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शिक्षिका के उत्पीड़न के आरोपों में घिरे बीएचयू के पूर्व कुलपति जीसी त्रिपाठी

शिक्षिका के उत्पीड़न के आरोपों में घिरे बीएचयू के पूर्व कुलपति जीसी त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चित रहे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जीसी त्रिपाठी अपने ही विभाग की एक शिक्षिका के उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में बुरी तरह फंसते दिख रहे हैं. महिला 75 पेज और एक पेन ड्राइव के जरिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू से की है.
शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि प्रो जीसी त्रिपाठी ने पिछले डेढ़-दो सालों से निरंतर उसका उत्पीड़न किया है. प्रोफेसर त्रिपाठी ने कई बार उनके साथ द्विअर्थी बातें की. कई बार उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया और कई बार भरी मीटिंग में उसके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया. महिला का कहना है कि इस अपमानजनक व्यवहार के कारण वह मानसिक तनाव की स्थिति में है तथा कार्य करने के लिए विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रही है.

(महिला शिक्षिका की शिकायती पत्र के यह पेज.)

महिला ने अपने आरोप में कहा है कि प्रो जीसी त्रिपाठी उससे अभद्र भाषा में बात करते हैं. उस पर कमेंट करते हैं. उन्होंने कई बार झूठे आरोप लगाए तथा विभागीय मीटिंग के दौरान संस्कृत के श्लोक, कहानियों और चुटकुलों के बहाने से उस पर तंज कसा. सोशल मीडिया में महिला के शिकायत का यह पत्र वायरल होने और लोकल मीडिया में यह मामला छाया हुआ है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है.
महिला ने अपने आरोपों के लिए 75 पन्नों का प्रमाण भी सौंपा है. उसने प्रोफेसर जीसी त्रिपाठी और अपने बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी एक पेन ड्राइव में साथ संलग्न की है. महिला ने यह आरोप लगाया है कि विभागीय कार्य के लिए भी प्रो जीसी त्रिपाठी उसे अपने घर पर अकेले में आने को कहते थे. इस प्रकरण को लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ चितरंजन सिंह ने किसी भी किस्म की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. प्रोफेसर त्रिपाठी से संपर्क नहीं हो सका है.
अपने राजनैतिक रसूख के लिए पहचान रखने वाले प्रोफेसर जीसी त्रिपाठी को लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर और शहर में प्रो त्रिपाठी को लेकर कई कयासों का दौर शुरू हो गया है. ऐसी भी चर्चा है कि ऐसे मामले में शिकायत करने के बाद उन पर कार्य परिषद में फैसला लिया जा सकता है. इस मामले में उनके खिलाफ क्या कार्यवाही होगी, अब यह देखने वाली बात होगी. गौरतलब है कि पिछले महीने हिंदी विभाग के प्रोफेसर सूर्यनारायण ऐसे ही मामले में फंसे थे जिसके कारण कार्य परिषद ने उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था.

 

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