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रिटायर्ड IAS अफसर ने शिवराज पर जातिभेद का लगाया आरोप

रिटायर्ड IAS अफसर  ने शिवराज  पर जातिभेद का लगाया आरोप

कहा दलित होने के कारण नहीं मिला प्रमोशन

रिटायर्ड IAS अफसर ने शिवराज सरकार पर जातिवाद का आरोप लगाया है| अफसर ने कहा कि डायरेक्टर आईएस होने के बावजूद उसे अंबेडकरवादी होने के कारण कलेक्टर नहीं बनाया गया इस विषय में शिवराज द्वारा नजरअंदाज की गई चिट्ठी का भी जिक्र किया |
‘मैं दलित हूं इसलिए मुझे कलेक्टर नहीं बनाया गया’ रिटायर्ड रमेश थेटे ने रिटायर होने के फौरन बाद शिवराज सरकार पर या आरोप लगाए हैं| थेटे ने मीडिया को चिट्ठी लिख सनसनीखेज खुलासा किया है कि उनके सच्चे और स्वाभिमानीअंबेडकरवादी होने के कारण उन्हें यह सजा दी गई|
ऑफिस की टेबल पर अंबेडकर साहब की बड़ी तस्वीर रखने और समाज के दबे कुचले लोगों की मदद करने के कारण कई जाति संगठन उनके विरोधी हो गए| और उनके खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें झूठे मामलों में फंसाया|
थेटे ने अपनी चिट्ठी में बताया कि जब वह जबलपुर कमिश्नर थे तो जनभागीदारी से प्रदेश की पहली मॉडल रोड बनवाई| सैकड़ों कर्मचारियों को नियमित किया| आईटीआई बैतूल के कर्मचारियों के खिलाफ हो रहे अन्याय को रोकने की शपथ ली| तो उन पर झूठे प्रकरण लगाए गए और उन्हें जेल भेज दिया गया नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया| उज्जैन अपर आयुक्त रहते हुए कई दबे कुचले किसानों की जमीन मुक्त कराई तो जातिवाद लोकायुक्त नवलेकर ने उन पर 25 केस ठोक दिए| ‘मेरे घर पर छापेमारी की जब वहां ₹50 का नोट ही मिला तो 41 लाख अनुपात की संपत्ति होने और 8 लोन प्रकरण को बिना अभियोजन स्वीकृति के न्यायालय में पेश कर दिया गया’ उन्होंने अपनी पत्नी के ऊपर हुए केस का भी जिक्र किया| कहा कि जब मैं बेगुनाह बरी हो गया तो मेरी पत्नी पर केस ठोक दिया और उसमें मुझे सह आरोपी बनाया गया|
थेटे ने सबूत होने का दावा करते हुए कहा कि उनके पास सबूत है कि कैसे कुछ जातिवादी गिरोह ने मिलकर उनके दलित होने के कारण उनके खिलाफ षड्यंत्र कर उन्हें फंसाया|
रिटायर्ड IAS अफसर ने चिट्ठी में लिखा कि ‘मैंने वचन दिया था की आईएस की नौकरी करते हुए मीडिया से बात नहीं करूंगा लेकिन अब रिटायर हो चुका हूं.. मुक्त हो चुका हूं.. अब पर्दाफाश करूंगा’|
जाति के कारण नौकरी में रहते कैसे उन्हें परेशान किया गया रिटायर्ड अफसर ने खुलासा करने की बात कही|
31 जुलाई को रिटायर होने से ठीक 1 हफ्ते पहले 25 जुलाई को थेटे ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखकर प्रमोशन की मांग करते हुए मुख्य सचिव का पद मांगा था| लेकिन इसके बावजूद उनका प्रमोशन नहीं किया गया| थेटे का आरोप है उनके साथ ऐसा व्यवहार दलित होने के कारण हुआ| और अब जब थेटे अपनी नौकरी से मुक्त चुके हैं तो सारे खुलासे करने की बात कह रहे|

 


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