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अपनों को कैबिनेट में जगह ना दिला पाने के कारण शिवराज ने दिया था समुद्र मंथन वाला बयान!

अपनों को कैबिनेट में जगह ना दिला पाने के कारण शिवराज ने दिया था समुद्र मंथन वाला बयान!

शिवराज समर्थित केवल 4 चेहरों को कैबिनेट में जगह

मध्यप्रदेश: कल गुरुवार को 100 दिन के लंबे इंतजार के बाद मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ|
राजभवन में 28 मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली| 28 मंत्रियों में 16 भाजपा के, 9 सिंधिया खेमे से, और 3 कांग्रेस छोड़कर आए चेहरे शामिल हैं| हालांकि इससे पहले हुए अल्प विस्तार में भी महाराज के दो मंत्री शामिल हैं| मध्यप्रदेश में शिवराज चौथी बार मुख्यमंत्री ज्योतिराज सिंधिया की मेहरबानी और मदद से ही बने हैं|
बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान शिवराज के समर्थकों को लेकर सहमत नहीं था, क्योंकि वह ज्योतिराज्ये सिंधिया को प्राथमिकता देना चाहता था| और इसका असर मंत्री के लिए चुने गए नामों में दिखा| 28 चेहरों में केवल 4 चेहरे ऐसे हैं जिन्हें शिवराज का करीबी माना जाता है| लिस्ट में सिंधिया और नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का दबदबा रहा| शिवराज समर्थित भूपेंद्र सिंह, जगदीष देवड़ा, विश्वास सारंग और विजय शाह को ही कैबिनेट में जगह मिल पाई, जिसकी खलिश शिवराज द्वारा मीडिया को दिए गए बयान में भी दिखी|
शिवराज ने बुधवार को कहा था कि समुद्र मंथन से जो विष निकलता है उसे भगवान शंकर पी जाते हैं और अमृत औरों में बढ़ जाता है|
उनके इस बयान से जाहिर था कि कैबिनेट चयन में उनकी नहीं चली, और वह अपनों को जगह दिलाने में नाकाम रहे|
शिवराज के इस बयान पर चुटकी लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मंथन से निकले विष को अब रोज पीना पड़ेगा|
इधर, मध्य प्रदेश राजनीति में जोरदार वापसी के बाद राज्यसभा सदस्य ज्योतिराज्ये सिंधिया ने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया कि “टाइगर अभी जिंदा है”, सिंधिया के इस ट्वीट के बाद सवाल उठने लगे कि क्या मंथन के बाद विष शिवराज के हिस्से में आया जबकि अमृत का कलश 11 मंत्री पद के साथ सिंधिया के हाथ लगा| और क्या भाजपा में मध्य प्रदेश की राजनीति का टाइगर बदल गया है?

 


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