राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला, कहा-चौकीदार ने सुप्रीमकोर्ट के एक न्यायमूर्ति को कोर्ट-पुतली बना लिया था

उच्चतम न्यायालय के रिटायर्ड जज कुरियन जोसेफ के विवादित बयान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला है. राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि चौकीदार ने सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायमूर्ति को कोर्ट-पुतली बना लिया था. चौकीदार का दुर्भाग्य है कि देश में ईमानदार जजों की कमी नहीं है, जिनके लिए सत्य हमेशा सत्ता से बड़ा होता है. वे सत्ता के दंभ को सत्य पर हावी होने नहीं देते. देश को ऐसे जजों पर गर्व है.
https://twitter.com/RahulGandhi/status/1069879715945738240
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सुप्रीम कोर्ट में जनवरी में सामने आए विवाद को लेकर नए सिरे से बवाल खड़ा हो सकता है. क्योंकि, इसे लेकर भाजपा नेताओं की ओर से भी पलटवार की संभावना है.
बता दें कि जस्टिस कुरियन जोसेफ ने इस प्रेस कांफ्रेंस को लेकर कहा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य जजों के साथ उसमें इसलिए हिस्सा लिया था क्योंकि उन्हें लग रहा था कि तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा को कोई बाहर से कंट्रोल कर रहा है. उन्हें ऐसा भी प्रतीत हो रहा था कि तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा सुप्रीम कोर्ट के जजों को राजनीतिक पक्षपात के साथ केस आवंटित कर रहे थे. राहुल गांधी का राजनैतिक हमला जोसेफ के इसी बयान को लेकर आया है.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ ने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य जजों जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर के साथ मिलकर की गई प्रेसवार्ता को लेकर टाइम्स अॉफ इंडिया के साथ विस्तार से बातचीत की थी. टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार यह पूछने पर कि जस्टिस दीपक मिश्रा के सीजेआई पद संभालने के महज चार महीनों में ऐसा क्या गलत हुआ, जस्टिस जोसेफ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कामकाज को बाहरी रूप से प्रभआवित करने की कई घटनाएं हुईं. यह सभी घटनाएं जजों को आवंटित किए जा रहे मामलों और सुप्रीम कोर्ट के साथ हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित थीं.
हालांकि, इंटरव्यू में जोसेफ ने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया जिस पर उनके समेत तीन अन्य जजों को पूर्व सीजेआई को नियंत्रित करने की आशंका थी. उन्होंने कहा ‘हम लोगों को ऐसा लग रहा था कि कोई बाहर से तत्‍कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा को कंट्रोल कर रहा है. इसी कारण हम लोग उनसे मिले. उनसे कहा और उन्‍हें लिखा कि सुप्रीम कोर्ट की स्‍वतंत्रता और महत्‍व को बनाए रखा जाए. फिर जब हम लोगों की सभी कोशिशें विफल हो गईं तो हमने प्रेस कांफ्रेंस करने का निर्णय लिया.’

गौरतलब है कि इससे पहले रिटायरमेंट के एक दिन बाद, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने शुक्रवार को कहा था कि उन्हें 12 जनवरी को 4 जजों की ओर से किए गए विवादित प्रेस कांफ्रेंस को लेकर कोई पछतावा नहीं है. इसमें उन्होंने तथा तीन अन्य न्यायाधीशों ने शीर्ष अदालत और चीफ जस्टिस के कामकाज को लेकर विभिन्न मुद्दे उठाए थे. पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि चीजें अब बदल रही हैं.

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि शीर्ष अदालत की व्यवस्थाओं और परंपराओं में बदलाव आने में समय लगेगा क्योंकि वे लंबे वक्त से मौजूद हैं. जोसेफ ने न्यायाधीश रंजन गोगोई (अब सीजेआई), न्यायमूर्ति एमबी लोकूर और पूर्व न्यायाधीश जे चेलमेश्वर के साथ मिलकर एक संवाददाता सम्मेलन किया था जिसमें शीर्ष अदालत में मामलों के आवंटन सहित गंभीर प्रश्न उठाए थे.

(यह तस्वीर 12 जनवरी 2018 की है जब सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने की थी प्रेसवार्ता.)

उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश द्वारा न्यायिक शक्तियों के इस्तेमाल पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं होता. उन्होंने कहा कि जिस तरह से नियुक्तियों में ‘‘चुनिंदा तरीके से देरी की जा रही है या इन्हें रोककर रखा जा रहा है’’ वह ‘‘एक तरीके से’’ न्याय में ‘‘हस्तक्षेप’’ है.

यह पूछने पर कि क्या उन्हें 12 जनवरी के संवाददाता सम्मेलन का हिस्सा होने का पछतावा है, उन्होंने कहा, ‘‘आप किस तरह का अजीब सवाल पूछ रहे हैं? मैंने जो कुछ किया मुझे उसका कोई पछतावा नहीं है, मैंने बहुत सोच समझकर एक उद्देश्य से ऐसा किया, ऐसा उद्देश्य जिसके लिए कोई और रास्ता नहीं बचा था. जब हमने ऐसा किया तब यही स्थिति थी.’’

जोसेफ ने कहा कि जहां तक शीर्ष अदालत की बात है तो उच्चतर न्यायपालिका में नियुक्तियों और स्थानान्तरण से जुड़े ‘मैमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ (एमओपी) अंतिम रूप में है और कॉलेजियम मसौदे के अनुसार काम कर रहा है.

उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब सरकार का कहना है कि एमओपी पर काम चल रहा है और इसे शीर्ष अदालत की सलाह से तैयार किया जा रहा है. जोसेफ ने कहा, ‘‘जहां तक उच्चतम न्यायालय की बात है तो यह (एमओपी) अंतिम रूप में है, जहां तक सरकार की बात है तो यह अंतिम रूप में नहीं है.’’ पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय में कोई भ्रष्टाचार नहीं है. मैंने यह कभी नहीं किया. मैंने इसके बारे में कभी नहीं सुना.’’

यह पूछे जाने पर कि क्या न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस आम राय से सहमत नहीं हूं कि समाज में भ्रष्टाचार है लेकिन मैं इस बात को मानता हूं कि लोगों में कुछ निचले स्तरों पर भ्रष्टाचार को लेकर कुछ नजरिया है.’’ 

पूर्व न्यायाधीश जोसफ ने कहा कि अगर पूर्व न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद सरकार द्वारा कोई पद ‘‘उपकार स्वरूप’’ (चैरिटी) दिया जाता है तो उन्हें इसे स्वीकार नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूर्व न्यायाधीशों को रिटायरमेंट के बाद केवल उस स्थिति में पद संभालना चाहिए जब सरकार द्वारा उनसे न्यायाधिकरण की जिम्मेदारी संभालने के लिए ‘‘सम्मानपूर्वक आग्रह’’ किया जाए.

 

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