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रामेश्वरम् से अयोध्या तक चार मार्च से रामराज्य रथयात्रा, 9000 किमी तक जागरण

रामेश्वरम् से अयोध्या तक चार मार्च से रामराज्य रथयात्रा, 9000 किमी तक जागरण
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

रणविजय सिंह

प्रयागराज कुंभ के दौरान अयोध्या राम मंदिर को लेकर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद भले ही ऐलान के बाद भी अयोध्या यात्रा से पीछे हट गए हों लेकिन रामराज्य की मांग को लेकर एक यात्रा चार मार्च को महाशिवरात्रि के दिन देशभ्रमण पर निकलने जा रही है. यह यात्रा रामेश्वरम् से शुरू होकर अयोध्या तक आएगी. रामराज्य रथयात्रा के नाम से शुरू होने वाली यह यात्रा कश्मीर में भी अलख जगाएगी. हालांकि, रामराज्य रथयात्रा के समय ही देश में आम लोकसभा चुनाव का प्रचार अभियान भी पूरे उफान पर रहेगा, इसलिए यात्रा को लेकर विवाद भी उठ सकता है.
महाराष्ट्र के पूना की श्रीरामदास मिशन यूनिवर्सल सोसायटी के तत्वावधान में निकलने वाली यह यात्रा 12 राज्यों से 9000 किमी की यात्रा चलेगी. यात्रा चार मार्च से 14 अप्रैल तक देश के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करेगी. स्वामी कृष्णानंद सरस्वती के मार्गदर्शन और श्रीशक्ति शांतानंद महर्षि के नेतृत्व में निकलने वाली इस यात्रा में विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल समेत ज्यादातर हिन्दूवादी संगठनों की सहभागिता होने की भी संभावना है.

यात्रा के पांच लक्ष्य

  • रामराज्य की पुनर्स्थापना
  • भारत की शिक्षा में रामायण का अंतर्भूत
  • श्रीराम जन्मभूमि में भव्य मंदिर का निर्माण
  • संपूर्ण भारत में गुरुवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करना
  • विश्व हिन्दू दिवस घोषित करना
  • इन शहरों से गुजरेगी यात्रा

रामेश्वरम, पुदुकोट्य, त्रिचि, पुत्तुचेरी, चेन्नई, तिरुपति, कडप्पा, कर्नूल, हैदराबाद (12 मार्च), आदिलाबाद, नागपुर (14 मार्च), अमरावती, परभणी, नगर, पूना (18 मार्च), पनबेल, रामगिरि, बोरीवली, वापी, सूरत (24 मार्च), बडोदरा, अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ, द्वारका, जामनगर, गांधीनगर (31 मार्च), पालनपुर, उदयपुर (2 अप्रैल), भीलवाड़ा, पुष्कर, जयपुर, मथुरा, दिल्ली (8 अप्रैल), रामपुर, नैमिषारण्य, लखनऊ (11 अप्रैल) होते हुए अयोध्या के नंदी ग्राम (भरत आश्रम) में 12 अप्रैल को यात्रा पहुंच जाएगी. 13 अप्रैल को पट्टाभिषेक और 14 अप्रैल श्रीरामनवमी का आयोजन होगा. अयोध्या में सप्ततीर्थों से राज्याभिषेक कर रामराज्य की घोषणा का ऐलान करने का कार्यक्रम है.

 24 फरवरी से शुरू हो चुकी है यात्रा

रामराज्य रथ 24 फरवरी को महाराष्ट्र के श्रीरामदास आश्रम-रामगिरी से रामेश्वरम् के लिए निकल चुकी है. रथ में श्रीराम सीता आंजनेय की मूर्ति, श्रीराम पादुका व हनुमत ज्योति की प्रतिष्ठा रामगिरि में की गई है. दक्षिण कर्नाटक के कोल्लूर स्थित श्रीमुकांबिका देवी मंदिर में रथ में श्रीशक्ति दीप की प्रतिष्ठा की गई है. तिरुअनंतपुरम् स्थित श्रीरामदास मिशन के प्रमुख केंद्र में रामदास आश्रम में 27 फरवरी को पहुंच चुका था. एक मार्च को श्रीनीलकंठ गुरुपाद व स्वामी सत्यानंद सरस्वती महाराज के महासमाधि मंदिर में श्रीरामराज्य रथ में गुरु ज्योति और श्रीराम ज्योति की प्रतिष्ठा की गई. दो मार्च को यह रथ रामेश्वरम् पहुंच चुका है. तीन मार्च को रामेश्वरम से समुद्र जल संकलित कर काशी विश्वनाथ के अभिषेक के लिए रथ में स्थापित किया जाएगा. इसके अगले दिन से यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी.

2018 में अयोध्या से रामेश्वरम् तक गई थी यात्रा

पिछले वर्ष 13 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर अयोध्या से रामराज्य रथयात्रा शुरू होकर विभिन्न राज्यों से होते हुए रामेश्वरम तक पहुंची थी. यह यात्रा 24 मार्च को श्रीरामनवमी के दिन श्रीराम नवमी सम्मेलन ओर श्रीराम पादुका समर्पण शोभायात्रा तिरुवनंतपुरम से शुरू होकर श्रीरामदास आश्रम चेन्कोट्टकोणम में राज्याभिषेक के साथ समाप्ति हुई थी. वैसे श्रीराम रथयात्रा सन् 1991 में कर्नाटक मूकांबिका मंदिर से रामजन्मभूमि न्यास मंच और विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य स्वामी सत्यानंद सरस्वती के नेतृत्व में शुरू हुई थी. इन यात्राओं से की गई जागरूकता का नतीजा है कि कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और दक्षिण महाराष्ट्र में भी श्रीराम नवमी धूमधाम से मनाई जाने लगी है.
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