं के 5 समूह बनाए गए थे, जिन्होंने देश भर के कांग्रेस नेताओं की राय ली. इन्होंने अपनी रिपोर्ट सीडब्ल्यूसी में सौंपी.
रात 8 बजे जब पार्टी की दूसरी बैठक हुई तो राहुल गांधी ने साफ तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने से इनकार कर दिया. प्रियंका गांधी को ‘कप्तान’ बनाने की मांग पर भी सहमति नहीं बन पाई. सभी विकल्पों पर जोर-आजमाइश के बाद पार्टी नेताओं ने सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई. नेताओं ने सोनिया गांधी के नाम का प्रस्ताव दिया. पहले तो सोनिया गांधी ने मना कर दिया. लेकिन जब उन्हें बताया गया कि गैर गांधी परिवार से जब तक कांग्रेस अध्यक्ष नहीं मिल जाता तभी तक यह जिम्मेदारी संभाल लें. इसके बाद उन्होंने अंतरिम अध्यक्ष बनना स्वीकार कर लिया.

माना जा रहा है कि गांधी परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति का अध्यक्ष हाल-फिलहाल चुना जाना मुश्किल है. तब तक, सोनिया ही कांग्रेस की अगुवा रहेंगी. गौरतलब है कि सोनिया गांधी ने बेटे राहुल गांधी को जब कमान सौंपी थी उस वक्त कांग्रेस देश के लगभग डेढ़ दर्जन राज्यों की सत्ता में थी. राहुल गाधी के कार्यकाल में कांग्रेस चार राज्यों तक सिमट गई है. मोदी-शाह की जोड़ी अभी पूरी मुस्तैदी के साथ डटी है. भाजपा का अपने स्वर्णिम दौर से गुजर रही है. ऐसे में सोनिया गांधी के सामने बिखर चुकी कांग्रेस को फिर से खड़ा करना भारी चुनौती वाला काम है.

 

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