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व्यंग्यः बाबा बगदादी की मजार… चढ़ने लगी ताजे फूलों की चादर

व्यंग्यः बाबा बगदादी की मजार… चढ़ने लगी ताजे फूलों की चादर
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
भारत में बगदादी की मजार बना दो तो आगामी सौ साल बाद आप पाओगे कि शुरू में उजाड़ सी बनी वो मजार अब शानदार संगमरमर के पत्थर से जड़ी चमक-दमक रही है….…… जिसे हर सुबह गुलाब-केवड़े के पानी से धोया जाता है और प्रतिदिन ताजे फूलों की चादर चढ़ाई जाती है ।
अब इस मजार पर हर गुरुवार को खूब भीड़ जुटने लगी है……. जिसमें सबसे बड़ी संख्या हिंदुओ की होती है। अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वे यहां दान करते हैं । यहां कुछ फकीर टाइप के लोग हर वक्त बैठे अल्ला-मौला , अल्ला-मौला नामक सूफी गीत गाते रहते हैं जिसे हिन्दू लोग बड़े भक्ति-भाव से सुनते हैं।
साल में एक बार उर्स का मेला भी भरने लगा है जहां कौमी एकता वाला मुशायरा आयोजित किया जाता है। जहां हिन्दू-मुस्लिम शायर शिरकत कर के गंगा-जमुनी तहजीब का नारा बुलन्द करते हैं और जहां……. “सभी का खून शामिल है यहां की मिट्टी में हिंदुस्तान किसी के बाप का थोड़े ही है” जैसे शेर बाअदबी से पढ़े जाते हैं।
बगदादी का नाम “अबु बकर अल बगदादी” से बदल कर अब…… रहमतुल्ला अलैहि बाबा बगदादी हो गया है । सुना है कि बसरा के कोई पहुंचे हुए फकीर थे जो काफिर-मोमिन एकता के बहुत बड़े वाले पक्षधर थे । उन्ने इस एकता को कायम करने व काफिर-मोमिनों में भाईचारा बढ़ाने के लिए खून-पसीना एक कर दिया था। वो तो “अल-ट्रम्प बिन्त अल-अमरीकी” नामक शैतान ने उनको कत्ल कर दिया वरना वे इस पूरी दुनिया में अमन-चैन कायम कर के दम लेते।
कुछ भी हो हिंदुओं की अगाध श्रद्धा है बगदादी बाबा में……. बड़े भले आदमी बताये जाते हैं । बहुतई नेक और रहमदिल। बाबा बिगड़े काम बनाते हैं। काम-धंधे में बरक्कत लाते हैं। सूनी मांग सजाते हैं। पीली गोद को हरी करते हैं। भूत-प्रेत , किया-कराया , बीमारी-मुकद्दमा , मनचाहा प्यार-शादी , सेहत-रंगत , वशीकरण , मुठकरनी…. सब परेशानियों का तोड़ है बाबा बगदादी की मजार। बड़े-बड़े फ़िल्म स्टार फूलों की चादर का जै बड़ा सा टोकरा अपने सर पर धर कर नंगे पैर मजार पर आते हैं और अपनी फिल्म को सुपरहिट करवाने के लिए दुआ मांगते हैं।
बड़े-बड़े राजनेता तक बाबा बगदादी की मजार पर मत्था टेकने आते हैं और चुनाव में विजयी होने की दुआ मांगते हैं, जिनके बाप-दादाओं ने सर झुकाना तो दूर कभी किसी मजार पर पैर तक नहीं रखा उनकी औलादें भी यहां आकर सर झुकाती हैं और अपने cm बनने की दुआ मांगती हैं बाबा बगदादी से। हर जुमे के दिन बाबा बगदादी की मजार पर सामूहिक नमाज पढ़ी जाती और देश में अमन-चैन के लिए दुआ मांगी जाती हैं।
आशीष प्रधान की फेसबुक वॉल से-

 


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