Supreme Court, रामलला विराजमान के पास दीपोत्सव को नहीं मिली इजाजत, रिसीवर बोले- सुप्रीम कोर्ट से लाओ अनुमति

रामलला विराजमान के पास दीपोत्सव को नहीं मिली इजाजत, रिसीवर बोले- सुप्रीम कोर्ट से लाओ अनुमति

Supreme Court, रामलला विराजमान के पास दीपोत्सव को नहीं मिली इजाजत, रिसीवर बोले- सुप्रीम कोर्ट से लाओ अनुमति
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी होने में सिर्फ एक दिन और है. सभी पक्ष अपनी बात रख चुके हैं. 17 नवंबर के पहले अयोध्या मामले में फैसला आने की उम्मीद है. इसके पहले ही अयोध्या में दीपावली के दिन राम मंदिर परिसर में दीपदान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
अयोध्या के साधु-संतों और विश्व हिन्दू परिषद के रामलला स्थान पर दीपोत्सव के अनुरोध को रिसीवर ने ठुकरा दिया है. रिसीवर ने साफ कहा है कि नई परंपरा के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेकर आइए, फिर कार्यक्रम करिए. इस मामले को लेकर संतों ने अलग से रणनीति बनाने की बात कही है. दूसरी ओर से अयोध्या में सरयू के घाटों पर 24, 25 और 26 अक्टूबर को होने वाले सरकारी दीदोत्सव कार्यक्रम को लेकर मंगलवार मुख्य सचिव समेत तमाम बड़े अफसरों का जत्था अयोध्या पहुंचा. अफसरों ने घाटों की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने की हिदायत भी दी.
अयोध्या में 2017 से ही योगी सरकार बड़े पैमाने पर दीपोत्सव कार्यक्रम का आयोजन कर रही है. दीपोत्सव का विश्व रिकार्ड भी बन चुका है. अयोध्या के संतों को यह बात सालती और कचोटती भी है कि अयोध्या की हर गली दीपावली के दिन जगमगाती है. विहिप प्रवक्ता शरज शर्मा कहते हैं कि दीपावली के दिन पूरी दुनिया झालरों और दीपों की आभा से झूमती है लेकिन जिन भगवान राम के श्रीलंका विजय से वापसी के बाद यह त्योहार मनाया जाता है, उनके जन्मस्थान पर ही अंधेरा रहता है. इसलिए अयोध्या के संतों ने तय किया कि दीपावली के दिन रामलला के जन्मस्थान पर भी 51000 दीपों की माला पिरोई जाए और जन्मस्थान को रोशनी से नहलाया जाए.
बताते हैं कि इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को संतों और विहिप प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधि मंडल रिसीवर मनोज मिश्र से मिला लेकिन उन्होंने इससे पूरी तरह इनकार कर दिया. रिसीवर मनोज मिश्र का कहना है कि रामजन्मभूमि का पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. जन्मस्थान पर कोई भी नई परंपरा शुरू करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. संतों को दीप जलाने हैं तो वह सुप्रीम कोर्ट से इसकी अनुमति लेकर आएं.
इस मामले में विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या के संतों को यह बात लगातार कचोटती रही है कि पूरी अयोध्या में दीप जलाए जाते हैं लेकिन रामलला के जन्मस्थान पर त्योहार के दिन भी दीप नहीं जलते. दीपोत्सव का कार्यक्रम संतों का है. विहिप उनके निर्देशों का पालन करती है.
विहिप प्रवक्ता शरद ने कहा कि रिसीवर के इनकार करने पर संतों ने अलग से रणनीति बनाने का फैसला किया है. इसके लिए जल्द ही संतों की बैठक होगी.

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