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सौर ऊर्जा में सिरमौर मध्य प्रदेश, और 5000 मेगावॉट की परियोजनाएं हैं निर्माणाधीन

सौर ऊर्जा में सिरमौर मध्य प्रदेश, और 5000 मेगावॉट की परियोजनाएं हैं निर्माणाधीन
बिजली जनजीवन का मुख्य आधार है। थोड़ी देर के लिये भी बिजली चली जाएं तो सारी व्यवस्थाएँ ठप हो जाती है। इसलिए बिजली उत्पादन पूरे देश में हमेशा गंभीर मुद्दा रहा है। ताप विद्युत और जल विद्युत से परंपरागत रूप से विद्युत उत्पादन होता रहा है। ताप संयंत्रों से पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता दी गई। नवीकरणीय ऊर्जा में सौर ऊर्जा प्रमुख है। सौर परियोजना से उत्पादित बिजली की लागत ताप और जल विद्युत उत्पादन से कम तो होती ही है। इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता।
मध्यप्रदेश में भी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को प्राथमिकता देने की रणनीति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पूर्व कार्यकाल में प्रारंभ हुई। आज मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा उत्पादन के मामले में सिरमौर बन गया है।
विश्व की सबसे बड़ी परियोजना में शुमार रीवा सौर परियोजना शामिल है। लगभग 4 हजार करोड़ की लागत से 750 मेगावाट की रीवा सौर परियोजना में पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन प्रारंभ हो गया है। इसके अलावा पांच हजार मेगावाट की छह परियोजनाएं और निर्माणाधीन है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना को 10 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीडियो कांन्फ्रेसिंग के माध्यम से राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस परियोजना से लगभग 800 लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है।
  1. रीवा सौर परियोजना के लिये मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम और सोलर एनर्जी कार्पोरेशन ऑफ इण्डिया की ज्वाइंट वेंचर कम्पनी के रूप में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड कम्पनी का गठन किया गया। इस परियोजना में उत्पादित विद्युत का न्यूनतम टैरिफ 2 रूपये 97 पैसे यूनिट था, जो समकालीन परियोजनाओं से प्राप्त टैरिफ साढ़े चार से पाँच यूनिट की तुलना में डेढ़ से दो रूपये तक कम था। रीवा सौर परियोजना 1590 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित है। यह दुनिया के सबसे बड़े सिंगल साइड सौर सयंत्रों में से एक है। परियोजना से उत्पादित विद्युत का 76 प्रतिशत अंश प्रदेश की पावर मैनेजमेंट कम्पनी और 24 प्रतिशत दिल्ली मेट्रो को प्रदान किया जा रहा है।
  2. आंतरिक ग्रिड समायोजन के लिए और वर्ल्ड बैंक से ऋण प्राप्त करने वाली यह देश की पहली परियोजना है। विश्व बैंक का ऋण राज्य शासन की गारंटी के बिना और क्लीन टेक्नालॉजी फण्ड (सीटीएफ) के अंतर्गत सस्ती दरों पर दिया गया है।
  3. पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से देखें तो रीवा सौर परियोजना से प्रतिवर्ष 15.7 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका जा रहा है, जो 2 करोड़ 60 लाख पेड़ो को लगाने के बराबर है। 
  4. मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा की 5 हजार मेगावाट की परियोजनाएँ निर्माणाधीन है। प्रदेश की पहली रीवा सौर परियोजना के लिये गठित कम्पनी रम्स द्वारा आगर, शाजापुर, नीमच, छतरपुर, औंकारेश्वर तथा मुरैना में स्थापित होने वाली इन परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया है।
  5. आगर में 550 मेगावाट, शाजापुर में 450 मेगावाट, नीमच में 500 मेगावाट, छतरपुर में 1500 मेगावाट, औंकारेश्वर फ्लोटिंग ओंकारेश्वर बांध स्थल पर 600 मेगावाट और मुरैना में 1400 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के लिये सौर पार्कों की स्थापना की कार्यवाही चल रही है।
  6. प्रदेश में सोलर पम्प के माध्यम से किसानों को सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना के अंतर्गत अब तक 14250 किसानों के लिये सोलर पम्प स्थापित किये जा चुके है। अगले तीन वर्षो में 2 लाख सोलर पम्प लगाने का लक्ष्य है।

रूफ टॉप पर सौर ऊर्जा

प्रदेश में अब तक 30 मेगावाट क्षमता के सोलर रूफ टॉप संयंत्र स्थापित किये जा चुके है। प्रदेश सरकार के अनुसार इस वर्ष प्रदेश के 700 शासकीय भवनों पर 50 मेगावाट क्षमता के सोलर रूफ टॉप लगाना प्रस्तावित है। सोलर रूफ टॉप संयंत्रों से उत्पादित बिजली की दरें एक रूपये 38 पैसे प्राप्त हुई। सरकार का प्रयास है कि रूफ टॉप संयंत्र घर-घर लगायें जाएं ताकि उपयोग के लिये बिजली सस्ती दरों पर मिलें। शासकीय भवनों पर सौर संयंत्र ऐसे मॉडल पर लगाये जा रहे हैं, जिसमें हितग्राही को विभाग अथवा संस्था को कोई पैसा नहीं देना है। संयंत्र विकसित करने वाला सस्ती बिजली उपलब्ध करायेगा।
प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिये सौलर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। भोपाल के निकट मंण्डीदीप में 400 औद्योगिक ईकाइयों के लिये 32 मेगावाट क्षमता की सोलर रूफ टॉप परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इससे उद्योगों को सस्ती बिजली मिलने से औद्योगिक क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी। सौर ऊर्जा को बढ़ावा समय की मांग है। मध्यप्रदेश देश का बड़ा केन्द्र बनकर उभरेगा।

 


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