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रायसीना संवाद ने दिखाया भारत का दम, ईरान, रूस समेत सात देश कर रहे संवाद

रायसीना संवाद ने दिखाया भारत का दम, ईरान, रूस समेत सात देश कर रहे संवाद

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि रायसीना संवाद महत्‍वपूर्ण वैश्विक और रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के उपयोगी मंच के रूप में उभरा है

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि रायसीना संवाद महत्‍वपूर्ण वैश्विक और रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के उपयोगी मंच के रूप में उभरा है. कल नई दिल्‍ली में इस वार्षिक आयोजन में शामिल होने के बाद एक ट्वीट में उन्‍होंने कहा कि इस दौरान भारत के प्रमुख मित्र देशों के नेताओं से मिलने का उन्‍हें अवसर मिला.
वैश्विक सम्‍मेलन रायसीना संवाद कल शाम नई दिल्‍ली में शुरू हुआ. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी उद्घाटन सत्र में शामिल हुए. न्‍यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री हेलेन क्‍लार्क, अफगानिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति हामिद करजई, कनाड़ा के पूर्व प्रधानमंत्री स्‍टीफन हार्फर, स्‍वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री कार्ल बिल्‍ड, डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री एंडर्स फॉग रासमुसेन, भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और दक्षिण कोरिया के पूर्व प्रधानमंत्री हॉन सियुंग सू ने भी इस सत्र में भाग लिया. सात पूर्व राष्‍ट्रयाध्‍यक्षों या शासनाध्‍यक्षों ने विश्‍व के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए.
उद्घाटन सत्र में डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व नैटो महासिचव एंडर्स फॉग रासमुसेन ने कहा कि लोकतांत्रिक देशों का एक वैश्विक गठबंधन बनाया जाना चाहएि और भारत इसमें महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. ऑस्‍ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्‍कॉट मॉरिशन ने रायसीना संवाद के लिए भेजे गए वीडियो संदेश में कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्‍वपूर्ण भागीदार है और बना रहेगा. उन्‍होंने कहा कि हिंद-महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका रही है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति विभिन्‍न पक्षों के साथ महत्‍वपर्ण चुनौतियों पर ध्‍यान केन्द्रित करने की रही है. उन्‍होंने कहा कि बहुधुव्रीय विश्‍व में वैश्विक हित के प्रति योगदान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
न्‍यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री हेलेन क्‍लार्क ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने का आह्वान करते हुए कहा कि इसके लिए कार्बन उत्‍सर्जन कम से कम करने का लक्ष्‍य हासिल करना आवश्‍यक है. उन्‍होंने कहा कि इस लक्ष्‍य तक पहुंचने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सहमति और तालमेल जरूरी है.
इस प्रतिष्ठित संवाद कार्यक्रम की पांचवी कड़ी का आयोजन विदेश मंत्रालय और आब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने संयुक्‍त रूप से किया है. तीन दिन के इस सम्‍मेलन में रूस, ईरान, ऑस्‍ट्रेलिया, मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क, उज्‍बेकिस्‍तान और यूरोपीय संघ सहित बारह देशों के विदेश मंत्री भाग ले रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री मोहम्‍मद जवाद ज़रीफ की भागीदारी ऐसे समय में महत्‍वपूर्ण मानी जा रही है जब अमरीका और ईरान के बीच गतिरोध जारी है.

 


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