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रेलवेः फाइलों के ढेर से निकलकर दफ्तर बनेंगे पेपर लेस, गुंटूर से काम शुरू

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
भारतीय रेलवे चोला बदल रहा है. जल्द ही रेलवे के कार्यालयों में फाइलों के ढेर की जगह केवल कंप्यूटर और लैपटॉप ही दिखाई देंगे. परियोजनाओं की ड्राइंग, भुगतान, कर्मचारियों की नौकरी से जुड़े सभी कामकाज, यात्रियों से जुड़े काम… सभी कुछ अब स्क्रीन पर दिखेंगे. रेलवे बोर्ड ने रेलटेल को चरणबद्ध तरीके से रेलवे कार्यालयों को पेपर लेस बनाने का काम सौंपा है. नई प्रणाली कार्यालय फ़ाइलों और दस्तावेजों को संभालने के लिए एक विश्वसनीय, कुशल और प्रभावी तरीका प्रदान करेगी.
SCR ज़ोन और गुंटूर डिवीजन से इसकी शुरुआत हो गई है. गुंटूर डिवीजन पेपरलेस सेवाओं को अपनाने वाला पहले रेलवे का पहला प्रतिष्ठान बन गया हैं. रेलटेल ई-ऑफिस परियोजना भारत सरकार के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कार्यक्रम के तहत एक मिशन मोड प्रोजेक्ट (एमएमपी) है.
एससीआर ज़ोन का कार्यान्वयन कार्य 19 जून तक पूरा हो जाने की संभावना है, जबकि जोनल मुख्यालय और एक डिवीजन के लिए काम 19 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा. इससे भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों को लाभ होगा.
पेपरलेस प्रणाली का लक्ष्य अधिक कुशल, प्रभावी और पारदर्शी अंतर-सरकारी और अंतर-सरकारी लेनदेन और प्रक्रियाओं की शुरूआत करना है. यह पारदर्शिता को बढ़ाने, जवाबदेही बढ़ाने और परिवर्तन करने के लिए एक ढांचे के तहत स्वतंत्र कार्यों और प्रणाली को एक एकल पुन: प्रयोज्य प्रणाली के रूप में बनाया जाएगा.

ये है पूरी परियोजना

रेलटेल ई-ऑफिस परियोजना भारत सरकार के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कार्यक्रम के तहत एक मिशन मोड प्रोजेक्ट (एमएमपी) है. रेलटेल ने ई-ऑफिस के बुनियादी ढांचे को सक्षम बनाने के लिए धरातल से काम शुरू करने की पहल की है. परियोजना को चार मॉड्यूलों के साथ रेलवे बोर्ड को सौंपा गया था. इसमें प्रबंधन प्रणाली (eFile), नॉलेज मैनेजमेंट सिस्टम (KMS), सहयोग और संदेश सेवा (CAMS) के साथ कार्मिक सूचना प्रबंधन प्रणाली (PIMS) शामिल है. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने गुरुवार को दक्षिण मध्य रेलवे जोन (एससीआर) और गुंटूर में ई-ऑफिस (पेपरलेस) प्रणाली का उद्घाटन कर इस परियोजना को आगे बढ़ाने का काम किया.
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