Madan Mohan Malviya, संस्कृत विभाग में प्रोफेसर की नियुक्ति पर बवाल, मदन मोहन मालवीय के #BHU_में_फिरोज_क्यों कर रहा ट्रेंड

संस्कृत विभाग में प्रोफेसर की नियुक्ति पर बवाल, मदन मोहन मालवीय के #BHU_में_फिरोज_क्यों कर रहा ट्रेंड

Madan Mohan Malviya, संस्कृत विभाग में प्रोफेसर की नियुक्ति पर बवाल, मदन मोहन मालवीय के #BHU_में_फिरोज_क्यों कर रहा ट्रेंड
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
दिल्ली के जेएनयू में छात्रों का चल रहा बवाल जारी है. सोमवार को जेएनयू के छात्र-छात्राओं ने संसद भवन तक मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन पुलिस की तगड़ी घेराबंदी के कारण वह सफल नहीं हो सके. जिन छात्रों ने बैरीकेडिंग तोड़ने और धारा 144 का उलंघन करने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. उधर, दिल्ली से करीब 800 किलोमीटर दूर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय में हैशटैग के साथ #BHU_में_फिरोज_क्यों ट्रेंड कर रहा है. सोमवार की सुबह से सोशल मीडिया पर यह छाया हुआ है.
बताया गया है कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत संकाय में एक मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति की गई है. इसे लेकर बीएचयू के छात्रों ने 7 नवंबर को प्रदर्शन कर विरोध जताया था. विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियुक्ति का समर्थन करते हुए कहा है कि वह सभी को धर्म, जाति, समुदाय या लिंग के बावजूद समान अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है. दूसरी ओर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने फिरोज खान की संस्कृत साहित्य विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति का विरोध किया है. छात्र संगठन का कहना है कि यह अलीगढ़ मुस्लिम विश्ववविद्यालय की तरह बीएचयू को भी हिन्दू विवि जैसा देखा जाता है. उस पर भी संस्कृत विभाग में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति गलत है.
अमृता पांडे हैंडल से कहा गया है कि अगर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के वामपंथी प्राचार्य की मनमानी न रोकी गई तो बीएचयू भी जेएनयू बनने में वक्त नहीं लगेगा. मालवीय जी के बनाए नियम के अनुसार जिस विभाग में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति संभव नहीं, सिर्फ उसी में नियुक्ति क्यों.

एक बयान में, बीएचयू ने कहा कि प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि चयन समिति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और केंद्र सरकार के निर्धारित दिशानिर्देशों के आधार पर सर्वसम्मति से उक्त उम्मीदवार के चयन की सिफारिश की थी. कुलपति राकेश भटनागर की अध्यक्षता में चयन समिति ने 5 नवंबर को बैठक की थी. विवि प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि साक्षात्कार में आवेदकों के प्रदर्शन के आधार पर उक्त पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार की सिफारिश की थी.
विवि प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ छात्र संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान (एसवीडीवी) के साहित्य विभाग में श्री खान के चयन का विरोध कर रहे हैं. कुलपति ने छात्रों को आश्वासन दिया था कि प्रशासन धर्म, जाति, समुदाय या लिंग के बावजूद सभी को समान शैक्षिक और शिक्षण अवसर प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. श्री भटनागर ने दोहराया कि बीएचयू एक्ट का विश्वविद्यालय में चल रही चयन प्रक्रिया में अक्षर और भावना का पालन किया जा रहा है. इस बात पर सहमति बनी कि संवैधानिक या कानूनी राय उन संदेहों पर मांगी जा सकती है जो इन छात्रों के बीएचयू अधिनियम के संबंध में हैं.
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा पिछले दो दिनों से गरमाया हुआ है. बड़ी संख्या में लोग हैशटैग बीएचयू में फिरोज क्यों के साथ इस मुद्दे को ट्रेंड कर रहे हैं. हालांकि, इसमें कई ऐसे भी हैं जो इस हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर फिरोज की काबिलियत की तारीफ भी कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि फिरोज का अकादमिक रिकार्ड शानदार है. धर्म किसी को ज्ञान लेने और देने से नहीं रोकता है.
यशवंत ध्वज शाह हैंडल से ट्वीट किया गया है कि हमें खुश होना चाहिए कि मुस्लिम हमारी सांस्कृतिक भाषा को सीख रहे हैं. बड़ी संख्या में भारतीय विदेशी विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं. चर्चों में भी भारतीय हैं.

 


Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *