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छत्तीसगढ के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश में भी राहुल राज, बसपा ने किया समर्थन का ऐलान

पंद्रह साल पुरानी भाजपा सरकार को पीछे धकेलते हुए कांग्रेस ने सत्ता का वनवास समाप्त कर लिया। कांटे के मुकाबले में कांग्रेस ने भाजपा से पांच सीटों की बढ़त हासिल की है। 

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के सभी परिणाम घोषित हो चुके हैं. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 90 में से 68 सीटें जीतकर पहले ही सत्ता हासिल कर चुकी है. तेलंगाना में टीआरएस और मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट की सरकारें तय हो चुकी हैं. इसके साथ ही राजस्थान और मध्य प्रदेश में किसी दल को पूर्ण बहुमत न मिलने के कारण चल रही उठा-पटक को खत्म करते हुए बहुजन समाज पार्टी ने समर्थन का ऐलान कर दिया है.
बसपा प्रमुख मायावती ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस के समर्थन का ऐलान करते हुए बुधवार को कहा कि बीजेपी सत्ता में आने के लिए जोड़तोड़ में लगी हुई है. मैं उनका ये मकसद पूरा नहीं होने दूंगी. कांग्रेस की नीतियों से सहमति ना जताते हुए भी बसपा मध्य प्रदेश में कांग्रेस का समर्थन करेगी. अगर राजस्थान में भी कांग्रेस को समर्थन की जरूरत पड़ेगी तो वहां भी बसपा उन्हें समर्थन करेगी.
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस सबसे बडे दल के रूप में सामने आई है लेकिन दोनों राज्यों में कुछ सीटों की कमी के कारण वह सत्ता से दो एक कदम दूर ठिठक गई थी लेकिन अब उसका रास्ता आसान हो गया है. राजस्थान में कांग्रेस 99 सीटों पर अटक गई है. राजस्थान में बहुमत के लिए 101 विधायकों की जरूरत है जबकि बसपा के पास 6 विधायक हैं.
मध्य प्रदेश में बहुमत के लिए 116 विधायकों की जरूरत है जबकि कांग्रेस 114 सीटों पर जीत हासिल की है. ऐसे में उसे दो विधायकों के समर्थन की जरूरत थी. यहां बसपा के दो विधायक जीते हैं. भारतीय जनता पार्टी को 109 सीटों पर जीत के साथ सत्ता से सात कदम दूर रह गई. 
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की 15 वर्षों से सरकारें रही हैं. ऐसे में कांग्रेस को यहां वापसी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है. जबकि राजस्थान में वसंधुरा राजे के नेतृत्व में 2013 में अशोक गहलोत की सरकार को भाजपा ने उखाड़ फेंका था. इस बार मतदान के पहले सर्वे में भाजपा को सत्ता से बेदखल होता दिखाया गया. हालांकि, चुनावों के दौरान भाजपा से बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं, जैसे नारे भाजपाइयों ने भी लगाए थे. इसके बाद भी भाजपा ने तगड़ी वापसी की. हालांकि, सत्ता से वह दूर रह गई. मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता के करीब तक भाजपा को पहुंचाया लेकिन सात कदम दूर पहुंचकर ठिठक गए. यहां कांग्रेस उन पर बीस साबित हुई.
पंद्रह साल पुरानी भाजपा सरकार को पीछे धकेलते हुए कांग्रेस ने सत्ता का वनवास समाप्त कर लिया। कांटे के मुकाबले में कांग्रेस ने भाजपा से पांच सीटों की बढ़त हासिल की है। 
देर रात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया. बुधवार, दोपहर 12 बजे कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलेगा. वहीं, भोपाल में पार्टी विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा. प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. 
MP Rajasthan Final Tally
आंकड़ों को देखकर भाजपा नेताओं ने जोड़-तोड़ कर सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक इसके लिए भाजपा नेताओं ने उन विधायकों से संपर्क शुरू कर दिया है जो निर्दलीय हैं या बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी अथवा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बैनर पर चुनाव जीते हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसद राकेश सिंह ने कहा कि कई निर्दलीय और अन्य दलों के लोग भाजपा के संपर्क में हैं.
पिछले पंद्रह साल से सत्ता सुख भोग रही भाजपा प्रदेश में अब भी गठबंधन सरकार बनाने के प्रयास में लगी है. इसकी वजह ये है कि अब तक आए चुनाव परिणामों को देखकर लग रहा है कि प्रदेश में कोई भी दल अकेले के दम पर सरकार शायद नहीं बना पाए. ऐसे हालात में भाजपा ने अपने नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाने के लिए जोड़ तोड़ शुरू कर दी है. दूसरी ओर कांग्रेस भी इसी तरीके के जोड़-तोड़ में लगी है.

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