शिवपाल का नेताजी को बॉय-बॉय, कहा-नेता जी का आना न आना अब कोई मुद्दा नहीं है

बचपन से लेकर बुढ़ापे तक बड़े भाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले शिवपाल यादव अब पुत्र मोह में पड़े मुलायम सिंह यादव का मोह छोड़ने की कोशिशों में जुट गए हैं. अखिलेश की समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया का गठन करने वाले शिवपाल यादव नौ दिसंबर को लखनऊ में एक बड़ी रैली की तैयारी में जुटे हैं. इस रैली के जरिए ही शिवपाल सिंह पार्टी के एजेंडे का भी ऐलान करेंगे. यह लगभग कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की तरह होने का अनुमान है. 

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की रैली में मुलायम सिंह यादव मौजूदगी पर बातचीत से शिवपाल अब बचना चाहते हैं. उनकी कोशिश है कि मुलायम की छाया से अलग हटकर नई पहचान खड़ी की जाए. हालांकि, श्रद्धा और सम्मान के भाव में वह कोई कमी नहीं आने देना चाहते. रैली में मुलायम की मौजूदगी के सवाल पर शिवपाल ने कहा है कि नेता जी का आना या ना आना अब कोई मुद्दा नहीं है. मुद्दा देश को बचाने का है. इसीलिए आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी यूपी में मुलायम सिंह यादव की सीट को छोड़ कर सभी 79 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी.

दरअसल, इससे पहले शिवपाल और अखिलेश यादव दोनों ही मुलायम पर दावा ठोंकते रहे हैं. मुलायम सिंह यादव भी कभी भाई शिवपाल के साथ खड़े दिखते हैं तो दूसरे ही पल बेटे अखिलेश यादव के साथ समाजवादी पार्टी के मंच पर. माना जाता है कि मुलायम दोनों पक्षों के साथ खड़े होने की कोशिश कर एकजुटता कराने का संदेश देना चाहते हैं लेकिन शिवपाल अब वापसी की सभी संभावनाओं को जड़ से काट रहे हैं.

फिरभी, शिवपाल अपनी नई पार्टी के बैनर तले पहली रैली कर रहे हों तो मुलायम की मौजूदगी का सवाल सवाल यूपी की सियासत में लगातार उठ रहा था. शिवपाल ने अपने अंदाज से उस सवाल का जवाब भी दे दिया. साफ है कि अब शिवपाल के लिए मुलायम की मौजूदगी बड़ा सवाल नहीं है.

9 दिसंबर को जनाक्रोश रैली

शिवपाल यादव कहते हैं, ”9 दिसंबर को होने वाली महारैली मुद्दों एवं जनआक्रोश पर केंद्रित होगी. यह रैली किसी व्यक्ति विशेष की रैली नहीं होगी, यह रैली जन साधारण के आक्रोश को स्वर देगी, यह रैली जन आकांक्षा को मुखर व मूर्त राजनीतिक संदर्भ देगी.” उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश, नौजवानों और किसानों के सामने जो चुनौती खड़ी है वह ज्यादा महत्वपूर्ण है. यह रैली आम लोगों, गरीब, किसान, मजदूर के आक्रोश को स्वर देने के लिए आयोजित की गई है.

इससे पहले प्रगतिशील समजावादी पार्टी 6 दिसंबर को काला दिवस के रूप में मना रही है. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव ने कहा कि राम मंदिर मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड बिल्कुल साफ है. किसी भी कीमत पर विवादित भूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना नहीं होनी चाहिए. क्योंकि अब तक बातचीत और आपसी सहमति का कोई नतीजा नहीं निकला, ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार होना चाहिए. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के पहले विवादित भूमि पर मंदिर का निर्माण नहीं होना चाहिए. जिसे बहुत जल्दी है वो सरयू के उस पार निर्माण कर ले.

यूपी के सियासी हालात पर बात करते हुए शिवपाल ने कहा कि जनता केंद्र और यूपी की बीजेपी सरकार से परेशान हो चुकी है. सरकार ने अपना कोई भी वादा अब तक पूरा नहीं किया है. ना तो युवाओं को रोजगार मिला, ना किसानों को पूरा कर्ज माफ हुआ. यूपी में कानून-व्यवस्था की हालत बेहद खराब है. विकास की बातें करने वाली पार्टी अब संवेदनशील मुद्दों में उलझ कर रह गई है.

 

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