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MSME के सोलर चरखा मिशन से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार, यूपी ने मारी बाजी

MSME के सोलर चरखा मिशन से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार, यूपी ने मारी बाजी
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने सोलर चरखा मिशन की शुरुआत की थी। MSME मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को विशेष रूप से रोजगार दिलाना है। इस योजना के माध्यम से सरकार खादी कपड़ों को बढ़ावा देना चाहती है।
इसके अंतर्गत ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण फ्रेंडली खादी फैब्रिक को विकसित किया जाएगा। सरकार की इस योजना से अब कोविड महामारी में कई प्रवासी महिला श्रमिकों को रोज़गार मिल रहा है। इसकी एक बानगी उत्तर प्रदेश में देखने को मिली, जहां कई जिले इस योजना के तहत प्रवासी महिलाओं को रोजगार उपल्बध करा रहे हैं।
दरअसल सूबे के जिले बांदा में आए प्रवासी कामगारों को प्रधानमंत्री गरीब रोजगार कल्याण योजना अंतर्गत प्रशिक्षित करने के बाद, स्वरोजगार हेतु प्रेरित करने के लिए जिलाधिकारी के निर्देशन में गठित स्वयं सहायता समूह की 25 महिलाएं (जिसमें 11 प्रवासी कामगार महिलाएं हैं) के लिए महुआ की जखनी ग्राम सभा में तीस दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का प्रारंभ किया गया।
6000 रुपए महीना कमा सकती है महिलाएं
ग्राम सभा में आयोजित 30 दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में शिक्षण सत्र में महिलाओं को सोलर चरखा पर सूत कातने हेतु प्रशिक्षित किया जाएगा।
बता दें कि पूर्व में सूत काटने का कार्य हाथ के चरखे से हुआ करता था। कुछ दिनों पूर्व सोलर चरखा का उपयोग करते हुए सूत कातने की विधा को खादी ग्राम उद्योग द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। एक महिला द्वारा प्रशिक्षण के उपरांत एक दिन में 120 ग्राम सूत कात लिया जाता है। जिसकी बाजार में कीमत 232 रूपये होती है।
इस प्रकार किसी भी महिला द्वारा प्रशिक्षण के पश्चात प्रतिदिन औसतन 200 रू की आमदनी करते हुए महीने में 6000 रू की अतिरिक्त आमदनी परिवार के अन्य कार्यों को करते हुए की जा सकती है।
समूह ऋण भी मिल सकता है
सोलर चरखा पर प्रशिक्षण के उपरांत अगर समूह की महिलाओं द्वारा इच्छा व्यक्त की जाएगी तो उन्हें सोलर चरखा उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है। इसके लिए बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज भी खादी ग्राम उद्योग द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
सोलर चरखा और इसके साथ-साथ बैकवर्ड तथा फॉरवर्ड लिंकेज के लिए 30, 000 रू समूह की प्रमुख को खादी ग्राम उद्योग द्वारा नामित संस्था (जो बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज उपलब्ध कराएगी) के पास अमानत के रूप में जमा करना होता है। यह धनराशि यदि समूह प्रधान चाहे तो उन्हें समूह ऋण के रूप में उपलब्ध करवा देगा।
उत्तर प्रदेश में एनआरएलएम और खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के कन्वर्जेंस के साथ क्रियान्वित की जाने वाली यह सोलर चरखा पर एकमात्र इकाई है।
महिलाओं की मदद करेगा प्रशासन
जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल के अनुसार भविष्य में इस सूत का उपयोग करते हुए सोलर हैंडलूम की इकाई महिलाओं को प्रशिक्षित करते हुए खादी के वस्त्र बनाने हेतु पूरी इकाई की स्थापना जिले बांदा में करने का प्रयास किया जा रहा है। सोलर चरखे का उपयोग कर सूत कातने और काते गए सूत का उपयोग करते हुए सोलर हैंडलूम पर खादी के वस्त्र के निर्माण से जनपद बांदा में योजना के अनुसार भविष्य में करीब 300 महिलाओं को स्वरोजगार दिया जा सकेगा।
आपको बता दें कि सोलर चरखा मिशन MSME मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इस योजना को 2018 में पूरे देश में लॉन्च किया गया था। इससे पहले 2016 में इसका छोटा प्रारूप बिहार के नवादा जिले के गांव खंडवा में लागू किया गया था। जहां सफलता निलने के बाद इस योजना को पूरे देश में लागू करने का फैसला लिया गया। इस योजना के अंतर्गत अगर कोई व्यापार शुरू करना चाहता है तो उसे माइक्रो, स्माल एवं मीडियम इंटरप्राइजेज विभाग के साथ रजिस्टर्ड होना आवश्यक है।

 


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