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69000 अध्यापदों की भर्तीः कटऑफ तय नहीं होने से शिक्षामित्रों को होगा फायदा, प्रयागराज में हंगामा

69000 अध्यापदों की भर्तीः कटऑफ तय नहीं होने से शिक्षामित्रों को होगा फायदा, प्रयागराज में हंगामा

प्रशांत श्रीवास्तव

लखनऊः  बेसिक शिक्षा विभाग में होने वाली 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती की खास बात यह है कि इसमें पहले से कोई कट ऑफ तय नहीं किया गया है. इसका सीधा फायदा शिक्षामित्रों को होगा, क्योंकि उन्हें मिलने वाले अतिरिक्त वेटेज से रेस में वे आगे निकल जाएंगे.
वहीं अन्य अभ्यर्थियों के लिए प्रतिस्पर्धा कड़ी हो जाएगी. पिछले शिक्षक भर्ती में पहले से ही न्यूनतम कट ऑफ मार्क्स तय कर दिए गए थे. जो सामान्य के लिए 45 और आरक्षित के लिए 40 थे. इसका असर यह हुआ कि 68500 पदों के लिए परीक्षा में बैठे 1.07 लाख अभ्यर्थियों में से महज 41556 अभ्यर्थी ही पास हुए.
परीक्षा में बैठने वाले 34311 शिक्षा मित्र थे, जिनमें से केवल 7224 ही क्वालीफाई कर पाए. कट ऑफ पहले से तय होने के कारण परीक्षा में पास सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के बाद भी करीब 28000 पद खाली रह गए थे. इसलिए इस बार पहले से कटऑफ ही नहीं किया गया है. परीक्षा के बाद रिजल्ट घोषित होने पर पदों के सापेक्ष अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार न्यूनतम कट ऑफ तय किया जाएगा.

सरकार से कटऑफ की मांग, पुलिस ने भांजी लाठी
उधर, बीएड और बीटीसी अभ्यर्थियों ने सरकार से परीक्षा में कटऑफ निर्धारित करने की मांग की है. यदि ऐसा नहीं हुआ तो परीक्षा परिणाम आने के बाद शिक्षा मित्रों को मिलने वाले प्राप्तांक में अधिकतम 25 भारांक भी जोड़े जाएंगे. ऐसे में बीएड और बीटीसी अभ्यर्थियों की तुलना में शिक्षा मित्र मेरिट में आगे निकल जाएंगे.
उदाहरण स्वरूप यदि बीएड या बीटीसी अभ्यर्थी को परीक्षा में 60 अंक मिलते हैं और शिक्षा मित्र को 40 अंक , यदि शिक्षा मित्र के पास दस वर्ष का अनुभव है तो 25 भारांक के साथ उसके कुल 65 अंक हो जाएंगे. ऐसे में वह बीएड व बीटीसी अभ्यर्थी से  मेरिट में ऊपर हो जाएगा.  इसी बात को लेकर बीएड और बीटीसी अभ्यर्थियों ने बुधवार को लखनऊ में हंगामा किया. पुलिस के मनुहार करने के बाद भी वे नहीं माने तो हल्का बल प्रयोग करना पड़ा.

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